राज्य की संस्कृति और शिल्प को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के रूप में उकेरती श्रद्धा नेगी

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श्रद्धा नेगी उत्तराखंड की संस्कृति, शिल्प और शांत विलासिता पर आधारित भारत का पहले डिज़ाइन-आधारित जीवनशैली ब्रांड जूसीवर्स की संस्थापक है। यह ब्रांड उत्तराखंड की महिलाओं का एक सशक्त समूह तैयार कर राज्य की कहानियों, संस्कृति और शिल्प को समकालीन स्वरूप में दुनिया तक पहुँचाने का कार्य कर रही है।

अपनी पारिवारिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में बताइए।
मैं एक ऐसे परिवार से आती हूँ जिसकी जड़ें सैन्य परंपरा से जुड़ी हैं। मेरे परदादा से लेकर दादा, पिता और परिवार के अन्य सदस्यों ने देशसेवा की यह विरासत चली आ रही है। इस वातावरण में पले-बढ़े होने के कारण अनुशासन, आत्मबल, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा जैसे मूल्य स्वाभाविक रूप से मेरे जीवन का हिस्सा है। मैं मूल रूप से उत्तराखंड से हैं और देहरादून मेरी कर्मभूमि और आत्मिक जुड़ाव का केंद्र रहा है। शैक्षणिक रूप से मैं वर्ष 2002 बैच की एनआईएफटी एलुमनी हूँ और मैंने एनआईएफटी हैदराबाद से टेक्सटाइल डिजाइन एंड डेवलपमेंट में पोस्टग्रेजुएशन किया है। इसके अतिरिक्त, फैशन डिजाइन में डिप्लोमा और विभिन्न सर्टिफिकेशन ने मेरे प्रोफेशनल सफर की एक मजबूत नींव रखी।

अपने प्रोफेशनल सफर के बारे में बताइए, आप इस क्षेत्र में कैसे आई और किससे प्रेरणा मिली?
मेरे करियर की शुरुआत एक टेक्सटाइल डिजाइनर के रूप में हुई लेकिन उद्यमिता में मेरा प्रवेश किसी पूर्व नियोजित योजना का हिस्सा नहीं था। वर्ष 2020 में क्रोविड महामारी के दौरान, जब पूरी दुनिया ठहर गई, तब मैंने अपने जीवन और कार्य के वास्तविक उद्देश्य पर गहराई से आत्ममंथन किया। उस समय मैं ऋतु कुमार ब्रांड में होम डिवीजन का नेतृत्व कर रही थी। वैश्विक अनिश्चितता और निजी जीवन में आए परिवर्तनों ने मुझे एक सुरक्षित कॉपोरेट भूमिका से बाहर निकलकर अपने इकिगाई अपने जीवन के उद्देश्य का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया। मैं देहरादून लौट आई और यहीं से मेरी स्वतंत्र यात्रा की शुरुआत हुई। कोविड मेरे जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जहाँ एक नौकरीपेशा पेशेवर से मैं स्वरोजगार की ओर बढ़ी और फिर दूसरों के लिए रोजगार सृजन की दिशा में कदम रखा।

अब तक की आपकी प्रमुख उपलब्धियाँ और कार्य कौन-से रहे हैं?
मेरी पेशेवर यात्रा एक सशक्त शैक्षणिक आधार और दो दशकों से अधिक के इंडस्ट्री अनुभव से निर्मित हुई है। एनआईएफटी में मुझे बेस्ट ग्रेजुएशन प्रोजेक्ट का सम्मान प्राप्त हुआ, जिसने मेरे आत्मविश्वास को और मजबूत किया। पेशेवर स्तर पर, मुझे जारा होम, पोट्री बार्न, सरिता हांडा और ऋतु कुमार जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के साथ काम करने का अवसर मिला, जहाँ आगे चलकर मैंने होम डिवीजन का नेतृत्व भी किया। मेरी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि इकिगाई डिजाइन्स की स्थापना है-एक B2B डिजाइन और कंसल्टिंग कंपनी, जो कॉन्सेप्ट से लेकर फाइनल प्रोडक्ट तक की संपूर्ण प्रक्रिया को संभालती है। इसी के अंतर्गत मैं ‘जूसीवर्स’ जैसे कंज्यूमर ब्रांड्स का भी विकास कर रही हूँ। इकिगाई डिजाइन्स स्टार्टअप इंडिया और स्टार्टअप उत्तराखंड से मान्यता प्राप्त है। इसके अतिरिक्त, नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड निवास परियोजना में 48 कमरों के इंटीरियर और कस्टम उत्पादों के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करना मेरे लिए एक विशेष अनुभव रहा। देहरादून के मालसी, राजपुर रोड स्थित एड्स वन मॉल में अपना रिटेल स्पेस स्थापित करना, उन्हू कम्युनिटी से वूमैन एंटरनप्रयोनर ऑफ द ईयर सम्मान प्राप्त करना, और गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर वंचित महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना ये सभी मेरे सफर के महत्त्वपूर्ण पड़ाव रहे हैं।

आपकी भविष्य की योजनाएँ क्या हैं?
मेरी भविष्य की योजनाएँ उत्तराखंड से जुड़ा एक ऐसा वैश्विक ब्रांड स्थापित करने पर केंद्रित हैं, जो डिजाइन और उत्त्पादों के माध्यम से राज्य की कहानियों, संस्कृति और शिल्प को समकालीन स्वरूप में दुनिया तक पहुँचाए। इसके साथ ही, मैं महिलाओं के लिए एक सशक्त समुदाय बनाने की दिशा में भी कार्यरत हूँ जहाँ प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोग, साझा विकास और आपसी समर्थन को प्राथमिकता दी जाए।

हमारी पत्रिका के माध्यम से आप पाठ्‌कों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
इस मंच के माध्यम से मैं पाठ्‌कों को जूसीवर्स ट्राइब का हिस्सा बनने का आमंत्रण देना चाहती हूँ, एक ऐसा समुदाय जो आत्मसम्मान, सच्चाई और शांत आत्मबल पर आधारित है। यह उन महिलाओं के लिए है जो प्रतिस्पर्धा की बजाय सहयोग को चुनती हैं। लंबे समय तक महिलाओं को एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा किया गया है, लेकिन अब समय है इस सोच को बदलने का। जब महिलाएँ साझा उद्देश्य और ईमानदारी के साथ एकजुट होती हैं, तो उनकी सामूहिक शक्ति किसी भी व्यक्तिगत सफलता से कहीं अधिक प्रभावशाली होती है। जब महिलाएँ साथ उठती हैं, तो वे सिर्फ आगे नहीं बढ़ती वे और भी मजबूत बनती हैं और जब एक महिला अपनी कहानी, संस्कृति और अनुभव साझा करती है. तो दुनिया उसे सुनने लगती है।

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