सरू: एक अधूरी जिद की मुकम्मल त्रासदी
सरू, तू डूबी नहीं… तू तो पहाड़ की मिट्टी और पानी की रूह बन गई
पहाड़ की वादियों में जब चैत की हवाएं चलती हैं, तो वे अपने साथ केवल बुरांश की खुशबू नहीं, बल्कि...
सांसद डा. नरेश बंसल ने राज्यसभा मे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मिशन...
डा. नरेश बंसल ने कहा किः- क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे किः-क- बच्चों की देखभाल को संस्थागत रूप देने के विकल्प के रूप में परिवार आधारित गैर संस्थागत...
राजनीतिक जंग के आगाज में लोकतांत्रिक मूल्य फिर दांव पर
भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि वे लोकतंत्र की परिपक्वता, जनविश्वास और राजनीतिक संस्कृति की परीक्षा भी होते हैं। जब किसी राज्य या क्षेत्र में...
पैक्स सिलिका में भारत का होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि
इक्कीसवीं सदी का यह दौर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और तकनीकी आपूर्ति शृंकखलाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धा का दौर बन चुका है। ऐसे समय में भारत द्वारा एआई शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन और उसके तुरंत...
मुफ्त रेवड़ी संस्कृति जीवंत लोकतंत्र के लिये घातक
भारतीय लोकतंत्र की विडंबना यह है कि चुनाव आते ही जनसेवा का स्वरूप बदलकर जनलुभावन राजनीति में परिवर्तित हो जाता है। राजनीतिक दलों ने मुफ्त की योजनाओं को चुनावी सफलता का शॉर्टकट बना लिया...




