पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले देशवासियों को संभावित वैश्विक संकट के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी, जिसके बाद देश में लॉकडाउन जैसी आशंकाओं को लेकर अफवाहें तेज हो गईं। प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में कहा था कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के दूरगामी दुष्परिणाम हो सकते हैं और आने वाला समय बड़ी परीक्षा लेने वाला है, इसलिए केंद्र और राज्यों को ‘टीम इंडिया’ की तरह मिलकर काम करना होगा। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर संभावित प्रतिबंधों और आपूर्ति संकट को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। स्थिति स्पष्ट करने के लिए केंद्र सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों को सामने आकर कहना पड़ा कि देश में लॉकडाउन लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है और ईंधन व आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। इसके बाद प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर फिर दोहराया कि हालात पर नजर है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं। शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर बनते अनिश्चित हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले संसद के उच्च सदन में देश को संभावित चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। राज्यसभा में संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के दूरगामी दुष्परिणाम हो सकते हैं और इसका असर ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक रह सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय देश की बड़ी परीक्षा ले सकता है, इसलिए केंद्र और राज्यों को ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ मिलकर काम करना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में जो कठिन हालात बन रहे हैं, उनसे भारत भी अछूता नहीं रहेगा। उन्होंने कोरोना महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी देश ने एकजुट होकर चुनौती का सामना किया था और इस बार भी उसी तरह समन्वय की जरूरत होगी। पीएम मोदी ने राज्यों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि हर स्तर पर तैयारियां मजबूत रखनी होंगी ताकि किसी भी संभावित संकट का प्रभाव कम किया जा सके। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के समय बाहरी चुनौतियों के साथ-साथ आंतरिक अव्यवस्था और अफवाहों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में कानून-व्यवस्था से जुड़ी सभी एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि तटीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक ठिकानों की निगरानी को और मजबूत किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से संयम बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि संकट के समय कुछ लोग झूठी खबरें फैलाकर या जमाखोरी करके हालात का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। इसलिए राज्यों और प्रशासनिक एजेंसियों को ऐसे तत्वों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि शांत मन से हर चुनौती का सामना करना ही देश की ताकत है और यही पहचान भी है। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ जगहों पर संभावित आपूर्ति संकट और प्रतिबंधों को लेकर अफवाहें फैलने लगीं। ईंधन की उपलब्धता, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और संभावित लॉकडाउन को लेकर लोगों में चिंता बढ़ने लगी। कई जगहों पर लोगों ने अतिरिक्त सामान खरीदने की कोशिश भी शुरू कर दी, जिससे बाजार में अनावश्यक हलचल देखी गई। इसी बीच केंद्र सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि देश में लॉकडाउन लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है और इस तरह की खबरें पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हालात पर नजर रखे हुए है और केंद्र तथा राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। रिजिजू ने चेतावनी दी कि यदि कोई कृत्रिम कमी पैदा करने या जमाखोरी की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी अफवाहों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि कोविड-19 जैसी स्थिति नहीं बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता अर्थव्यवस्था को स्थिर रखना और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत ने पर्याप्त भंडार बनाए हुए हैं और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिना वजह सामान जमा न करें और केवल जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी स्पष्ट किया कि देश में लॉकडाउन की खबरें निराधार हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति को लेकर वास्तविक समय पर निगरानी की जा रही है और ईंधन तथा एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि “तैयारी” का मतलब प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता है, न कि आम लोगों की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध। पुरी ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित न हो और लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। तीनों मंत्रियों के बयानों के बाद सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की कि हालात नियंत्रण में हैं और घबराने की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि तेल कंपनियों और राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वितरण व्यवस्था में कोई बाधा न आए। प्रशासन को जमाखोरी रोकने और आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
अंतरराष्ट्रीय हालात चुनौतीपूर्ण जरूर, लेकिन भारत की तैयारी मजबूत
प्रधानमंत्री के राज्यसभा संबोधन के बाद फैली चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार के मंत्रियों ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह समझ से परे है कि इस तरह की गलत खबरें कौन फैला रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह की घबराहट पैदा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हालात पर नजर रख रही हैं और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन भारत की तैयारी मजबूत है। उन्होंने कहा कि ईंधन और जरूरी वस्तुओं का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रूप से काम कर रही है। उन्होंने लोगों से संयम बरतने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने बताया कि तेल और गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए लगातार समीक्षा की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लॉकडाउन लगाने जैसी कोई स्थिति नहीं है और सोशल मीडिया पर फैल रही खबरें भ्रामक हैं। सरकार ने प्रशासन को निर्देश दिए कि यदि कहीं कृत्रिम कमी पैदा करने या जमाखोरी की कोशिश होती है तो तुरंत कार्रवाई की जाए। राज्यों से भी कहा गया कि वे स्थानीय स्तर पर बाजारों की निगरानी करें और लोगों को भरोसा दिलाएं कि आवश्यक वस्तुओं की कोई कमी नहीं होगी।
मुख्यमंत्रियों की बैठक में पीएम मोदी का स्पष्ट संदेश, देश में लॉकडाउन नहीं
27 मार्च, शुक्रवार शाम आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों के साथ विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रहा है, लेकिन भारत की तैयारी मजबूत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि देश में किसी प्रकार का लॉकडाउन लगाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि अफवाहों पर ध्यान न दिया जाए और केंद्र तथा राज्य मिलकर हालात का सामना करें। उन्होंने राज्यों से कहा कि वे स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाएं और जनता को सही जानकारी दें। बैठक में यह भी कहा गया कि कच्चे तेल की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है और देश के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। प्रशासन को निर्देश दिए गए कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा न आने दी जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के दौरान जिस तरह ‘टीम इंडिया’ की भावना से काम किया गया था, उसी तरह समन्वय के साथ आगे बढ़ना होगा। कुल मिलाकर पिछले कुछ दिनों में पहले प्रधानमंत्री की चेतावनी, फिर अफवाहों का दौर और उसके बाद सरकार की ओर से स्पष्टीकरण का सिलसिला देखने को मिला। राज्यसभा में संभावित संकट को लेकर प्रधानमंत्री के अलर्ट के बाद पैदा हुई चिंता को सरकार और मंत्रियों ने भरोसा देकर शांत करने की कोशिश की। मुख्यमंत्री बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि हालात पर नजर है, लेकिन देश में लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं बनने वाली है। बैठक में कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। इनमें आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू, उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी, पंजाब के भगवंत मान, गुजरात के भूपेंद्र पटेल, जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू, अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू, छत्तीसगढ़ के विष्णुदेव साय, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, झारखंड के हेमंत सोरेन, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी और महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस समेत कई अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। बैठक में केंद्र सरकार की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह सहित कैबिनेट सचिव और विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने ऊर्जा भंडार, आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय हालात के संभावित असर पर प्रस्तुति दी। इसके बाद प्रधानमंत्री ने राज्यों से समन्वय के साथ काम करने और स्थानीय स्तर पर निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए।






