उनके निधन के बाद आई पहली जयंती पर, डॉ. गिरिजा व्यास जी को नमन। दो स्वतंत्रता सेनानियों की बेटी होने के नाते, उनमें भी वही मूल्य समाहित थे। वे अत्यंत दयालु थीं, वंचितों की परवाह करती थीं, और हम सभी के लिए एक बेहतरीन व स्नेहिल शिक्षिका थीं। ऐसा बिरला ही कोई मिलता है जो इतने अलग-अलग क्षेत्रों में इतना कुशल हो। यूएसए के एक विश्वविद्यालय में “धर्म” विषय पढ़ाते समय (जिसके लिए उन्हें उस समय के सभी प्रमुख धर्मों का गहन अध्ययन करना पड़ा था), श्रीमती इंदिरा गांधी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें भारत ले आईं। राजस्थान कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष से लेकर, उन्होंने विभिन्न पदों पर कार्य किया; और हर पद पर रहते हुए उन्होंने कई महान व लाभकारी कार्यक्रमों की शुरुआत की। वे महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष, तीन बार कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस विचार विभाग की राष्ट्रीय अध्यक्षा रहीं। अपने प्रत्येक मंत्रालय के माध्यम से उन्होंने कई अत्यंत आवश्यक और प्रासंगिक संशोधन लागू करवाए; और उन कार्यक्रमों का लाभ आज की सरकार भी, बदले हुए नामों के साथ, उठा रही है। ऐसा इसलिए संभव हो पाया क्योंकि वे बुनियादी मुद्दों को तुरंत पहचान लेती थीं, समस्याओं की जड़ तक पहुँच जाती थीं, और उनके प्रभावी समाधान खोज निकालती थीं। वे “कांग्रेस संदेश” की संपादिका भी थीं।

एक अत्यंत बहुमुखी प्रतिभा की धनी व्यक्तित्व, वे “विश्व दार्शनिक सम्मेलन” की अंतर्राष्ट्रीय महासचिव और “सार्क महिला सांसदों के सम्मेलन” की प्रथम अध्यक्षा थीं।एक अत्यंत सुप्रसिद्ध और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कवयित्री के रूप में, उन्होंने उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में रचनाएँ कीं; साथ ही अरबी भाषा में भी कुछ शेर (दोहे) लिखे। उनकी कविताओं के कई संग्रह (दीवान) प्रकाशित हो चुके हैं। वे एक अत्यंत मानवीय, बेहद ईमानदार, पूर्णतः समर्पित और सच्ची देशभक्त थीं। मैं स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली मानती हूँ कि मुझे उनसे विभिन्न क्षेत्रों में इतना कुछ सीखने का अवसर मिला। हम उनकी कमी को बहुत शिद्दत से महसूस करते हैं। गिरिजा व्यास 79 वर्ष तक जीवित रही। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजस्थान कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं डॉ गिरिजा व्यास के निधन से राजस्थान समेत देशभर में शोक की लहर छा गई थी। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी उनकी राष्ट्रसेवा को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी थी। दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने कहा था कि उनका असमय जाना हम सभी के लिए एक बड़ा आघात है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता गिरिजा व्यास ने राज्य और केंद्र दोनों सरकारों में मंत्री के रूप में काम किया है। वह राजस्थान कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष व राष्ट्रीय महिला आयोग की भी अध्यक्ष रह चुकी हैं। गिरिजा व्यास ने कांग्रेस पार्टी में कई वरिष्ठ पदों पर काम किया। वहसन 1991 में उदयपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंची और नरसिम्हा राव सरकार में मंत्री रहीं। उन्होंने दर्शनशास्त्र में डॉक्टरेट किया और मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय एवं यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर में अध्यापन कार्य किया। वे लेखिका भी रही और कवयित्री के रूप में भी नाम कमाया। उनकी आठ पुस्तकें प्रकाशित हुई, जिनमें ‘एहसास के पार’, ‘सीप, समुन्दर और मोती’ व ‘नॉस्टैल्जिया’ आदि शामिल है।वे सन 1985 में राजस्थान विधान सभा से पहली बार विधायक बनीं थी व सन 1990 तक पर्यटन मंत्री रहीं।वही वे सन 1991 से 99 तक उदयपुर से तीन बार लोकसभा सांसद व सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री रही। उन्हें राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन होने का सौभाग्य भी मिला, उसके बाद वे जून सन 2013से मई 2014 तक केन्द्रीय कैबिनेट में शहरी आवास मंत्री रही। वे शालीन व्यक्तित्व की निर्विवाद मल्लिका थी।उनके स्मृति दिवस पर उन्हें नमन।






