विज्ञान, समर्पण और सेवा द्वारा पोषण से परिवर्तन कराती डाइटिशियन वंदना

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अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि तथा अपनी शिक्षा पृष्ठभूमि के बारे में बताइए?
मैं एक साधारण भारतीय परिवार से हूँ जहाँ स्वास्थ्य, अनुशासन और शिक्षा को सदैव विशेष महत्व दिया गया। बचपन से ही मुझे अध्ययन करने का गहरा लगाव था। मैं नियमित रूप से समाचार पत्र के वे पृष्ठ पढ़ा करती थी जिनमें पोषण से संबंधित लेख प्रकाशित होते थे विशेष रूप से फल एवं सब्जियों के विषय में कि उनमें कौन-कौन से विटामिन और खनिज तत्व पाए जाते हैं तथा वे हमारे शरीर पर किस प्रकार का प्रभाव डालते हैं। उसी समय से मेरे मन में यह जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि भोजन केवल भूख शांत करने का माध्यम नहीं है बल्कि यह स्वास्थ्य निर्माण का एक सशक्त वैज्ञानिक आधार है। मेरे माता-पिता का मेरे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने मुझे संतुलित आहार, प्राकृतिक जीवनशैली तथा शिक्षा के मूल्यों को समझाया और सदैव मेरे रुचि क्षेत्र को प्रोत्साहित किया। उनके मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद के कारण ही मेरा झुकाव आहार एवं पोषण के क्षेत्र की ओर सुदृढ़ हुआ। शिक्षा के क्षेत्र में मैंने आहार-विज्ञान एवं खाद्य सेवा प्रबंधन में परास्नातक (एम-एस-सी-) की उपाधि प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त आहार अनुपूरक (डायटरी सप्लीमेंटेशन) में डिप्लोमा तथा रोग प्रतिवर्तन पोषण (डिजीज रिवर्सल न्यूट्रिशन) में प्रमाणन प्राप्त किया है। वर्तमान में मैं एक प्रमाणित आहार विशेषज्ञ एवं प्राकृतिक चिकित्सक के रूप में कार्यरत हूँ तथा वैज्ञानिक एवं प्रमाण-आधारित पोषण के माध्यम से समाज को स्वस्थ जीवन की दिशा देने का प्रयास कर रही हूँ।

आपके प्रोफेशन के बारे में बताइए अथवा आप इस प्रोफेशन में किस प्रकार आईं और आप किससे प्रभावित हुईं?
मैं एक प्रमाणित आहार विशेषज्ञ (सर्टिफाइड डाइटीशियन) हूँ तथा रोग प्रतिवर्तन पोषण (डिजीज रिवर्सल न्यूट्रिशन) के क्षेत्र में कार्यरत हूँ। मेरा मुख्य उद्देश्य लोगों को दवाओं पर अत्यधिक निर्भर होने के स्थान पर संतुलित, वैज्ञानिक एवं प्रमाण-आधारित आहार के माध्यम से स्वस्थ बनाना है। इस क्षेत्र में आने की प्रेरणा मुझे तब मिली जब मैंने देखा कि अनेक लोग जीवनशैली से संबंधित रोगों जैसे मोटापा, मधुमेह, थायरॉइड विकार, पी-सी-ओ-एस- तथा हृदय रोग से संघर्ष कर रहे हैं। उचित मार्गदर्शन के अभाव में वे कभी प्रचलित डाइट प्रवृत्तियों (ट्रेंड्स) का अनुसरण करने लगते हैं तो कभी निराशा का अनुभव करते हैं। यह स्थिति मुझे गहराई से प्रभावित करती थी और यहीं से मैंने निश्चय किया कि मैं वैज्ञानिक आधार पर सही पोषण मार्गदर्शन प्रदान करूँगी। मैं विशेष रूप से वैज्ञानिक शोध, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आई-सी-एम-आर-) के दिशा-निर्देशों तथा प्रमाण-आधारित पोषण सिद्धांतों से प्रभावित हूँ। मेरा दृढ़ विश्वास है कि आहार ही उपचार का मूल आधार है।
वर्तमान में मैं विभिन्न चिकित्सकों के साथ समन्वय (कोलैबोरेशन) में भी कार्य कर रही हूँ, जिनमें स्त्रीरोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) तथा त्वचा एवं केश रोग विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) स्किन एवं हेयर स्पेशलिस्ट शामिल हैं। इस समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से हम रोगी को समग्र (होलिस्टिक) उपचार प्रदान करने का प्रयास करते हैं, जिससे उसे दीर्घकालिक एवं स्थायी लाभ प्राप्त हो सके। मेरे लिए यह प्रोफेशन केवल व्यवसाय नहीं बल्कि एक सामाजिक उत्तरदायित्व है। स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में एक छोटा किंतु सार्थक कदम।

