उत्तरायणी कौथिक मंच से सीएम धामी का आत्मनिर्भर उत्तराखंड संकल्प

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देवभूमि की पावन वादियों में जब लोकधुनों की गूंज, पारंपरिक वेशभूषा की आभा और आस्था की उजास एक साथ मिलती है, तब उत्तरायणी कौथिक केवल उत्सव नहीं, बल्कि जनभावनाओं का महासंगम बन जाता है। देहरादून के परेड ग्राउंड में सजे इस सांस्कृतिक पर्व के मंच से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आत्मनिर्भर और समृद्ध उत्तराखंड का संकल्प दोहराते हुए विकास और संस्कृति को एक ही धारा के दो प्रवाह बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी लोक परंपराओं, भाषाओं, वाद्यों, नृत्यों और पर्वों से है, और इन्हीं जड़ों से शक्ति लेकर राज्य आज विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
मुख्यमंत्री ने ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को आत्मसात करते हुए स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, मिलेट्स, कुटीर उद्योगों और होम स्टे जैसी योजनाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोक कलाकारों के संरक्षण, युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने, महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने और पहाड़ के उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। दिव्य हिमगिरि रिपोर्ट।

जब देवभूमि की पावन वादियों में भक्ति, परंपरा और लोकधारा का संगम होता है, तब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को स्पर्श करने वाला आध्यात्मिक उत्सव जन्म लेता है। देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित चार दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव भी कुछ ऐसा ही दिव्य अनुभव बनकर उभरा, जहां लोक संस्कृति की रंगत, आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक सरोकार एक साथ स्पंदित होते नजर आए। देवभूमि उत्तराखंड की लोक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति बने उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित चार दिवसीय इस महोत्सव में उन्होंने लोक कलाकारों, साहित्यकारों, कला-प्रेमियों और बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का सशक्त माध्यम हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक केवल उत्सव नहीं, बल्कि लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का व्यापक अभियान है। उन्होंने सेवा संकल्प फाउंडेशन और इसकी संस्थापक गीता धामी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था द्वारा राज्य की समृद्ध लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोक कलाएं, पारंपरिक वेशभूषा, हस्तशिल्प और कारीगरी हमारी पहचान हैं और इन्हें संरक्षित करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।मुख्यमंत्री ने जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़, छोपाटी जैसे लोकगीतों तथा छोलिया, पांडव और झोड़ा-छपेली जैसे लोकनृत्यों को उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा बताते हुए कहा कि इन्हें सहेजना और आगे बढ़ाना समय की मांग है। चार दिवसीय आयोजन में लगे स्टॉलों के माध्यम से पारंपरिक हस्तशिल्प, जैविक उत्पादों और उत्तराखंडी व्यंजनों के प्रदर्शन की भी उन्होंने सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा ‘एक जनपद, दो उत्पाद’ योजना और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि स्टेट मिलेट मिशन, फार्म मशीनरी बैंक, एप्पल मिशन, कीवी मिशन, नई पर्यटन नीति, नई फिल्म नीति, होम स्टे, वेड इन उत्तराखंड और सौर स्वरोजगार योजना जैसी पहलों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। किसानों की आय बढ़ाने में उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है तथा युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में भी राज्य अग्रणी बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में राज्य को ‘अचीवर्स’ और स्टार्टअप रैंकिंग में ‘लीडर्स’ श्रेणी प्राप्त हुई है। सिंगल विंडो सिस्टम को ‘टॉप अचीवर्स’ श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य सूचकांक 2023-24 में उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। खनन तत्परता सूचकांक में श्रेणी-सी में देश में दूसरा स्थान तथा लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस में अचीवर्स श्रेणी में स्थान प्राप्त हुआ है। पर्यटन क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को बेस्ट वाइल्डलाइफ और बेस्ट एडवेंचर डेस्टिनेशन के राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार 2024 में जाखोल, हर्षिल, गुंजी और सूपी गांवों को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया गया है। वर्ल्ड रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म अवार्ड में राज्य को ‘वन टू वॉच’ पुरस्कार मिला है। वर्ष 2024 में मत्स्य विकास के लिए उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ राज्य का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला तथा हैदराबाद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय विमानन सम्मेलन में ‘बेस्ट स्टेट फॉर प्रोमोशन ऑफ एविएशन इकोसिस्टम’ सम्मान प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक कलाकारों के संरक्षण के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। कोरोना काल में लगभग 3,200 सत्यापित कलाकारों को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी गई। 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध एवं अस्वस्थ लोक कलाकारों को पेंशन प्रदान की जा रही है तथा गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। लोक सांस्कृतिक लिपियों के प्रकाशन, आर्ट गैलरियों की स्थापना और साहित्यकारों को सम्मान एवं अनुदान प्रदान करने के लिए भी सरकार प्रतिबद्ध है।
गीता धामी ने कहा कि चार दिनों तक चले इस महोत्सव के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक उत्पादों और जीवनशैली को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल संस्था का नहीं बल्कि पूरे राज्य का उत्सव है। युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना और आधुनिकता के साथ संस्कृति का संरक्षण करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने स्थानीय उत्पादों की अधिक से अधिक खरीदारी कर राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में भगत सिंह कोश्यारी, सतपाल महाराज, प्रसून जोशी, कल्पना सैनी, खजान दास, दुर्गेश्वर लाल, अनिल नौटियाल, भोपाल राम टम्टा, सुरेश गढ़िया, सुरेश चौहान, अजेय कुमार, बिशना देवी, अपर्णा जोशी, दीपम सेठ, हेमराज बजरंगी, मधु भट्ट, गीता खन्ना, गीताराम गौड़, विश्वास डाबर, श्याम अग्रवाल, विनोद उनियाल, नेहा शर्मा, हरक सिंह, मुकेश कुमार, ज्योति गैरोला सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और नागरिक उपस्थित रहे।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने संकल्प और सेवा का दिया संदेश

देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना, लोक परंपराओं और सामाजिक समरसता का जीवंत उत्सव बने उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 में परेड ग्राउंड, देहरादून में राज्यपाल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल) ने प्रतिभाग किया। “संस्कृति से समृद्धि की ओर” थीम पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में राज्यपाल ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया और सेवा संकल्प फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की। राज्यपाल ने कहा कि सेवा संकल्प फाउंडेशन निरंतर संकल्प के साथ जनसेवा को आगे बढ़ा रहा है। संस्था का मूल भाव ही सेवा है और यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि जीवन में संकल्प ही व्यक्ति और समाज को दिशा देता है। यदि हम अपनी संस्कृति, परंपरा और धरोहर पर गर्व करने का संकल्प लें, तो समाज स्वतः सशक्त होगा। उन्होंने कहा कि गीता धामी विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में संस्था के माध्यम से उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं, जो सराहनीय पहल है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तरायणी पर्व भारतीय संस्कृति में नवचेतना, सकारात्मक ऊर्जा और सामूहिकता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ते हैं, स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करते हैं और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृति तभी जीवंत रहती है जब उसे सेवा, समर्पण और समाज के सहयोग से जोड़ा जाए। गीता धामी ने कहा कि परंपरागत रूप से उत्तरायणी पर्व राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में मनाया जाता रहा है, लेकिन देहरादून में इस महोत्सव ने नई ऊर्जा का संचार किया है। लोग पारंपरिक वेशभूषा में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं और यह आयोजन अब एक जीवंत सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि उत्तरायणी कौथिक केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी जीवंत परंपरा का प्रतीक बन गया है। उन्होंने बताया कि महोत्सव में उत्तराखंड के सभी जिलों से स्वयं सहायता समूह शामिल हुए हैं। महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को नया बाजार मिला है और प्रदर्शनी में प्रस्तुत सामग्री उनकी मेहनत और आत्मनिर्भरता का उदाहरण है। साथ ही प्रदेश के सुप्रसिद्ध लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां लोक संस्कृति को जीवंत बनाए हुए हैं। गीता धामी ने कहा कि ऐसे महोत्सव हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को सांस्कृतिक चेतना का संदेश देते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने और भारत के विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उत्तरायणी कौथिक में 10 विशिष्टजनों को किया गया सम्मानित

महोत्सव के दौरान राज्यपाल द्वारा समाज सेवा, शिक्षा, कृषि, लोकसंस्कृति एवं खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 10 विशिष्टजनों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में प्रेम प्रकाश बेलवाल (नैनीताल), कामिनी कश्यप, मनोरमा जोशी (अल्मोड़ा), भवान सिंह कोरंगा, प्रेमा रावत (बागेश्वर), कृष्णा (उत्तरकाशी), श्याम चन्द्र टम्टा (पौड़ी), कल सिंह राणा, ब्रिगेडियर दिनेश कुमार (देहरादून), मनोरमा जोशी (अल्मोड़ा) शामिल रहे। कार्यक्रम में गुरमीत कौर, सुबोध उनियाल, सौरभ थपलियाल, बीना भट्ट, गीता खन्ना, लेफ्टिनेंट जनरल नगेन्द्र सिंह, आरके जैन, पुनीत मित्तल, गीता रावत, कुसुम कंडवाल, विनोद उनियाल, विश्वास डाबर, श्याम अग्रवाल, शादाब शम्स, देवेंद्र भसीन, सुरेखा डंगवाल, एडवोकेट ललित जोशी, मुकेश कुमार, बलवीर उनियाल, गीताराम गौड़ सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक मौजूद रहे।

