पैरेंट्स का हम पर भरोसा, एक सुखद अनुभूतिः डॉ. पंकज

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इंदिरा आईवीएफ देहरादून के एनआईसीयू में सलाहकार के पद पर कार्यरत डॉ पंकज राणा को अपनी मेडिकल ट्रेनिंग के दौरान बच्चों के साथ समय व्यतीत करना अच्छा लगता था, इसी वजह से उन्होंने बाल रोग विशेषज्ञ बनने का विकल्प चुना। उनके करियर को लेकर लोकेश राज अस्थाना की उनसे बातचीत हुई। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश

आपकी पारिवारिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में बताए
मैं एक बाल रोग विशेषज्ञ और नवजात शिशु विशेषज्ञ हूँ। वर्तमान में मैं इंदिरा आईवीएफ देहरादून के एनआईसीयू में सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं, जहाँ हम समय से पहले जन्मे और बीमार नवजात शिशुओं की देखभाल करते हैं। मेरे माता-पिता मूल रूप से देहरादून के निवासी हैं और मैंने वडोदरा,
गुजरात से एमडी बाल रोग की पढ़ाई पूरी की है।
चिकित्सा के क्षेत्र में कैसे आना हुआ, इसके पीछे किसकी प्रेरणा रही
मेरी माताजी श्रीमती विद्यावती राणा और पिताजी श्री जगमोहन सिंह राणा चाहते थे कि मैं डॉक्टर बनूँ। मुझे भी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाने के बजाए चिकित्सा में ज्यादा रूचि थी इसलिए मैंने चिकित्सा क्षेत्र को अपना करियर बनाने का फैसला किया। अपनी मेडिकल ट्रेनिंग के दौरान, मुझे छोटे बच्चों के साथ काम करना बहुत संतोषजनक और सुखद लगा, इसलिए मैंने बाल रोग विशेषज्ञ बनने का विकल्प चुना।
अपने प्रोफेशन सफर के बारे में बताए और इस दौरान आपकी क्या क्या उपलब्धियां रही
मैंने ईशा अस्पताल, वडोदरा से नवजात शिशु विज्ञान में फेलोशिप पूरी की। इसके बाद मैं आनंद. गुजरात में डॉ. नैना पटेल के प्रतिष्ठित आकांक्षा अस्पताल में काम करने चला गया। वहां से मैं देहरादून आया और डॉ. विपिन और हंस वैश सर के मेहर अस्पताल में काम किया। वहां दो साल काम करने के बाद मैंने इंदिरा आईवीएफ, देहरादून में ज्वाइन किया क्योंकि वे अपने अनमोल आईवीएफ शिशुओं के लिए अत्याधुनिक
एनआईसीयू शुरू कर रहे थे। चिकित्सा के क्षेत्र में आपका कोई यादगार अनुभव
मेरे पेशेवर जीवन में कई यादगार पल रहे हैं। हर बार जब हम समय से पहले जन्मे शिशुओं को उनके माता-पिता को सौंपते हैं. तो यह एक अद्भुत अनुभव होता है, खासकर तब जब माता-पिता अपना सारा भरोसा और उम्मीद हम पर टिका देते हैं। इंदिरा आईवीएफ में हर बच्चा कई वर्षों के दर्द और माता-पिता बनने की उम्मीद के बाद जन्म लेता है।
दिव्य हिमगिरि के पाठकों को क्या संदेश देना चाहेंगे
मैं अपने प्रिय पाठकों से कहना चाहूंगा कि इस आधुनिक व्यस्त जीवनशैली में अपने स्वास्थ्य के लिए समय निकालें, स्वस्थ भोजन करें, जंक फूड से बचें और नियमित रूप से व्यायाम करें।

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