विकसित उत्तराखंड 2047 के लिए शीर्ष अधिकारियों का “मंथन”

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विकसित उत्तराखंड 2047 की दिशा तय करने के लिए राज्य के शीर्ष अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार, सचिवालय देहरादून में रणनीतिक विमर्श के साथ शुरू हुआ। सम्मेलन में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, वित्त सचिव दिलीप जावलकर, सचिव पंकज पांडे, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, एलएल फैनई सहित नीति-निर्माण और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी एक मंच पर जुटे। राज्य की दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं, आर्थिक विस्तार की संभावनाओं, वित्तीय चुनौतियों और जिला-स्तरीय नवाचारों पर केंद्रित इस व्यापक मंथन में आगामी दो दशकों के लिए एक समन्वित, टिकाऊ और व्यवहारिक विकास मॉडल पर विस्तृत चर्चा की गई। सम्मेलन में जिलाधिकारियों द्वारा क्षेत्रीय चुनौतियों तथा उत्कृष्ट पहलों के प्रस्तुतीकरण ने भविष्य की नीति-निर्माण प्रक्रिया को जमीनी हकीकतों से जोड़ने का अवसर भी प्रदान किया। दिव्य हिमगिरि रिपोर्ट

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार, सचिवालय देहरादून में दो दिवसीय प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन में राज्य की दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। सरकार ने नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ प्रशासकों और जिलाधिकारियों को एक मंच पर लाकर विकसित उत्तराखंड 2047 के मार्ग को आगे बढ़ाने के लिए ठोस चर्चा की। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने इस सम्मेलन को प्रत्यक्ष संवाद और समन्वय का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए पर्यटन, बागवानी, स्वास्थ्य, वेलनेस तथा शहरी विकास को राज्य के प्रमुख विकास स्तंभों के रूप में रेखांकित किया और नियोजित व सतत शहरीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकसित उत्तराखंड 2047 तभी संभव होगा जब नीतियों में जमीनी आवश्यकताएं स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित हों। प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने विकसित उत्तराखंड 2047 की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 3.78 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2047 तक 28.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने उच्च-मूल्य कृषि, सेवा क्षेत्र विस्तार, डिजिटल सुविधा व गुणवत्ता, शिक्षा तथा स्वास्थ्य में मजबूत सुधार को भविष्य की अनिवार्य दिशा बताया। वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने अनुदानों की समाप्ति, राजस्व वृद्धि में मंदी और व्यय बढ़ने को प्रमुख चुनौतियां बताया तथा साक्ष्य आधारित नीति-निर्माण, यथार्थवादी अनुमान और विभागीय समन्वय की महत्ता पर बल दिया। सचिव पंकज पांडे ने बीते 25 वर्षों में संपर्क व्यवस्था सुधारों का उल्लेख करते हुए यातायात दबाव कम करने, मजबूत एवं लचीले बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक परिवहन के बेहतर समायोजन की आवश्यकता रखी। पर्यटन विभाग की अतिरिक्त सचिव ने शीतकालीन पर्यटन की अवधारणा प्रस्तुत कर चिन्हित मार्गों को प्रभावी बनाने हेतु नीतिगत अभिसरण को आवश्यक बताया। बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत, उधम सिंह नगर और हरिद्वार के जिलाधिकारियों ने औषधीय पौधों, सीमांत गाँवों के पुनर्जीवन, बागवानी संभावनाओं, आकांक्षी जिला पहल और कचरा प्रबंधन से जुड़ी उत्कृष्ट पहलें तथा चुनौतियां साझा कीं। मुख्य सचिव ने इन चुनौतियों के समाधान और त्वरित विकास के लिए संस्थागत ढांचे विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन का संचालन अपर सचिव नवनीत पांडे ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, एलएल फैनई सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर सम्मेलन आयोजित किया गया

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर सम्मेलन 2025 का दूसरा दिन भी नवाचार आधारित पहलों और जिला स्तर पर किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की समीक्षा के साथ आयोजित हुआ। अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, चमोली, नैनीताल और उत्तरकाशी के जिलाधिकारियों ने अपनी-अपनी सर्वोत्तम पहलों का प्रस्तुतिकरण किया, जिन पर उपस्थित अधिकारियों ने विस्तृत चर्चा की। जिलाधिकारी अल्मोड़ा ने खेल, स्वास्थ्य और वेलनेस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने और नई प्रतिभाओं को अवसर देने हेतु खेल एवं सामुदायिक फिटनेस केंद्र विकसित किए गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर सौ बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण और आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है। जिलाधिकारी पौड़ी ने पिरूल और अन्य आक्रामक वनस्पतियों से आजीविका सृजन पर अपने कार्यों का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के माध्यम से पिरूल से ऊर्जा उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिससे महिलाओं को नियमित आय मिल रही है और जंगलों में आग तथा जंगली जानवरों से होने वाली हानियाँ भी कम हो रही हैं। महिलाओं के सहयोग से अब तक लगभग 1800 टन हानिकारक वनस्पतियां हटाई गई हैं। जिलाधिकारी नैनीताल ने नगर क्षेत्र में सतत विकास और यातायात सुधार की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिस पर मुख्य सचिव ने सभी नगर निकायों को अपने-अपने क्षेत्रों का विकास मार्ग तैयार करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी देहरादून ने बाल भिक्षावृत्ति रोकथाम प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि ऐसे बच्चों के पढ़ने, खेल और कौशल विकास के लिए एक केंद्र स्थापित कर उन्हें भिक्षावृत्ति से बाहर लाने का प्रयास किया जा रहा है। नगर आयुक्त देहरादून ने नगर की समस्याओं के समाधान हेतु तैयार किए गए मॉडल की जानकारी दी। जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल ने युवाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास और सकारात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करने के प्रयासों का विवरण प्रस्तुत करते हुए युवा केंद्रित पाठ्यक्रम, गतिशीलता सहायता, कैरियर मार्गदर्शन केंद्र और लचीले कौशल पथ विकसित करने का प्रस्ताव रखा। जिलाधिकारी उत्तरकाशी ने धराली में आई आपदा से हुई क्षति और भविष्य में रोकथाम से जुड़ी कार्ययोजना का विवरण देते हुए पर्यावरण और आजीविका आधारित परियोजना का प्रस्तुतिकरण किया, जिसकी सराहना की गई। मुख्य सचिव ने खेल, हरित आजीविका और युवा सशक्तीकरण से जुड़े नवाचार मॉडल की प्रशंसा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिलों की श्रेष्ठ पहलों को आगे बढ़ाया जाए और भविष्य की योजनाओं को विकसित उत्तराखंड 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप तैयार किया जाए। सम्मेलन में प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, एल एल फैनई, आर. मीनाक्षी सुंदरम सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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