माइंड हील क्लीनिक में आने वाले मनोरोगियों का ईलाज करके उन्हें मुख्यधारा में वापिस लाने का सफलतापूर्वक कार्य करने वाली डॉ. दिव्या घई से उनके प्रोफेशनल सफर के बारे में लोकेश राज अस्थाना से हुई बातचीत के अंश-
अपनी पारिवारिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में बताएं
मेरा जन्म हरियाणा के यमुनानगर जिले के सढौरा गांव के एक शिक्षित परिवार में हुआ है। मैने अपनी 10वीं तक की पढ़ाई सदौरा में रहकर ही पूरी की। उसके बाद उच्च शिक्षा के लिए मैं चंढ़ीगढ़ आ गई और यही पर मैंने अपनी मेडिकल की कोचिंग भी पूर्ण की। मेडिकल परीक्षा उत्तीर्ण करने पर मुझे मेरी रैंक के अनुसार पटियाला में गर्वमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) में दाखिला मिला और मैंने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूर्ण की। एमडी साइकेट्रिक डीएमसी कॉलेज लुधियाना से पूर्ण की।
चिकित्सा क्षेत्र में आने के प्रेरणास्रोत कौन रहे है?
चिकित्सा के क्षेत्र में आने का तो मैने बचपन से ही तय कर लिया था क्योंकि मुझे बचपन से ही बहुत शौक था कि मुझे आगे चलकर डाक्टर बनना है और इसके जरिए लोगों की मदद भी करनी है। चिकित्सा की मेरी इस जर्नी की प्रेरणास्रोत मेरी माताजी रही है। उन्होंने मुझे पढ़ाई में बहुत प्रोत्साहित किया क्योंकि ज्यादातर परिवारों में लड़कियों में पढ़ाई के लिए ज्यादा मोटिवेट नहीं किया जाता है लेकिन मेरे मामले में ठीक इसके अलग था। मेरी माता इस बात पर बिल्कुल क्लियर थी कि मुझे पढ़ाई में बहुत आगे जाना है और चिकित्सा के क्षेत्र में अपना करियर बनाना है।
अपने प्रोफेशनल सफर के बारे में बताए और आपकी अब तक की क्या-क्या उपलब्धियां रही है?
डीएमसी लुधियाना से एमडी करने के बाद सुभारती मेडिकल कॉलेज, देहरादून में सीनियर रेजीडेंट के रूप में 1.5 साल, गर्वमेंट मेडिकल इंस्टीटयूट (मानसिक चिकित्सालय, सेलाकुई में 6 महीने, दून मेडिकल कॉलेज में लगभग 2 वर्ष कार्य किया। दून मेडिकल कॉलेज से रिजाइन करने के बाद मैने माइंड हील क्लीनिक के नाम से अपना प्राइवेट हास्पिटल शुरू किया और अब यही पर कंसल्टेंट मनोचिकित्सक के रूप में प्रैक्टिस कर रही हूँ।
चिकित्सा के क्षेत्र में आपका कोई यादगार अनुभव।
चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत सारे अनुभव हुए है। नशा करने वाले लोगों की लाइफ को करीब से देखने का मौका मिला है। नशे के आदि रहने वाले लोग अपने साथ-साथ अपने परिवार की लाईफ को भी खराब कर देते हैं। यादगार अनुभव के तौर पर मैं कह सकती हूँ कि मुझे कई पेशेंट ऐसे भी मिले है जो किसी कारणवश नशे की गिरफ्त में तो आ गये लेकिन जब उनका ईलाज शुरू हुआ तो उन्होंने मेरी हर एडवाइज को अच्छे से फॉलो किया, रेगुलर ट्रीटमेंट तथा दवाईयों को भी समय से लिया। इससे न केवल उनका स्वास्थ्य अच्छा हुआ बल्कि वे मुख्यधारा में वापिस आए और उनके परिवार में खुशियां भी लौट कर आई। इससे अच्छा यादगार अनुभव मेरे लिए और क्या हो सकता है।
दिव्य हिमगिरी के पाठकों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगी?
पाठकों के लिए मेरा संदेश है कि वे अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें क्योंकि अगर मन ठीक होगा तभी शरीर भी ठीक रहेगा। अगर आपके मस्तिष्क में कोई प्राब्लम रहेगी तो उसका इफेक्ट आपके शरीर के साथ-साथ आपके परिवार की सुख शांति पर भी पड़ेगा। अगर किसी को मानसिक समस्या जैसे डिप्रेशन, एंजाईटी, नशे की लत, बहुत ज्यादा गुस्सा आना, व्यवहार में अचानक बदलाव आदि कुछ लक्षण आते है तो उन्हें घबराना नहीं चाहिए और तुरन्त मनोचिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए और समय पर ईलाज शुरू कराना चाहिए। ये कोई शर्म वाली बात नहीं है। जैसे और बीमारी होती है इसी तरह मानसिक समस्या भी एक बीमारी है और सबसे अच्छी बात है कि अब इसका ईलाज बहुत सेफ है और अच्छे से उपलब्ध भी है।






