उत्तराखंड के सांसदों की निधि खर्च में सुस्ती

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देवभूमि में विकास के नाम पर आवंटित करोड़ों रुपये या तो कागजों में उलझे हैं या फाइलों की धूल झाड़ने का इंतजार कर रहे हैं। उत्तराखंड के आठ सांसदों को उनके वर्तमान कार्यकाल में मिली 95.90 करोड़ रुपये की सांसद निधि में से दिसंबर 2025 तक महज 18 प्रतिशत राशि ही खर्च हो पाई है। हालात यह हैं कि सैकड़ों प्रस्तावित कार्यों में से 232 को स्वीकृति तक नहीं मिल सकी, जबकि स्वीकृत परियोजनाओं में भी 87 काम अब तक धरातल पर शुरू नहीं हो पाए हैं। सूचना के अधिकार के तहत सामने आए इस आंकड़े ने विकास की रफ्तार, प्रशासनिक कार्यशैली और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं, तीनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, सामुदायिक भवन, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की जरूरत बनी हुई है, दूसरी ओर उपलब्ध निधि का बड़ा हिस्सा उपयोग से बाहर है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर विकास की गाड़ी किस मोड़ पर अटक गई है? दिव्य हिमगिरि रिपोर्ट।

जनता ने भरोसा देकर संसद भेजा, विकास के लिए करोड़ों रुपये आवंटित हुए, लेकिन जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। उत्तराखंड के सांसदों को मिली सांसद निधि का बड़ा हिस्सा अब भी खर्च होने का इंतजार कर रहा है। गांवों में सड़कें अधूरी हैं, सामुदायिक भवनों के प्रस्ताव फाइलों में अटके हैं, पेयजल योजनाएं गति नहीं पकड़ पा रहीं, और कई विकास कार्य कागजों से बाहर ही नहीं आ सके। ऐसे में यह सवाल सीधे जनप्रतिनिधियों से है जब संसाधन उपलब्ध थे तो विकास की रफ्तार इतनी धीमी क्यों रही? सांसद निधि का उद्देश्य ही स्थानीय जरूरतों के अनुरूप त्वरित विकास कार्य कराना है, ताकि छोटी लेकिन महत्वपूर्ण परियोजनाएं बिना लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के पूरी हो सकें। मगर हालिया आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड में यह मंशा अपेक्षित परिणाम तक नहीं पहुंच सकी। करोड़ों रुपये आवंटित होने के बावजूद बड़ी संख्या में कार्य स्वीकृति या क्रियान्वयन के स्तर पर अटके पड़े हैं। सूचना के अधिकार के तहत काशीपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट को ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय, उत्तराखंड द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी से यह खुलासा हुआ है। लोक सूचना अधिकारी, उपायुक्त प्रशासन हेमंती गुंजियाल ने पत्रांक 245531 के माध्यम से दिसंबर 2025 तक का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 तक उत्तराखंड के कुल 8 सांसदों, 5 लोकसभा और 3 राज्यसभा को कुल 95.90 करोड़ रुपये की सांसद निधि आवंटित हुई। इसमें 49 करोड़ रुपये लोकसभा सांसदों को तथा 46.90 करोड़ रुपये राज्यसभा सांसदों को मिले। लेकिन खर्च की स्थिति निराशाजनक रही। वर्तमान कार्यकाल में पूर्ण कार्यों पर कुल 7.08 करोड़ रुपये तथा चल रहे कार्यों पर 10.65 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यानी कुल मिलाकर केवल 18 प्रतिशत राशि ही उपयोग में लाई जा सकी। लोकसभा सांसदों की स्थिति और भी चिंताजनक है। पांचों लोकसभा सांसदों ने पूर्ण कार्यों पर 2.089 करोड़ रुपये तथा अपूर्ण/चल रहे कार्यों पर 1.191 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जो कुल आवंटित राशि का लगभग 7 प्रतिशत है। इसके विपरीत राज्यसभा के तीन सांसदों ने पूर्ण कार्यों पर 4.99 करोड़ तथा चल रहे कार्यों पर 9.46 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जो उनकी कुल निधि का लगभग 31 प्रतिशत है। यदि सांसदवार खर्च की बात करें तो नैनीताल-उधमसिंह नगर सांसद अजय भट्ट ने 18 प्रतिशत निधि खर्च की है, जो लोकसभा सांसदों में सर्वाधिक है। टिहरी गढ़वाल सांसद माला राजलक्ष्मी शाह ने 14 प्रतिशत निधि खर्च की। गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी के मामले में दिसंबर 2025 तक खर्च शून्य दर्शाया गया है। अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा तथा हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 1 प्रतिशत से भी कम राशि खर्च की है। राज्यसभा सांसदों में नरेश बंसल ने 47 प्रतिशत निधि खर्च कर सबसे आगे स्थान बनाया है। कल्पना सैनी ने 27 प्रतिशत तथा महेंद्र भट्ट ने 6 प्रतिशत निधि खर्च की है। कार्य प्रस्तावों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। कुल 232 प्रस्तावित कार्यों को अधिकारियों द्वारा स्वीकृति ही नहीं दी गई। वहीं स्वीकृत कार्यों में से 87 कार्य दिसंबर 2025 तक प्रारंभ नहीं हो सके। नैनीताल-उधमसिंह नगर सांसद अजय भट्ट ने 316 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 229 स्वीकृत हुए। 54 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, 154 कार्य प्रगति पर हैं तथा 21 कार्य प्रारंभ नहीं हुए। टिहरी गढ़वाल सांसद माला राजलक्ष्मी शाह ने 128 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 89 स्वीकृत हुए। 11 पूर्ण, 64 प्रगति पर तथा 14 कार्य प्रारंभ नहीं हुए। गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने वर्तमान कार्यकाल में 4 कार्य प्रस्तावित किए। इनमें से 2 स्वीकृत हुए, 1 पूर्ण और 1 प्रगति पर है, लेकिन दिसंबर 2025 तक खर्च शून्य दर्शाया गया है। अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा के 4 स्वीकृत कार्यों में 2 प्रारंभ नहीं हुए तथा 2 प्रगति पर हैं। कुल खर्च 0.041 करोड़ रुपये दर्शाया गया है, जो 1 प्रतिशत से भी कम है। हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 16 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 10 स्वीकृत हुए। 1 पूर्ण, 5 प्रगति पर तथा 4 प्रारंभ नहीं हुए। कुल खर्च 0.080 करोड़ रुपये, यानी 1 प्रतिशत से कम है। राज्यसभा सांसदों में नरेश बंसल ने 191 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 144 स्वीकृत हुए। 23 पूर्ण, 92 प्रगति पर तथा 29 प्रारंभ नहीं हुए। कल्पना सैनी ने 121 कार्य प्रस्तावित किए, 89 स्वीकृत हुए। 26 पूर्ण, 60 प्रगति पर तथा 3 प्रारंभ नहीं हुए। महेंद्र भट्ट ने 44 कार्य प्रस्तावित किए, 23 स्वीकृत हुए। 2 पूर्ण, 7 प्रगति पर तथा 14 कार्य प्रारंभ नहीं हो सके। इन आंकड़ों ने प्रदेश में विकास की गति, प्रशासनिक स्वीकृति प्रक्रिया और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता, तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सांसद निधि का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर त्वरित विकास सुनिश्चित करना है, लेकिन जब आवंटित राशि का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो पा रहा, तो यह स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या सांसद और संबंधित विभाग इस सुस्ती को दूर कर लंबित कार्यों को गति देंगे, या फिर करोड़ों रुपये यूं ही अधर में लटके रहेंगे।

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