चमोली प्रकरण पर बाल आयोग की कठोर प्रतिक्रिया

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चमोली जनपद में एक शिक्षक द्वारा एक बालिका के साथ कथित अश्लील व्यवहार किए जाने की गंभीर घटना पर आयोग ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि यह घटना बच्चों की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है तथा ऐसी अमानवीय घटनाओं को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

आयोग ने निर्देशित किया है कि “चमोली प्रकरण में पुलिस द्वारा की गई अब तक की समस्त कार्रवाई की विस्तृत आख्या (ATR) आयोग को तत्काल उपलब्ध कराई जाए। राज्य के सभी स्कूलों, आश्रमों, छात्रावासों एवं बाल देखभाल संस्थानों में कार्यरत समस्त कर्मचारियों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन कराया जाए। वर्तमान तथा भविष्य में नियुक्त होने वाले सभी कर्मचारियों की नियुक्ति मनोवैज्ञानिक परीक्षण (Psychological Evaluation) के उपरांत ही सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों के लिए पूर्णतः सुरक्षित वातावरण स्थापित हो सके।”
साथ ही, जिलाधिकारी एवं SSP चमोली को निर्देश दिए गए हैं कि “उक्त प्रकरण में तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। घटना से संबंधित पूरी कार्यवाही की त्वरित आख्या आयोग को भेजी जाए।”

बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

डॉ. खन्ना ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आयोग इस प्रकार के मामलों में शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति अपनाता है और किसी भी लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा।

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