शादी की तैयारी चल रही थी, खास रिश्तेदार के बेटी की शादी थी। शादी के आमत्रण की जानकारी फोन और डिजिटल कार्ड द्वारा प्राप्त हुआ। शादी के प्रति हमारा उत्साह था। उत्साह को लेकर सरकारी छुट्टी लेकर दो दिन के लिये फुल इंजायमेंट हेतु शादी स्थल के लिये सुबह वन्दे भारत से दिल्ली के लिये निकल पडे़। हमें डिजिटल कार्ड द्वारा बताया गया था कि शादी आयोजन स्थल गुडगॉव में है, जहा हम मेट्रो तक आसानि से आ जा सके लेकिन पता लगा कि शादी स्थल दिल्ली से 70 किलो मीटर दूर गुड़गांव के आगे मेवात जिला के हसन पुर गांव में जाना है। दिल्ली से कुल रास्ता लगभग 3 से 4 घंटे का था। सुबह का निकलकर शाम को 03 बजे एक 05 स्टार होटल में अंत मे पहुंच गये।
पहुंचते ही होटल के दरबान स्वागत हेतु हमारा सभी सामान ले लिया, और कहा कि यह सामान आपको रूम में मिल जायेगा। मैं भी पूरे ठाठ से रिसेप्शन पर पहुंचा और पूछा कि मेरा रूम कहां है। बताया गया कि आपका रूम यहा नहीं है। पुनः पूछने पर कि मेरा रूम इसके अलावा कहां है तो पता लगा कि उससे कम स्टार वाले होटल में जो वहां से लगभग 02 किलोमीटर दूर है वहां पर मेरा रूम होगा। यहां पर पहली मैंने गलती की थी कि अपनी टैक्सी छोड़ दी थी जो कि हमें हमेशा रखना था। बताया गया की इंवेटमनेजमेंट की गाड़ी आपको कम स्टार वाले होटल में छोड़ेगी। जद्दोजहद के बाद इंवेट मैनेजमेंट की गाड़ी ने हमको होटल छोड़ा लेकिन सामान उस ड्राइवर ने हमें दिये बिना वापस लेकर चला गया। नाराजगी व्यक्त करने पर 20 मिनट बाद पुनः हमें अपना सामान मिला। दूसरे कम स्टार के होटल के रिसेप्शन पर पता लगा कि मेरा रूम यहां भी नहीं है। नाराजगी होनी स्वाभाविक थी। गुस्से में मैंने रिसेप्शन वाले से चार्ट छीनकर खुद देखना चालू कर दिया तो पता लगा कि मेरा रूम वहीं पर था।
इसके बाद मैं अपने रूम पर रिलेक्स होकर लेट गया। तीव्र भूख के कारण कुछ खाने का ऑर्डर किया। बताया गया कि इस समय खाना बंद है आपको पेमेंट पर कुछ मिलेगा। मैंने 750 रू. के पकोड़े मंगा कर अपनी भूख आंशिक रूप से शांत किया। इसके बाद पुनः निराश होकर बेड पर बैठ गया, क्योंकि शादी की गतिविधियां 02 किलोमीटर दूर होनी थी। मैंने सुबह यहां से निकलने का प्लान बना लिया। यह सोचकर प्लान बनाया कि शाम को खाने के स्थान पर आन पेमेंट सूप का ऑर्डर देकर रात में सोने के बाद सुबह निकल जायेंगे। क्योंकि हमें रात का खाना भी मिलने की उम्मीद नहीं थी। लेकिन उसी दिन 04 बजे शाम को व्हाट्सअप पर मैसेज मिला कि 5 स्टार होटल ने जो कि 02 किलोमीटर दूर है वहां खाने पीने का प्रबंध है और मीका सिंह का प्रोग्राम होना है।
हमें थोड़ा राहत मिली कि वहां पर खाना तो मिल ही जायेगा और हमारे अन्य परिचित और रिश्तेदारों से भेट मुलाकात हो जाएगी। आयोजन स्थल पर पहुंचने के बाद हमने नवेद के रूप में साड़ी के साथ रखे गए 2100 रुपये के लिफाफे से एक हज़ार रुपये निकाल लिए और फिर एक घरेलू महिला को दे दिया । बाद में पता चला कार्यक्रम के गर्मी में हमारे साड़ी वाले पैकेट से किसी ने पैसा वाला लिफाफा निकाल लिया था।
इसके बाद कुछ खाने के लिए निकला
चाट, स्नेक्स के स्टाल लगे थे लेकिन हमारी इच्छा सूप पीने की थी, सूप वाले स्टाल ने बताया अभी इसे खोलने की परमिशन नहीं मिला है। मैं फिर निराश हो गया लेकिन आधे घंटे बाद हमें सूप मिल गया। दुर्भाग्य से मेरे जीवन का यह स्वाद में सबसे खराब सूप था। चूंकि हमें मुरादाबादी दाल पसंद है, इसलिये मुरादाबादी दाल स्टाल पर गया जहा पर सामान्य मात्रा से 1/4 एक सुदर कटोरी में मुरादाबादी दाल हमें मिला, लेकिन दुर्भाग्य से स्वाद के मामले में इससे खराब दाल नहीं खाया था।
