रजत जयंती सत्र में उपलब्धियों पर भारी पड़ा “भ्रष्टाचार”

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उत्तराखंड विधानसभा का तीन दिवसीय विशेष सत्र रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसमें राज्य की 25 साल की उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर चर्चा का उद्देश्य था। लेकिन यह सत्र उपलब्धियों से अधिक भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी, पलायन, गैरसैंण और स्थायी राजधानी जैसे मुद्दों पर हावी रहा। सत्ता पक्ष ने इस सत्र को ऐतिहासिक और विकासोन्मुख बताते हुए राज्य की उपलब्धियों का बखान किया, तो वहीं विपक्ष ने सरकार के दावों को “झूठ का पुलिंदा” बताते हुए तीखा प्रहार किया। तीन दिनों तक चले इस विशेष सत्र में कुल 20 घंटे 23 मिनट तक सदन की कार्रवाई चली, जिसमें राज्य के निर्माण से अब तक की उपलब्धियों, चुनौतियों और जनता से जुड़े मुद्दों पर जोरदार बहस हुई। नोकझोंक, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे के बीच सत्र का समापन अनिश्चितकाल के लिए स्थगन के साथ हुआ। रजत जयंती के मौके पर जहां विकास का ब्योरा पेश होना था, वहीं भ्रष्टाचार की गूंज ने पूरे सदन का माहौल गरमा दिया। शंभू नाथ गौतम

उत्तराखंड विधानसभा का तीन दिवसीय विशेष सत्र रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था, लेकिन यह सत्र राज्य की 25 वर्षों की उपलब्धियों से अधिक भ्रष्टाचार, अफसरशाही और जनता की अनदेखी के आरोपों पर केंद्रित रहा। सदन के भीतर विपक्ष ने सरकार पर जमकर निशाना साधा, जबकि सत्ता पक्ष ने राज्य के विकास कार्यों का बखान करते हुए विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। विपक्ष ने जहां सरकार पर झूठे दावे और अधूरे वादों का आरोप लगाया, वहीं सत्ता पक्ष ने जवाब देते हुए कहा कि यह वही कांग्रेस है जिसने राज्य निर्माण के बाद 10 साल तक पहाड़ों को अंधेरे में रखा। आज भाजपा सरकार ने हर गांव तक सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा पहुंचाई है। विधानसभा के रजत जयंती विशेष सत्र का शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन से हुआ। अपने उद्बोधन में राष्ट्रपति ने उत्तराखंड की जनता, राज्य आंदोलनकारियों और विकास में योगदान देने वाले सभी नागरिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने 25 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। पर्वतीय राज्य होते हुए भी यहां के लोगों ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से चुनौतियों को अवसरों में बदला है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि राज्य की प्राकृतिक संपदा, जल और जंगल की संपत्ति न केवल उत्तराखंड की बल्कि पूरे देश की धरोहर है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इन संसाधनों का उपयोग पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता में रखते हुए किया जाए। उन्होंने उत्तराखंड को “देश की आध्यात्मिक और प्राकृतिक राजधानी” बताते हुए कहा कि देवभूमि का यह राज्य अपने सांस्कृतिक गौरव और पर्यावरणीय संतुलन दोनों को बनाए रखने में देश के लिए उदाहरण बन सकता है। कांग्रेस के उपनेता प्रतिपक्ष भुवन चंद कापड़ी ने सदन में कहा कि “राज्य में अफसरशाही इतनी हावी हो चुकी है कि विधायक तक बेबस हैं। अधिकारी विधायकों के फोन नहीं उठाते, जनता की शिकायतें नहीं सुनते, और सरकार आंख मूंदकर बैठी है।” उन्होंने कहा कि 25 साल बाद भी भ्रष्टाचार की जड़ें और गहरी हो गई हैं। