ऑल्ट्स हेल्थकेयर, देहरादून के निदेशक डॉ. राहुल वाष्र्णेय स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और सिस्टम को मजबूत बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे है। दिव्य हिमगिरी के लिए लोकेश राज अस्थाना की डॉ. राहुल वाष्र्णेय से उनके प्रोफेशनल सफर और नेतृत्व दृष्टिकोण पर विस्तृत बातचीत हुई। पेश है बातचीत के अंश-
आप अपने बारे में बताएँ।
मैं एक एनेस्थेसियोलॉजिस्ट हूँ और लंबे समय से क्लिनिकल प्रैक्टिस से जुड़ा रहा हूँ। इसके साथ ही अस्पतालों की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता सुधार की दिशा में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा हूँ। वर्तमान में मैं ऑल्ट्स हेल्थकेयर, देहरादून में निदेशक के रूप में कार्यरत हूँ। ऑल्ट्स हेल्थकेयर महिलाओं और बच्चों की देखभाल के लिए एक उत्कृष्ट केंद्र है जहां प्रसूति, शिशु चिकित्सा एवं सर्जरी के साथ-साथ आईवीएफ, दूरबीन सर्जरी, हड्डी रोग, क्रिटिकल केयर और अन्य आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध है।
चिकित्सा क्षेत्र को आपने अपने करियर के रूप में क्यों चुना?
शुरूआत में ऐसा कोई स्पष्ट कारण नहीं था। मैंने इंजीनियरिंग और मैडिकल, दोनो परीक्षाएँ पास की थी और मन कहीं न कहीं इंजीनियरिंग की ओर झुक रहा था। लेकिन समय के साथ महसूस हुआ कि डॉक्टर बनने का अर्थ केवल एक पेशा नहीं बल्कि किसी के जीवन में उम्मीद बनकर खड़ा होना है। जब आप किसी व्यक्ति या परिवार को आश्वासन देते है तो वही आपको आगे बढ़ने की ताकत देता है। यही भावना मुझे इस रास्ते पर ले आई।
अपने प्रोफेशनल सफर के बारे में बताइए।
एमबीबीएस के बाद मैं भी कई छात्रों की तरह आगे के रास्ते को लेकर असमंजस में था क्योंकि मैडिकल के इस क्षेत्र में दिशा अक्सर रैंक और अवसरों पर निर्भर करती है। मैंने एनेस्थेसियोलॉजी को चुना। यह एक ऐसा विभाग है जो सामने तो कम दिखाई देता है लेकिन अस्पताल के हर महत्वपूर्ण कार्य में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। कार्य करते-करते समझ में आया कि इलाज के साथ-साथ अस्पताल के सिस्टम में भी सुधार की बहुत ज्यादा आवश्यकता होती है। इसी सोच ने मुझे हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन की ओर बढ़ाया। मेरे करियर का एक अहम मोड़ तब आया जब मुझे National Accreditation Board for Hospitals & Healthcare Providers (NABH) के साथ कार्य करने का अवसर मिला। वहाँ मैंने देखा कि सही सिस्टम और प्रक्रियाएँ ही अच्छे इलाज को लगातार संभव बनाती है। इस अनुभव ने मेरी सोच को पूरी तरह बदल दिया।
आप ऑल्ट्स हेल्थकेयर के निदेशक है, नेतृत्व को आप किस प्रकार परिभाषित करते है?
नेतृत्व केवल पद नहीं है। यह वह सफर है जहाँ लोग पहले आपको जिम्मेदारी के कारण मानते है, फिर विश्वास के कारण जुड़ते है और अंततः आपके काम के कारण आपका अनुसरण करते है। मेरे लिए नेतृत्व का सर्वोच्च स्तर वह है जहाँ आप खुद से ज्यादा दूसरों को आगे बढ़ाते है।
दिव्य हिमगिरी के पाठकों के लिए आपका संदेश
स्वास्थ्य को अक्सर हम तब तक नजरअंदाज करते है जब तक कोई समस्या सामने न आ जाए। अगर हम समय पर ध्यान दे. नियमित जांच कराएँ और सही जानकारी रखें तो कई परेशानियों से बचा जा सकता है। साथ ही हमारा प्रयास होना चाहिए कि अस्पतालों में ऐसा माहौल बने जहां मरीज को केवल इलाज ही नहीं बल्कि भरोसा और सम्मान भी मिले।






