बजट सत्र में धामी सरकार के बड़े फैसले

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उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में धामी सरकार ने कई अहम फैसले लिए और वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट सदन से पारित कराया। गैरसैंण के भराड़ीसैंण में आयोजित इस सत्र के दौरान 4 अध्यादेश और 12 महत्वपूर्ण विधेयकों को भी मंजूरी दी गई। हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच चले इस सत्र में विकास, वित्तीय अनुशासन और नई नीतियों को लेकर सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। विभिन्न विभागों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी सदन में विस्तृत चर्चा हुई। यह बजट सत्र 9 मार्च से शुरू हुआ और शुक्रवार देर रात बजट पारित होने के बाद इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार

साल 2027 में होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार ने अपना आखिरी पूर्ण आम बजट पेश करते हुए विकास की बड़ी रूपरेखा सामने रखी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए 1,11,703.21 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जो पिछले साल की तुलना में करीब 10.41 प्रतिशत अधिक है। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में पेश किए गए इस बजट को सरकार ने राज्य के समावेशी और तेज विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया। बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार “समावेशी विकास, आत्मनिर्भर नई सोच, तीव्र विकास, उन्नत गांव और शहर, लोक सहभागिता, आर्थिक शक्ति और न्यायपूर्ण व्यवस्था” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के लिए “केदार परिवेश” और “मानस परिवेश” की अवधारणा के जरिए विकास का नया मॉडल तैयार किया गया है। यह भी पहली बार हुआ जब मुख्यमंत्री धामी ने स्वयं वित्त मंत्री के रूप में सदन में अपनी सरकार का बजट पेश किया। इसके साथ ही पहली बार राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद बजट प्रस्तुत किया गया, जिससे यह सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक बन गया। सत्र की शुरुआत उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह के अभिभाषण से हुई। हालांकि सत्र की शुरुआत से ही सदन का माहौल हंगामेदार रहा। विपक्षी विधायकों ने सरकार के खिलाफ तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया और राज्य में भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था और आबकारी नीति जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। विरोध के बीच विपक्ष ने सदन से वॉकआउट भी किया। इसके बावजूद सरकार ने बजट को सदन में ध्वनिमत से पारित करा लिया। बजट सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी पूरे किए गए। सदन में 4 अध्यादेशों को मंजूरी दी गई, जिनमें उत्तराखंड दुकान और स्थापना (रोजगार विनिमय और सेवा शर्त) संशोधन अध्यादेश 2025, उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश 2025, उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश 2025 और उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2026 शामिल हैं। इसके अलावा 12 महत्वपूर्ण विधेयकों को भी सदन से पारित किया गया। इनमें उत्तराखंड दुकान और स्थापना (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तराखंड जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तराखंड माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2026, समान नागरिक संहिता (संशोधन) विधेयक 2026, कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं संशोधन विधेयक, अल्पसंख्यक आयोग संशोधन विधेयक, भाषा संस्थान संशोधन विधेयक, देवभूमि परिवार विधेयक और सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक समेत कई अहम कानून शामिल हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी के अनुसार बजट सत्र के दौरान कुल 41 घंटे 10 मिनट तक सदन की कार्यवाही चली। इस दौरान पांच सरकारी संकल्प भी सदन में लाए गए और कई जनहित के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। विभिन्न दलों के विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों और बुनियादी समस्याओं को सदन में प्रमुखता से उठाया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन में राज्य के वित्तीय प्रबंधन की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और गुड गवर्नेंस के कारण उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने बताया कि नीति आयोग की फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026 रिपोर्ट में भी राज्य के वित्तीय प्रबंधन को सराहा गया है और हिमालयी राज्यों की श्रेणी में उत्तराखंड को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में आयोजित यह बजट सत्र 9 मार्च से शुरू हुआ और शुक्रवार देर रात करीब 12:30 बजे तक चला। इस दौरान धामी सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पारित कराया, जिसके बाद विधानसभा सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
वित्तीय वर्ष 2026–27 का यह बजट आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार की विकास योजनाओं और प्राथमिकताओं की झलक भी माना जा रहा है। बजट में कई प्रमुख पूंजीगत योजनाओं का भी प्रावधान किया गया है, जिन्हें आने वाले वर्षों में राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विधानसभा में सीएम धामी ने गिनाईं सरकार की बड़ी उपलब्धियां-

उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में भाग लेते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियों, नीतियों और आने वाली योजनाओं का विस्तृत उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आज दृढ़ संकल्प के साथ विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है और पिछले चार वर्षों में सरकार ने देवभूमि की पहचान और गरिमा को बनाए रखने के लिए कई कठोर लेकिन आवश्यक निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के गठन का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को जाता है, जिन्होंने इस राज्य की नींव रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य की दोहरी इंजन वाली सरकार ने प्रदेश के विकास को नई दिशा और गति देने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यह वर्तमान विधानसभा का अंतिम पूर्णकालिक बजट है और आने वाले वर्षों में राज्य के विकास की दिशा तय करने वाला दस्तावेज भी है। इस बार बजट का आकार 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दस प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आय और व्यय का लेखा-जोखा नहीं बल्कि राज्य के सवा करोड़ लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि बजट में दिए गए आंकड़ों से विपक्ष को परेशानी हो सकती है, क्योंकि यह शायद उनके पाठ्यक्रम में नहीं है। उन्होंने कहा कि बजट में मातृशक्ति के सम्मान, युवाओं के उत्थान, किसानों के कल्याण, विज्ञान और नवाचार के विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा पर्यटन के विस्तार को ध्यान में रखते हुए संतुलित विकास का मार्ग तय किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले चार वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश की सकल राज्य घरेलू उत्पाद में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और प्रति व्यक्ति आय में लगभग 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही राज्य का बजट आकार भी करीब 60 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। निवेश, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने 30 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। इन नीतियों के परिणामस्वरूप प्रदेश में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं। वहीं नवाचार आधारित उद्यमों की संख्या 700 से बढ़कर लगभग 1750 हो गई है। पर्यटन, होटल और होमस्टे क्षेत्र में भी तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार ने प्रदेश में सख्त नकलरोधी कानून लागू कर नकल माफिया पर कड़ा प्रहार किया है। इस कानून के लागू होने के बाद भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है और अब तक लगभग 30 हजार युवाओं को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों में भारतीय प्रशासनिक सेवा और प्रांतीय सिविल सेवा के अधिकारियों सहित 200 से अधिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने कई ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय भी लिए हैं। उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन चुका है। इस कानून से महिलाओं को समान अधिकार मिले हैं और समाज में समानता तथा न्याय की भावना मजबूत हुई है। साथ ही राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए सख्त भू-कानून और धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे कदम भी उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से प्रदेश में लगभग दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न विकास परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, चारधाम सर्वकालिक सड़क परियोजना और कई रोपवे परियोजनाएं राज्य के विकास को नई गति देंगी और संपर्क व्यवस्था को मजबूत बनाएंगी। किसानों के हितों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। किसानों को तीन लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि कृषि उपकरणों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए भी अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं और प्रदेश की लगभग 1 लाख 70 हजार महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। वहीं युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार लगातार नई पहल कर रही है।

बजट सत्र के दौरान सदन में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस का धामी सरकार पर हमला-

उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भ्रष्टाचार का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। सदन में नियम 58 के तहत हुई चर्चा में कांग्रेस विधायकों ने धामी सरकार को घेरते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़ें लगातार मजबूत होती जा रही हैं और सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा पूरी तरह विफल साबित हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के संरक्षण में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। आर्य ने कहा कि भर्ती घोटाले, योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितताएं और कई अन्य मामलों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना था कि प्रदेश के विकास प्राधिकरणों में बिना रिश्वत दिए भवनों के नक्शे पास नहीं होते, जबकि अवैध खनन और खनन डंपरों से पुलिस द्वारा वसूली की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विभिन्न योजनाओं में पारदर्शिता की कमी साफ दिखाई देती है। उन्होंने दावा किया कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में भी अनियमितताओं का उल्लेख नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में किया गया है। इसके अलावा देहरादून के परेड ग्राउंड के पुनर्विकास कार्यों में भी गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। चर्चा के दौरान उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने सरकारी नौकरियों में साक्षात्कार की प्रक्रिया समाप्त कर पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम उठाया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने होम्योपैथिक चिकित्सकों की भर्ती में नियम बदलकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का उदाहरण पेश किया है।
कापड़ी ने शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दिल्ली में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की किताब लगभग 60 रुपये में मिलती है, जबकि उत्तराखंड में वही किताब करीब 100 रुपये में बेची जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती घोटालों ने प्रदेश में रोजगार के नाम पर सौदेबाजी की तस्वीर को उजागर कर दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 67 हजार से अधिक सरकारी बसें बिना फिटनेस के चल रही हैं। यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है और इससे यह सवाल खड़ा होता है कि फिटनेस प्रमाणन की प्रक्रिया में आखिर क्या गड़बड़ी हो रही है। वहीं बजट सत्र के दौरान विधानसभा परिसर में भी कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायक रसोई गैस की आपूर्ति में कमी को लेकर विरोध जताते हुए विधानसभा की सीढ़ियों पर बैठ गए और धरना दिया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से इस समस्या का तत्काल समाधान करने और व्यवस्था को सुचारु बनाने की मांग की।

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