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि “रजत जयंती पर सरकार को आत्ममंथन करना चाहिए था, लेकिन वह झूठे दावों का पुलिंदा पेश कर रही है। पलायन बढ़ा है, बेरोजगारी चरम पर है और भ्रष्टाचार ने जनता का विश्वास तोड़ा है।” निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने सीधे तौर पर कहा कि “राज्य में कमीशनखोरी का आलम यह है कि बिना प्रतिशत तय किए कोई काम नहीं होता। ठेकेदारों और अफसरों के गठजोड़ ने विकास की रफ्तार रोक दी है।” उन्होंने इसे “कमीशन राज्य” करार दिया। हरीश धामी ने अपने क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री के दौरे के बाद भी आदि कैलाश क्षेत्र में आज तक सीवर लाइन नहीं बिछी। सरकार सिर्फ दिखावे के विकास में लगी है।” पूर्व सीएम हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत ने कहा कि प्रदेश में कई लोग ऐसे हैं, जो भूमिहीन है। 2015-16 में भूमिहीनों को जमीन दी गई है लेकिन आज उनसे छीनने का काम हो रहा है। इसके बाद स्पीकर ऋतु खंडूरी ने सभी को टोकते हुए प्रीतम सिंह को बोलने का मौका दिया। इससे पहले चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि अग्निवीर योजना से नौजवान तनाव में है। नमामि गंगे में 26 हजार करोड़ खर्च किए गए। फिर भी हरकी पौड़ी में गंगा स्वच्छ क्यों नहीं। सुमित हृदयेश ने कहा कि “25 वर्षों में भी क्षेत्रीय असमानता खत्म नहीं हुई। पहाड़ के युवा अब भी पलायन के लिए मजबूर हैं। राज्य को सिर्फ भाषणों में नहीं, जमीनी हकीकत में आगे बढ़ाना होगा। सदन में कई बार माहौल गर्म हो गया, जिसके चलते विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने विधायकों को मर्यादा में रहने की नसीहत दी और कहा कि “जनता की समस्याओं पर चर्चा लोकतांत्रिक तरीके से होनी चाहिए, व्यक्तिगत आरोपों से नहीं। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य ने कृषि, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य में उल्लेखनीय प्रगति की है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से आज उत्तराखंड आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि “जिन लोगों ने राज्य को वर्षों तक लूटने का काम किया, आज वही लोग ईमानदारी पर सवाल उठा रहे हैं। भाजपा विधायक उमेश शर्मा ने कहा कि “आज हर गांव तक सड़क, बिजली और पानी पहुंचा है। सरकार ने योजनाओं को धरातल तक पहुंचाया है, और विपक्ष का आरोप वास्तविकता से दूर है। तीन दिनों तक चले इस विशेष सत्र में सदन की कार्यवाही करीब 20 घंटे 23 मिनट तक चली। हालांकि सत्र का उद्देश्य रजत जयंती वर्ष में राज्य की उपलब्धियों को रेखांकित करना था, परंतु बहस का केंद्र भ्रष्टाचार, अफसरशाही, बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दे बने रहे। सत्ता पक्ष ने इसे ऐतिहासिक और विकासोन्मुख” सत्र बताया, जबकि विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार का रिपोर्ट कार्ड करार दिया। अंततः सत्र अनिश्चित काल के लिए स्थगित हुआ, लेकिन बहस ने आने वाले राजनीतिक समीकरणों की झलक जरूर दिखा दी।