इसके पूर्व जो हमने जिस कम स्टार वाले होटल में भुगतान के आधार पर पकोड़ा खाया था। उस पकोड़े से होने वाले इंफेक्सन का असर अब 08 बजे रात में दिखने लगा। इसलिये बिना कुछ खाना खाये मैं पुनः अपने रूम में आकर सो गया। रात में हमें एक उल्टी हुई और 08 बार लूज मोशन हुए। अगले दिन सुबह अपने को सुरक्षित करने के लिये अपने चचेरे भाई के कमरे में जाकर बैठ गया। दवा इत्यादि का प्रबंध होटल में कहीं नहीं था। हमारे परिचित डॉक्टर हरिद्वार से फोन पर दवा की जानकारी मिली, परंतु दुर्भाग्य से 10 किलोमीटर के दायरे में कोई मेडिकल स्टोर नहीं था। इसलिए हमारे एक अन्य चचेरे भाई जो नोएडा से शादी अटेंड करने आ रहे थे उनसे हमने एक इनोवा गाड़ी फुल टाइम के लिए लाने को कहा और साथ में दवा भी।
दूसरे दिन लगभग 01 बजे दवा और गाड़ी मिलने से पुनः मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया। इस बीच में हम नमक पानी का घोल देशी स्टाइल में ले रहे थे। लूज मोशन चल रहा था। 01 बजे दवा मिलने से थोड़ी राहत मिली।
पुनः 01 मैसेज मिला आप लोग 05 बजे जमुना घाट पर 5 स्टार होटल में आ जाएं, विवाह का एक कार्यक्रम है। हम जल्दी से जल्दी यहां से निकल जाना चाहते थे। जमुना घाट पर 05 बजे शाम टी स्टॉल पर ब्लैक टी मांगने पर यह कह कर मना किया गया कि यह मेनू में नंही है, जबकि 5-7 तरह की चाय मौजूद थी। मैं 06ः00 बजे शाम को इस उद्देश्य से 05 स्टार होटल छोड़ दिया कि दिल्ली में अपने भतीजे के घर पहुंच कर मूंग की खिचड़ी खा लुंगा। इस बीच में वापसी का सारा प्रोग्राम बदलकर मैंने प्लेन से अगली सुबह का टिकट अपनी सुरक्षा की दृष्टि से करवा दिया था।
शादी में जयमाला कार्ड के अनुसार समय 05ः00 बजे निर्धारित था। लकिन जयमाला 06 बजे तक ना हो पाने के कारण मैं जयमाला से पूर्व 06ः00 बजे निकल गया। मैंने अपने चचेरे भाइयों से कहा कि आप लोग भी चलो, तो उनका उत्तर था थोड़ी देर और रूक लेते हैं। जयमाला लेट होने की आशंका और सुबह ऑफिस छूटने का अंदेशा से उन्होंने लगभग 08ः00 बजे रात खाना खाकर निकलने का फैसला किया। लेकिन खाने के स्टॉल पर जाने पर उन्हें पता लगा कि यह खाना जयमाला के बाद खुलेगा। चूंकि यह आयोजन निर्जन स्थान पर था। यहां ओला आटो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा 20 किलोमीटर के दायरे में नहीं थी। इसलिए उन्होंने इवेंट मैनेजमेंट से मैट्रो तक छोड़ने का अनुरोध किया, लेकिन निराशा हाथ लगी। इसके बाद उन्होने होटल वाले से बात करने पर उन्हे 1500 रू. में एक टैक्सी 25 किलोमीटर दूर मैट्रो तक छोड़ी। कई जर्नी ब्रेक करके 1.30 बजे रात में ये लोग नोएडा पहुचकर खाना खा सके।
इसके पूर्व जिस टैक्सी ड्राइवर ने हमको दिल्ली छोड़ा था उसका कथन था कि ‘‘साहब ये बड़ा अनटप्पू जगह शादी थी’’ हमने पूछा क्यों ड्राइवर ने बताया साहब 10 किलोमीटर दूर में हम लोग खाने के लिए ढाबा खोजते रहे लेकिन हमें खाना नहीं मिला। इसके पूर्व होटल मैनेजमेंट ने ड्राइवर, मजदूर के लिए कोई खाने का प्रबंध नहीं रखा था।
इस घटनाक्रम का सीख यह है कि आने वाले दिनों में लोगों के पास पैसा अत्यधिक आ जाने से शादियां इसी प्रकार के इवेंट के रूप में होंगी। इवेंट का स्थल निर्जन टापू पर या रिजार्ट में होगा जिसके इर्द-गिर्द 10 किलोमीटर में कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट ओला इत्यादि की सुविधा नहीं मिलेगी। यदि किसी का स्वास्थ्य खराब होगा, मेडिकल स्टोर नहीं मिलेगा और खाने को नहीं मिलेगा। इतने दृष्टिकोण को रखकर तब अपनी पूरी व्यवस्था के साथ इस प्रकार की शादी में जाने की हिम्मत करें अन्यथा कोई हादसा हो सकता है।






