उत्तराखंड में दायित्वधारियों की नई सूची जल्द!

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देवभूमि की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। उत्तराखंड शासन द्वारा विभिन्न विभागों के अंतर्गत गठित आयोगों, निगमों, परिषदों, समितियों और संस्थानों में तैनात अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सलाहकार और सदस्यों का विस्तृत ब्योरा तलब किए जाने के बाद यह लगभग स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि दायित्वधारियों की नई सूची पर मंथन अंतिम चरण में है। शासन का यह शासकीय आदेश महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संभावित पुनर्गठन की ठोस तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। कई पदों पर लंबे समय से लंबित नियुक्तियों, निष्क्रिय दायित्वों और राजनीतिक संतुलन के समीकरणों को ध्यान में रखते हुए सरकार व्यापक समीक्षा कर रही है। ऐसे में सत्तारूढ़ दल के भीतर भी दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है, जबकि संगठन और सरकार के बीच समन्वय बैठकों का दौर तेज होने की चर्चा है। देवभूमि की राजनीति में लंबे समय से प्रतीक्षित इस सूची को लेकर कार्यकर्ताओं और दावेदारों में उत्सुकता चरम पर है। शासन के ताजा कदम ने संकेत दे दिए हैं कि प्रतीक्षा की घड़ी अब अधिक लंबी नहीं हो सकती और नई सूची जारी होते ही सत्ता और संगठन दोनों में नई सियासी सरगर्मी देखने को मिल सकती है। दिव्य हिमगिरि रिपोर्ट

देवभूमि की सियासत में लंबे समय से चली आ रही प्रतीक्षा अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ती दिख रही है। उत्तराखंड शासन ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण शासकीय आदेश जारी कर विभिन्न विभागों के अंतर्गत गठित आयोगों, निगमों, परिषदों, समितियों और स्वायत्तशासी संस्थानों में तैनात अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सलाहकारों और सदस्यों का विस्तृत ब्योरा तलब किया है। इस औपचारिक लेकिन बेहद अहम कदम ने संकेत दे दिए हैं कि दायित्वधारियों की नई सूची पर सरकार गंभीरता से काम कर रही है और सूची जारी होने में अब अधिक समय नहीं लग सकता। शासन स्तर से मांगी गई जानकारी में न केवल वर्तमान में कार्यरत पदाधिकारियों का विवरण, बल्कि रिक्त पदों, कार्यकाल की स्थिति, नियुक्ति की तिथि और दायित्वों की प्रकृति से संबंधित सूचनाएं भी शामिल बताई जा रही हैं। इससे स्पष्ट है कि यह महज आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि व्यापक समीक्षा की प्रक्रिया का हिस्सा है। इस कदम को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उत्तराखंड की राजनीति में दायित्वधारियों की सूची का विशेष महत्व रहा है। सत्ता और संगठन के बीच संतुलन साधने, वरिष्ठ नेताओं को सम्मानजनक जिम्मेदारी देने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने का यह प्रमुख माध्यम माना जाता है। कई आयोग और निगम लंबे समय से आंशिक रूप से निष्क्रिय स्थिति में हैं या वहां नियमित अध्यक्ष/उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो पाई है। ऐसे में शासन की यह पहल इन संस्थाओं को सक्रिय करने की दिशा में भी कदम मानी जा रही है। देहरादून सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में राजनीतिक हलकों में इस समय एक ही चर्चा है, “सूची कब जारी होगी?” सत्तारूढ़ दल के भीतर कई वरिष्ठ और युवा नेता लंबे समय से दायित्व मिलने की प्रतीक्षा में हैं। संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कार्यकर्ताओं को भी उम्मीद है कि उन्हें अवसर मिल सकता है। सरकार इस बार क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक सक्रियता जैसे कारकों को ध्यान में रखकर सूची तैयार कर रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि नई सूची केवल औपचारिक नहीं होगी, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से तैयार की जा रही है। शासन द्वारा मांगी गई जानकारी में यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि किन आयोगों और निगमों में कितने पद रिक्त हैं। कई संस्थाओं में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद महीनों से खाली है, जिससे निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। यदि इन संस्थाओं में नियमित नियुक्तियां हो जाती हैं तो नीतिगत फैसलों में तेजी आएगी और विभागीय कार्यों में भी गति देखने को मिलेगी विपक्षी दल भी इस पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार को पारदर्शिता बरतते हुए नियुक्तियां करनी चाहिए और राजनीतिक समीकरणों के बजाय योग्यता को प्राथमिकता देनी चाहिए। हालांकि सत्तारूढ़ दल का दावा है कि नियुक्तियां पूरी तरह नियमों के तहत और शासनादेशों के अनुरूप की जाएंगी। हालांकि शासन की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई तिथि घोषित नहीं की गई है, लेकिन जिस तेजी से विभागों से जानकारी मांगी गई है, उससे यह संकेत मिलते हैं कि प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच रही है। इस तरह की जानकारी संकलन के बाद अल्प समय में निर्णय लिया जाता है। राजनीतिक हलकों में अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले कुछ सप्ताह प्रदेश की राजनीति के लिए निर्णायक हो सकते हैं। शासन के ताजा आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार दायित्वों की संरचना को लेकर गंभीर है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अंतिम सूची में किन नामों को स्थान मिलता है और किन चेहरों को प्रतीक्षा जारी रखनी पड़ती है। देवभूमि की सियासत में आने वाले दिन नई राजनीतिक हलचल लेकर आ सकते हैं।

शासन की कवायद से तेज हुई सियासी अटकलें

उत्तराखंड में दायित्वधारियों की संभावित नई सूची को लेकर चर्चाएं और तेज हैं। शासन ने सभी संबंधित विभागों से वर्तमान पदाधिकारियों का विवरण, रिक्त पदों की स्थिति और कार्यकाल संबंधी जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा है। यह कदम प्रशासनिक दृष्टि से आवश्यक बताया जा रहा है, क्योंकि कई संस्थाओं में लंबे समय से नियुक्तियां लंबित हैं। यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदेश की सत्ता संरचना में दायित्वधारियों की भूमिका केवल औपचारिक नहीं होती, बल्कि वे सरकार और जनता के बीच सेतु का कार्य करते हैं। ऐसे में नियुक्तियों के माध्यम से सरकार संगठनात्मक संतुलन साधने का प्रयास करती है। इस बार सूची में नए और सक्रिय चेहरों को स्थान मिलने की संभावना अधिक है। सरकार यह संदेश देना चाहती है कि जो कार्यकर्ता और नेता संगठनात्मक रूप से सक्रिय हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है, लेकिन शासन के ताजा आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सूची कब जारी होगी और किन नामों पर अंतिम मुहर लगेगी। हालांकि शासन की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई तिथि घोषित नहीं की गई है, लेकिन जिस तेजी से विभागों से जानकारी मांगी गई है, उससे यह संकेत मिलते हैं कि प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच रही है। आमतौर पर इस तरह की जानकारी संकलन के बाद अल्प समय में निर्णय लिया जाता है।

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