सत्र के दौरान पहाड़ बनाम मैदान’ और ‘राजधानी विवाद’ पर भी हुआ टकराव

उत्तराखंड विधानसभा के रजत जयंती विशेष सत्र में राज्य के 25 साल पूरे होने पर जब विकास की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की उम्मीद थी, तब बहस का रुख पहाड़ बनाम मैदान और राजधानी विवाद जैसे पुराने लेकिन संवेदनशील मुद्दों की ओर मुड़ गया। सत्र का तीसरा दिन इन मुद्दों पर आरोप-प्रत्यारोप और नोकझोंक से भरा रहा। कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ ने सवाल उठाया कि राज्य गठन को 25 साल बीत गए, लेकिन आज भी उत्तराखंड की स्थायी राजधानी को लेकर स्थिति साफ नहीं है। गैरसैंण को राजधानी घोषित करने का सपना आखिर अधूरा क्यों छोड़ा गया? क्या यह केवल एक चुनावी मुद्दा बनकर रह जाएगा? उन्होंने कहा कि पहाड़ों से पलायन लगातार बढ़ रहा है, और सरकारी दफ्तरों से लेकर बड़े फैसले तक मैदानों तक सीमित हो गए हैं। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि उत्तराखंड केवल पहाड़ या मैदान नहीं, बल्कि दोनों का संतुलित राज्य है। हमारी सरकार ने विकास को क्षेत्रीय सीमाओं में नहीं बांटा है, बल्कि हर जिले में समान रूप से काम किया है । चाहे वह कुमाऊं हो या गढ़वाल, तराई हो या पहाड़ी इलाका। इस दौरान दोनों विधायकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। विपक्ष ने सरकार पर पहाड़ों की उपेक्षा और मैदानों में विकास केंद्रित करने का आरोप लगाया, वहीं सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में ही पहाड़ों की उपेक्षा सबसे ज्यादा हुई थी। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण को कई बार बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने दोनों पक्षों से कहा राजधानी का प्रश्न राजनीति का नहीं, बल्कि सर्वसम्मति और जनभावना का विषय है। इस पर गंभीर और संयमित चर्चा होनी चाहिए। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सदन में कहा कि राज्य की रजत जयंती पर यह सत्र आत्ममंथन का अवसर होना चाहिए था । हमें सोचना चाहिए कि 25 वर्षों में हमने क्या पाया और क्या खोया। लेकिन अफसोस है कि सत्र केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। इस बयान पर सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि आज जो विकास की नींव राज्य में दिखाई दे रही है, वह भाजपा सरकार की नीतियों का परिणाम है। कांग्रेस ने अपने शासनकाल में उत्तराखंड को दिशा देने के बजाय उसे असमंजस में रखा। तीन दिन तक चले इस विशेष सत्र में पहाड़ों से पलायन, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अफसरशाही, पर्यटन, जलस्रोतों के दोहन और राज्य की राजधानी जैसे मुद्दों पर गरमागरम बहस होती रही। कई बार सदन में शोरगुल और तकरार के कारण कार्यवाही रोकनी भी पड़ी। अंततः सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया, लेकिन यह स्पष्ट हो गया कि राज्य की राजधानी का मुद्दा और पहाड़-मैदान का संतुलन आने वाले समय में भी उत्तराखंड की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बना रहेगा। सत्र भले समाप्त हो गया हो, पर बहस अभी बाकी है।

दुर्गम इलाकों के लिए बनेगा नया विकास मॉडल, धामी सरकार ने की कई घोषणाएं

उत्तराखंड विधानसभा का तीन दिवसीय विशेष सत्र भले ही हंगामेदार रहा हो, लेकिन सत्र के अंतिम दिन सरकार ने राज्य के भविष्य को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं। संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने सदन में ऐलान किया कि राज्य सरकार अब दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों के लिए एक “विशेष विकास मॉडल” तैयार करेगी, ताकि पहाड़ के अंतिम छोर तक योजनाओं का लाभ समान रूप से पहुंचे।
सुबोध उनियाल ने कहा कि पहाड़ी इलाकों में निर्माण और विकास कार्यों की लागत मैदानों की तुलना में कहीं अधिक होती है, इसलिए वहां के लिए अलग रणनीति और नीति जरूरी है। सरकार अब इन क्षेत्रों के लिए ऐसी योजनाएं तैयार करेगी जो स्थानीय संसाधनों, जनसंख्या घनत्व और भौगोलिक चुनौतियों के अनुरूप हों। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि विकास केवल देहरादून या हल्द्वानी तक सीमित न रहे, बल्कि मुनस्यारी से धारचूला और जोशीमठ से चकराता तक समान रूप से पहुंचे। उन्होंने सदन में यह भी घोषणा की कि संविदाकर्मियों की नियमितीकरण संबंधी नियमावली जल्द ही प्रस्तुत की जाएगी, ताकि लंबे समय से अस्थायी रूप से काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायित्व मिल सके। इसके अलावा सरकार ने नजूल भूमि पर बसे भूमिहीनों को मालिकाना हक देने के लिए कैबिनेट उपसमिति गठित करने की भी बात कही। सुबोध उनियाल ने कहा कि यह सत्र राज्यहित में होना चाहिए था, लेकिन कुछ बिंदुओं पर चर्चा राजनीति से प्रेरित रही। राज्य के सभी विधायक मूल निवासी हैं और उन्हें मिलकर राज्य निर्माण के अगले चरण का खाका तैयार करना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने तीन दिन की कार्यवाही के बाद सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। उन्होंने कहा कि यह सत्र भले ही विवादों से घिरा रहा हो, लेकिन राज्य की प्रगति पर विचार-विमर्श का यह एक महत्वपूर्ण अवसर था।

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