महोत्सव मन और आत्मा को जोड़ने वाला आध्यात्मिक उत्सव: स्वामी अवधेशानन्द गिरि

देवभूमि की वादियों में जब सूर्य उत्तरायण होता है, तो केवल ऋतु परिवर्तन नहीं, बल्कि चेतना का एक नया अध्याय भी प्रारंभ होता है। उत्तराखंड की पावन धरती पर पर्व और मेले केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन दर्शन का उत्सव हैं। यहां लोकगीतों में इतिहास सांस लेता है, वाद्य यंत्रों की थाप में परंपरा धड़कती है और सामूहिक आयोजन में आध्यात्मिक ऊर्जा प्रवाहित होती है। उत्तरायणी का पर्व इसी सनातन सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है, जो मनुष्य को अपनी जड़ों, अपनी मिट्टी और अपनी आत्मा से जोड़ता है। देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित चार दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव ने इसी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप दिया। पूरा परिसर लोकधुनों, पारंपरिक वेशभूषा और उत्साह से सराबोर दिखाई दिया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक महोत्सव केवल लोक संस्कृति का उत्सव नहीं, बल्कि मन और आत्मा को जोड़ने वाला अनुभव है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में स्नेह, सहयोग और आध्यात्मिक जागरूकता का संचार करते हैं। उत्तराखंड को संस्कृत की जननी बताते हुए उन्होंने कहा कि इस देवभूमि में हर साधु-संत ने तपस्या की है और भारत का प्रत्येक व्यक्ति इस राज्य का ऋणी है। उन्होंने आह्वान किया कि उत्तरायणी महोत्सव को देश के अन्य हिस्सों तक भी ले जाया जाए, ताकि उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति जन-जन तक पहुंचे। सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी श्रीमती गीता धामी ने कहा कि यह महोत्सव आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को सशक्त मंच प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति, किसान और स्वयं सहायता समूहों को अपने पारंपरिक उत्पादों और व्यंजनों को प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत नशे के विरुद्ध जागरूकता पर आधारित नुक्कड़ नाटक का आयोजन भी किया गया, जिसके माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास किया गया। प्रदेश अध्यक्ष भाजपा एवं राज्यसभा सांसद महेन्द्र भट्ट ने कहा कि यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने इसे युवाओं को सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने और रचनात्मकता को बढ़ावा देने वाला मंच बताया।

लोकधुनों की गूंज में झूमा परेड ग्राउंड

सांस्कृतिक संध्या में पद्मश्री जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण के जागर गीतों ने समां बांध दिया। लोकगायक फौजी ललित मोहन, सौरभ मैठाणी, बी.के. सामंत और राजेंद्र प्रसाद सहित अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। “मै पहाड़ो कु रैबासी” और “तू ऐजा ओ पहाड़” जैसे गीतों पर लोग देर तक थिरकते रहे। श्वेता माहरा की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण जोड़ा। पूरा मैदान तालियों और लोकधुनों की गूंज से जीवंत हो उठा।

प्रतिभाओं का सम्मान और जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति

महोत्सव के अंतर्गत चित्रकला, भजन और पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। चित्रकला प्रतियोगिता में अंशिक चौहान ने प्रथम, कविशमा राय ने द्वितीय और अवनी सारियल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। व्यंजन प्रतियोगिता में अंकिता महर प्रथम, गुरुविंदर कौर द्वितीय और जमुना रावत तृतीय स्थान पर रहीं। इसके अतिरिक्त सुलोचना नेगी, देवकला, भूपाल सिंह नेगी, शैली बंसल और निधि थापा को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पद्मश्री जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण, विधायक सविता कपूर, दायित्वधारी राज्य मंत्री हेमराज बजरंगी, मधु भट्ट, डॉ. गीता खन्ना, गीताराम गौड़, स्वराज विद्वान, नेहा जोशी, विनोद उनियाल, निर्मला जोशी, मुन्नी भट्ट, आरुषि निशंक, प्रदेश अध्यक्ष महिला मोर्चा रुचि भट्ट, ललित जोशी, नेहा शर्मा, बलदेव भट्ट सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। चार दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव ने यह संदेश दिया कि लोक संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली शक्ति है, जो मन को आनंद, आत्मा को शांति और समाज को एकता का सूत्र प्रदान करती है।

