नई दिल्ली में महिला सम्मान और संवेदनशील संवाद की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली, जब दिल्ली प्रदेश महिला कांग्रेस की नेत्रियों ने विरोध के पारंपरिक तरीकों से अलग हटकर गुलाब के फूल के माध्यम से अपना संदेश देने का प्रयास किया। दिल्ली प्रदेश महिला कांग्रेस ने अलका लांबा के निर्देशानुसार शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया। इस अवसर पर संगठन की राष्ट्रीय महासचिव शिल्पी अरोड़ा तथा दिल्ली प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष पुष्पा सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। प्रदर्शन का उद्देश्य स्पष्ट था समाज और सत्ता के शीर्ष पदों पर बैठे प्रतिनिधियों तक यह संदेश पहुँचाना कि “महिलाएं बुरी नहीं हैं, उन्हें समझने और सम्मान देने की आवश्यकता है।”
प्रदर्शन के दौरान नेत्रियों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निवास पर जाकर उन्हें एक गुलाब भेंट करने का प्रयास किया। यह गुलाब केवल एक फूल नहीं, बल्कि संवाद, संवेदना और सकारात्मक पहल का प्रतीक था। हालांकि सुरक्षा कारणों से लगाए गए बैरिकेड्स के चलते वे उनके आवास तक नहीं पहुँच सकीं। इसके बाद नेत्रियों ने पुलिस कर्मियों को वह गुलाब सौंपते हुए अनुरोध किया कि उनका संदेश संबंधित व्यक्ति तक पहुँचा दिया जाए। इस शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक कदम ने यह स्पष्ट किया कि विरोध भी मर्यादा और शालीनता के साथ दर्ज कराया जा सकता है। यह प्रदर्शन केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि महिलाओं के सम्मान, उनकी छवि और उनके प्रति समाज के दृष्टिकोण को लेकर एक संवेदनशील अपील भी थी। गुलाब के माध्यम से दिया गया यह संदेश इस बात की ओर इशारा करता है कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद और गरिमा का रास्ता कभी बंद नहीं होना चाहिए।
इस पहल ने यह भी साबित किया कि लोकतंत्र में विरोध का स्वर यदि संयमित और सकारात्मक हो, तो वह अधिक प्रभावशाली बन जाता है।