आपकी उपलब्धियों के बारे में बताइए। आपने क्या कार्य किए हैं?
जवाब-मुझे अपने कार्यक्षेत्र में उत्तराखंड की प्रसिद्ध साप्ताहिक पत्रिका दिव्य हिमगिरि द्वारा सातवां हिमालयी नारी शक्ति सम्मान, हेल्दिफाई इंस्टिटयूट द्वारा पायनियर अवॉर्ड, हॉल ऑफ इम्पैक्ट अवॉर्ड, डिजीज रिवर्सल एक्सपर्ट अवॉर्ड तथा हेल्दिफाई को-क्रिएटर अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
यह सम्मान मेरे लिए केवल पुरस्कार नहीं बल्कि समाज के प्रति मेरे समर्पण की पहचान हैं।
मैं ‘‘न्यूट्रीबीट्ज वेलनेस स्टूडियो’’ नामक ऑनलाइन क्लिनिक का संचालन करती हूँ जहाँ प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, जीवनशैली तथा चिकित्सकीय आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विज्ञान-आधारित एवं व्यक्तिगत आहार योजनाएँ तैयार की जाती हैं। मैंने अनेक लाइव सत्र एवं पॉडकास्ट कार्यक्रमों का आयोजन किया है। मेरे मंच ‘‘डायटीशियन टॉक शो’’ के माध्यम से मैंने ड्रग एंड फूड इंटरैक्शन, इमोशनल फ्रीडम टेक्नीक (ई-एफ-टी-), शुगर एंड सॉल्ट क्रेविंग तथा बाल पोषण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जन-जागरूकता का कार्य किया है।
इसके अतिरिक्त ‘‘न्यूट्रीबीट्ज’’ मंच के माध्यम से मैं पोषण विषय पर रैप गीतों के द्वारा भी लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही हूँ। मेरा मानना है कि यदि ज्ञान को रोचक और सरल रूप में प्रस्तुत किया जाए, तो वह अधिक प्रभावी ढंग से समाज तक पहुँचता है। मेरा प्रत्येक प्रयास इसी दिशा में केंद्रित है कि पोषण को केवल चिकित्सा का विषय न समझा जाए बल्कि इसे जीवनशैली का आधार बनाया जाए।

आपके भविष्य की योजनाओं के बारे में बताइए?
मेरा लक्ष्य भारत में रोग प्रतिवर्तन पोषण (डिजीज रिवर्सल न्यूट्रिशन) को एक सशक्त जन-आंदोलन के रूप में स्थापित करना है ताकि लोग यह समझ सकें कि संतुलित और वैज्ञानिक आहार अनेक रोगों की रोकथाम तथा सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मैं भविष्य में ‘‘न्यूट्रीबीट्स’’ को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त ब्रांड के रूप में स्थापित करना चाहती हूँ जिससे अधिक से अधिक लोगों तक सही पोषण ज्ञान, मार्गदर्शन और जागरूकता सरल एवं सुलभ रूप में पहुँच सके। मेरा उद्देश्य है कि पोषण शिक्षा केवल सीमित वर्ग तक न रहकर समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचे।
मेरा एक स्वप्न यह भी है कि मैं देहरादून में ‘‘आरोग्यम स्वास्थ्य वेलनेस’’ के नाम से आहार एवं प्राकृतिक चिकित्सा (डाइट एवं नेचुरोपैथी) केंद्र की स्थापना करूँ जहाँ समग्र, व्यक्तिगत तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य समाधान प्रदान किए जा सकें।

आप हमारी पत्रिका के माध्यम से क्या संदेश देना चाहेंगी?
मेरा संदेश है ‘‘आहार ही उपचार है’’ कृपया ट्रेंडिंग डाइट्स के पीछे भागने के बजाय वैज्ञानिक और व्यक्तिगत आहार पद्धति अपनाएँ। स्वास्थ्य कोई लक्जरी नहीं बल्कि जीवन की मूल आवश्यकता है। यदि हम अपने भोजन को सही कर लें, तो आधी बीमारियाँ स्वतः समाप्त हो सकती हैं। मैं सभी पाठकों से निवेदन करना चाहूँगी कि अपने भोजन को अपनी प्राथमिकता बनाइए। जागरूक बनिए, सही जानकारी प्राप्त कीजिए और अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी स्वयं उठाइए। क्योंकि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ परिवार का निर्माण करता है और स्वस्थ परिवार ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है।
स्वस्थ भारत ही सशक्त भारत का आधार है।

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