सदन में अपने ही सांसद के बोलने पर असहज हुई आप

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आम आदमी पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटाकर बड़ा संगठनात्मक संदेश दिया है। पार्टी ने इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेजते हुए अनुरोध किया है कि चड्ढा को तत्काल प्रभाव से उपनेता पद से मुक्त किया जाए और उन्हें पार्टी कोटे से सदन में बोलने का समय भी आवंटित न किया जाए। पार्टी ने उनकी जगह सांसद अशोक मित्तल को नया उपनेता बनाने का प्रस्ताव रखा है। इस फैसले को संसदीय रणनीति में बदलाव के साथ-साथ पार्टी के भीतर नेतृत्व संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। हाल के महीनों में राघव चड्ढा द्वारा संसद में लगातार जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए जाने और संगठनात्मक गतिविधियों से उनकी दूरी को भी इस निर्णय से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी ने औपचारिक रूप से कोई कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन इस कदम ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। दिव्य हिमगिरि रिपोर्ट

आम आदमी पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उच्च सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटाकर बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। पार्टी ने इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र भेजते हुए अनुरोध किया है कि चड्ढा को तत्काल प्रभाव से उपनेता पद से मुक्त किया जाए और उन्हें पार्टी कोटे से सदन में बोलने का समय भी आवंटित न किया जाए। पार्टी ने उनकी जगह सांसद अशोक मित्तल को नया उपनेता बनाने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम को संसदीय रणनीति में बदलाव और नेतृत्व में फेरबदल के तौर पर देखा जा रहा है। अप्रैल 2022 से राज्यसभा सांसद रहे राघव चड्ढा सदन में मुखर आवाज के रूप में जाने जाते रहे हैं, लेकिन हाल के महीनों में उनकी संगठनात्मक सक्रियता कम दिखाई देने की चर्चा भी चल रही थी। पार्टी द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट संकेत दिया गया है कि संसदीय मंच पर पार्टी की लाइन तय करने और बोलने के अवसरों को लेकर नया ढांचा तैयार किया जा रहा है। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सदस्य हैं, जिनमें सात पंजाब और तीन दिल्ली से हैं। ऐसे में उपनेता पद का महत्व बढ़ जाता है, क्योंकि यही पद सदन में पार्टी के समन्वय और रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला पिछले कुछ समय से चल रहे आंतरिक मूल्यांकन और जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण का हिस्सा हो सकता है।
राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से पार्टी की प्रमुख राजनीतिक गतिविधियों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में कम नजर आ रहे थे। हाल ही में जारी स्टार प्रचारकों की सूची में भी उनका नाम शामिल नहीं किया गया था, जिसे नेतृत्व स्तर पर बदलाव के संकेत के तौर पर देखा गया। पार्टी की बैठकों और मीडिया ब्रीफिंग में उनकी अनुपस्थिति को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही। यहां तक कि दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को राहत मिलने के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे अटकलें और तेज हो गईं। हालांकि संसदीय मंच पर राघव चड्ढा पहले काफी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने गिग वर्कर्स के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों, पितृत्व अवकाश को कानूनी दर्जा देने, मिडिल क्लास पर टैक्स के बोझ और उपभोक्ता हितों से जुड़े कई मुद्दे उठाए थे। उनके इन बयानों को व्यापक समर्थन भी मिला था। इसके बावजूद पार्टी ने संसदीय नेतृत्व में बदलाव करते हुए उन्हें उपनेता पद से हटाने का निर्णय लिया है।

पद से हटने के बाद राघव चड्ढा ने कहा- “खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं”

पद से हटाए जाने के बाद 3 अप्रैल को राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे लगातार आम लोगों से जुड़े मुद्दे संसद में उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। उन्होंने मिडिल क्लास पर बढ़ते टैक्स, बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस पर जुर्माना, मोबाइल कंपनियों के 28 दिन वाले रिचार्ज, एयरपोर्ट पर महंगे खाने, हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी, प्रदूषण और पेपर लीक जैसे मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन विषयों को उठाने के कारण उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। चड्ढा ने अपने संदेश में लिखा, “खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।” साथ ही उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।” उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के प्रमुख युवा चेहरों में शामिल रहे हैं। राज्यसभा पहुंचने से पहले वे दिल्ली विधानसभा के सदस्य रहे और कई वित्तीय व प्रशासनिक मुद्दों पर मुखर रहे। अप्रैल 2022 में राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की अहम आवाज बने। अब उनकी जगह अशोक मित्तल को उपनेता बनाए जाने के प्रस्ताव के साथ पार्टी की संसदीय रणनीति में बदलाव का संकेत मिला है। पार्टी ने इस फैसले के पीछे औपचारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन इसे संगठनात्मक संतुलन और संसदीय नेतृत्व के पुनर्गठन से जोड़कर देखा जा रहा है।

संसद में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के उठाए गए मुख्य मुद्दे

गिग वर्कर्स का मुद्दा: ब्लिंकिट, जोमैटो और स्विगी जैसे डिलीवरी पार्टनर्स के कम वेतन, 10-मिनट डिलीवरी मॉडल और सामाजिक सुरक्षा की कमी। डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स: कॉपीराइट एक्ट 1957 में संशोधन की मांग की, ताकि शिक्षकों और इन्फ्लुएंसर्स को एल्गोरिदम और गलत ‘टेकडाउन’ से बचाया जा सके। खाद्य मिलावट: राज्यसभा में यूरिया और अन्य मिलावटों का मुद्दा उठाया। एयरपोर्ट पर सस्ता खाना: यात्रियों को सस्ता खाना मिले, इसके लिए सभी 150+ एयरपोर्ट्स के डिपार्चर एरिया में किफायती कैफे की मांग की। 28-दिन का रीचार्ज: मोबाइल रीचार्ज 28 दिन के बजाय पूरे कैलेंडर महीने (30 ये 31) का हो, बचा हुआ डेटा अगले महीने जुड़ जाए। बैंक पेनल्टी: मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव दिया। संयुक्त इनकम टैक्स फाइलिंग: विवाहित जोड़ों के लिए एक साथ इनकम टैक्स फाइलिंग का विकल्प दिया जाए।

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