मध्य-पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध तनाव का असर भारत की रसोई तक पहुंच गया है। गैस सप्लाई प्रभावित होने से देश के कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और लोगों को सिलेंडर के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। बढ़ते संकट को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। संसद भवन, नई दिल्ली में कांग्रेस सांसदों ने गैस संकट को लेकर प्रदर्शन किया, जबकि गैरसैंण में चल रहे उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भी कांग्रेस विधायकों ने विरोध दर्ज कराया। देश के कई हिस्सों में गैस की कमी से आम लोगों की रसोई पर सीधा असर पड़ रहा है। दिव्य हिमगिरि रिपोर्ट।
मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब भारत के आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी टकराव के कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस की सप्लाई चेन प्रभावित हो गई है। खास तौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। इसी का असर भारत में भी दिखाई देने लगा है, जहां कई राज्यों में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण लोग परेशान हैं और गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं।
देश के कई हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहां लोग सुबह से गैस एजेंसियों के बाहर लाइन लगाकर सिलेंडर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कई जगहों पर गैस एजेंसियों के फोन नहीं लग रहे हैं और ऑनलाइन बुकिंग में भी दिक्कतें सामने आ रही हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों को घरेलू कामकाज चलाने के लिए वैकल्पिक साधनों की तलाश करनी पड़ रही है। उत्तराखंड में भी गैस संकट का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राज्य के कई शहरों और कस्बों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह संकट और भी गंभीर बनता जा रहा है, क्योंकि वहां पहले से ही सप्लाई सीमित रहती है। इस मुद्दे को लेकर उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गैरसैंण में विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विधायकों ने गैस सिलेंडर की किल्लत को लेकर विधानसभा के बाहर और सदन के भीतर विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस का आरोप है कि गैस संकट के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और सरकार को इस पर तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए। उधर राष्ट्रीय स्तर पर भी यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। संसद भवन, नई दिल्ली में कांग्रेस सांसदों ने गैस संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भारत पर पड़ना स्वाभाविक है, लेकिन सरकार को पहले से तैयारी करनी चाहिए थी ताकि आम लोगों को इतनी परेशानी न झेलनी पड़े। गैस संकट के बीच देश के कई हिस्सों में कालाबाजारी और जमाखोरी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। कई शहरों में जहां कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत करीब दो हजार रुपये होती है, वहां इसे चार हजार रुपये तक में बेचे जाने की खबरें सामने आई हैं। प्रशासन ने ऐसे मामलों पर निगरानी बढ़ा दी है, लेकिन संकट के कारण बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार इस संकट की सबसे बड़ी वजह हॉर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना है। यह लगभग 167 किलोमीटर लंबा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर रहते हैं। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से पूरा करता है। अनुमान के अनुसार भारत करीब 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 50 प्रतिशत से अधिक एलएनजी इसी रास्ते से आयात करता है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। इसी कारण देश में एलपीजी की मांग अचानक बढ़ गई है। सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन लगभग 50 से 55 लाख गैस बुकिंग होती थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 75 से 76 लाख तक पहुंच गई है। इस स्थिति को ऊर्जा क्षेत्र के जानकार “पैनिक बुकिंग” का परिणाम भी मान रहे हैं, जिसमें लोग भविष्य की आशंका के कारण जरूरत से पहले ही सिलेंडर बुक कर रहे हैं।
गैस संकट के बीच केंद्र सरकार अलर्ट, कई बड़े कदम उठाए
गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने स्थिति पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग एवं ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने कहा कि एलपीजी की उपलब्धता फिलहाल चिंता का विषय जरूर है, क्योंकि भारत का बड़ा हिस्सा आयात हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है, जो फिलहाल प्रभावित है। उन्होंने यह भी कहा कि संकट को नियंत्रित करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है और घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने सबसे पहले तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जो देश में गैस की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की लगातार समीक्षा कर रही है। इस समिति में तीन प्रमुख तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशक शामिल हैं और इन्हें स्थिति पर निगरानी रखने तथा आवश्यक निर्णय लेने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत प्रशासन को अधिकार दिया गया है कि वह जमाखोरी या अवैध बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर सके। घरेलू एलपीजी बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां सिलेंडर डिलीवरी के कुछ ही दिनों बाद नया सिलेंडर बुक किया जा सकता था, वहीं अब उपभोक्ताओं को अगली बुकिंग के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि बढ़ाकर 45 दिन तक कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे अनावश्यक बुकिंग और जमाखोरी पर रोक लगेगी। इसके साथ ही गैस सिलेंडर की डिलीवरी के समय ओटीपी या बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सिलेंडर सही उपभोक्ता तक ही पहुंचे। इससे फर्जी बुकिंग और अवैध बिक्री को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार ने देश की सभी ऑयल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं। इन निर्देशों के बाद उत्पादन में करीब 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार का दावा है कि इससे आने वाले दिनों में स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है। गैस संकट का असर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। कई शहरों में लोग एलपीजी के विकल्प के तौर पर इंडक्शन कुकटॉप और इलेक्ट्रिक चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं। इसके कारण ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर इन उत्पादों की मांग अचानक बढ़ गई है। कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन कुकटॉप के कई मॉडल आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं। मध्य-पूर्व में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। इसका असर केवल गैस सिलेंडर ही नहीं, बल्कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों और अन्य ऊर्जा स्रोतों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल देशभर में आम लोग इस संकट से जूझ रहे हैं और सरकार की कोशिश है कि सप्लाई व्यवस्था को जल्द सामान्य किया जाए। उत्तराखंड सहित कई राज्यों में प्रशासन ने गैस एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाएं और लोगों को अनावश्यक परेशानी न होने दें। हालांकि अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में कुछ समय लग सकता है। तब तक सरकार और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि देश के हर घर की रसोई तक गैस की आपूर्ति सुचारु रूप से बनी रहे।
गैस संकट पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा–घबराने की जरूरत नहीं, आपूर्ति सुचारु रखने के निर्देश
उत्तराखंड में रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत की खबरों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण गैस सप्लाई पर कुछ दबाव जरूर पड़ा है, लेकिन राज्य सरकार केंद्र सरकार और तेल कंपनियों के साथ लगातार समन्वय बनाकर आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी जिलों में गैस की उपलब्धता की नियमित निगरानी की जाए और जहां कहीं भी आपूर्ति में बाधा की स्थिति बन रही हो, वहां तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विशेष रूप से पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों पर ध्यान देने को कहा है, ताकि वहां रहने वाले लोगों को गैस सिलेंडर की कमी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। यदि कहीं भी अधिक कीमत पर सिलेंडर बेचने या अवैध भंडारण की शिकायत मिलती है तो संबंधित लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक घबराहट में गैस सिलेंडर की अतिरिक्त बुकिंग न करें। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि प्रदेश के हर घर की रसोई सुचारु रूप से चलती रहे।






