देहरादून में 17 अवैध होमस्टे पर बड़ी कार्रवाई

0
3

राजधानी देहरादून में प्रशासन ने अवैध रूप से संचालित हो रहे होमस्टे के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए 17 इकाइयों पर सख्त कार्रवाई की है। ‘ऑपरेशन सफाई’ के तहत जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर इन होमस्टे का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया और उन्हें पर्यटन विभाग की सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच में सामने आया कि कई होमस्टे नियमों की अनदेखी करते हुए होटल और पार्टी स्पॉट की तरह संचालित हो रहे थे, जहां देर रात तक डीजे, अवैध बार और हुड़दंग जैसी गतिविधियां चल रही थीं। इससे स्थानीय लोगों की शांति भंग होने के साथ ही कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा था। प्रशासन की यह कार्रवाई न केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है, बल्कि इससे यह भी साफ संदेश गया है कि पर्यटन के नाम पर नियमों से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिव्या हिमगिरी रिपोर्ट।

देहरादून में जिला प्रशासन द्वारा चलाया गया ‘ऑपरेशन सफाई’ महज एक औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और बहुस्तरीय अभियान था, जिसने होमस्टे व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया। पिछले कुछ महीनों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि शहर के कई इलाकों में होमस्टे के नाम पर होटल जैसे व्यवसाय चलाए जा रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जांच शुरू की और महज सात दिनों के भीतर मजिस्ट्रेट स्तर की पांच टीमों का गठन कर विभिन्न क्षेत्रों में छापेमारी कराई गई। जांच में सामने आया कि कई होमस्टे संचालक सरकार द्वारा निर्धारित मूल नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर चुके थे। जहां होमस्टे का उद्देश्य सीमित कमरों के साथ पारिवारिक माहौल में पर्यटकों को ठहराना होता है, वहीं इन स्थानों पर बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। देर रात तक तेज आवाज में संगीत, डीजे पार्टियां और अवैध बार संचालन जैसी गतिविधियां आम हो गई थीं। इससे न केवल आसपास के लोगों को परेशानी हो रही थी, बल्कि कई जगहों पर कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ती दिखी। प्रशासन के मुताबिक, कुछ स्थानों पर नशे में धुत लोगों द्वारा हुड़दंग, ओवरस्पीड ड्राइविंग और यहां तक कि फायरिंग जैसी घटनाएं भी सामने आईं। ऐसे मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी, क्योंकि यह सीधे तौर पर शहर की सुरक्षा से जुड़ा विषय बन चुका था। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि कई होमस्टे में सुरक्षा मानकों का घोर अभाव था। अग्निशमन उपकरण या तो मौजूद नहीं थे या उनकी समय-सीमा समाप्त हो चुकी थी।
खाद्य सुरक्षा के नियमों का भी बड़े पैमाने पर उल्लंघन सामने आया। कई होमस्टे बिना फूड लाइसेंस के भोजन परोस रहे थे, जबकि कुछ जगहों पर तो रसोई तक उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा, विदेशी पर्यटकों के ठहरने की स्थिति में अनिवार्य सी-फॉर्म की जानकारी भी कई संचालकों द्वारा नहीं दी जा रही थी, जो सुरक्षा के लिहाज से गंभीर लापरवाही मानी जाती है। एक और चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि कई होमस्टे मालिक स्वयं वहां निवास नहीं कर रहे थे। उन्होंने अपनी संपत्तियों को किराए या लीज पर देकर उसे पूरी तरह व्यावसायिक रूप में बदल दिया था। कुछ स्थानों पर इनका उपयोग बारात घर और पार्टी वेन्यू के रूप में किया जा रहा था, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। यह कार्रवाई सहसपुर, रायपुर और मसूरी से जुड़े शहरी क्षेत्रों तक फैली हुई थी, जहां हर जगह कमोबेश एक जैसी अनियमितताएं देखने को मिलीं। प्रशासन ने इन सभी मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए 17 होमस्टे का पंजीकरण निरस्त कर दिया और आगे भी निगरानी जारी रखने की बात कही है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि होमस्टे योजना का उद्देश्य स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना और क्षेत्रीय संस्कृति को बढ़ावा देना है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई इस योजना का दुरुपयोग कर अवैध होटल व्यवसाय चलाने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंड में होमस्टे योजना पर्यटन को नई दिशा देने के लिए शुरू की गई

दरअसल, उत्तराखंड में होमस्टे योजना पर्यटन को नई दिशा देने के लिए शुरू की गई थी। इसका मकसद यह था कि ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोग अपने घरों का एक हिस्सा पर्यटकों के लिए खोलकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का भी प्रचार-प्रसार होता है। सरकार ने इस योजना के तहत स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं। इनमें यह अनिवार्य है कि होमस्टे संचालक स्वयं उसी घर में निवास करे। इसके अलावा, कमरों की संख्या सीमित रखी जाए और बुनियादी सुविधाओं जैसे स्वच्छता, पेयजल और सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। भोजन सेवा के लिए वैध लाइसेंस होना जरूरी है और विदेशी पर्यटकों की जानकारी संबंधित विभाग को देना अनिवार्य है। हालांकि, हाल के वर्षों में कुछ लोगों ने इस योजना का गलत फायदा उठाते हुए इसे पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधि में बदल दिया था। यही कारण है कि अब प्रशासन को सख्ती बरतनी पड़ रही है। यदि इस तरह की अनियमितताओं पर समय रहते रोक नहीं लगाई जाती, तो यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटक सकती है। वहीं प्रशासन का कहना है कि आगे भी इस तरह के अभियान लगातार जारी रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
देहरादून में हुई यह कार्रवाई एक चेतावनी है कि पर्यटन के नाम पर नियमों की अनदेखी अब नहीं चलेगी। साथ ही यह भी संकेत है कि सरकार और प्रशासन दोनों मिलकर इस योजना को सही दिशा में बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

Previous articleशिक्षा, ऊर्जा और संवेदनशीलता से बनती है डॉ. गीतांजलि राघव की कहानी
Next articleदून में बार बंदी को लेकर पुलिस अफसरों की टकराहट

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here