निशंक ने सराहा सेवा संकल्प का कार्य, गीता धामी ने दिया ‘लोकल से आत्मनिर्भर’ का मंत्र

परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित चार दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 के दूसरे दिन यही दृश्य साकार हुआ। लोकगीतों की मधुर गूंज, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप, हस्तशिल्प से सजे स्टॉल और आत्मनिर्भरता का संदेश, इन सबने मिलकर इस आयोजन को लोक संस्कृति का महाकुंभ बना दिया। दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सेवा संकल्प फाउंडेशन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था समाज के कमजोर वर्गों के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में फाउंडेशन के योगदान को उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और युवाओं को भी सामाजिक सरोकारों से जुड़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सेवा संकल्प फाउंडेशन स्थानीय उत्पादों को नया बाजार उपलब्ध करा रहा है और उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी श्रीमती गीता धामी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तरायणी कौथिक महोत्सव देवभूमि की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक आस्थाओं और लोकगीतों का उत्सव है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति अपने आप में विशिष्ट है और हमारे गीत-संगीत में हमारी आत्मा बसती है। बेड़ा गीत, मांगल गीत, चौती गीत जैसे पारंपरिक गीत ढोल, दमाऊ, ढोलकी, भंकोरा और रणसिंहा जैसे वाद्य यंत्रों की धुनों पर आज भी जीवंत हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ी व्यंजन, मडुए की रोटी, झंगोरे की खीर, भट्ट की चुड़कानी और गहत की दाल, सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और प्रकृति-अनुकूल जीवनशैली का संदेश भी हैं। महोत्सव में 172 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें 100 से अधिक निःशुल्क उपलब्ध कराए गए। विभिन्न जिलों से आए काश्तकारों, शिल्पकारों और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का मंच दिया गया है। उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प, बुनाई और रिंगाल उत्पादों के संरक्षण में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और ये उत्पाद अब राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहे हैं। श्रीमती धामी ने सभी से स्थानीय उत्पादों के अधिक उपयोग का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में सहभागी बनने की अपील की।

ऐपण प्रतियोगिता बनी आकर्षण का केंद्र

लोक कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित ऐपण प्रतियोगिता ने विशेष आकर्षण बटोरा। प्रतिभागियों ने लकड़ी के तख्तों पर लाल पृष्ठभूमि में सफेद रंग से पारंपरिक ऐपण कला का सुंदर प्रदर्शन किया। बालिकाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस प्रतियोगिता को और भी विशेष बना दिया। नई पीढ़ी तक पारंपरिक कला पहुंचाने का यह प्रयास सराहनीय रहा। वहीं महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों पर भी जोर दिया गया। विद्यार्थियों ने नशा मुक्ति के समर्थन में जागरूकता रैली निकाली और समाज को नशामुक्त बनाने का संदेश दिया। रैली के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जन-जन को जागरूक किया गया।

गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी की प्रस्तुति ने बांधा समां

स्टार नाइट में उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने अपने लोकगीतों से दर्शकों का दिल जीत लिया। उनके साथ पद्मश्री बसंती बिष्ट, गोविंद, खुशी जोशी और ललित गित्यार की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। लोकधुनों पर झूमते दर्शकों ने देवभूमि की सांस्कृतिक आत्मा को सजीव होते देखा। महोत्सव के दूसरे दिन मां बाराही सांस्कृतिक दल, बुरांस कला केन्द्र के गोर्खाली ग्रुप, ब्रह्मकमल सांस्कृतिक दल गढ़वाल, नवोदय पर्वतीय कला केन्द्र दल तथा एस.जी.आर.आर स्कूल के बच्चों द्वारा वंदना सहित विभिन्न प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, विनय रुहेला, लीलावती राणा, गीताराम गौड़, रश्मि बर्द्धन, विदुषी, नेहा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव का दूसरा दिन यह संदेश देकर गया कि लोक संस्कृति केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की शक्ति और भविष्य की प्रेरणा है, जो समाज को जोड़ती है, आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाती है और देवभूमि की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाती है।

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