उत्तराखण्ड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि अर्जित करते हुए नई शिक्षा नीति 2020 एवं उल्लास (ULLAS – Understanding of Lifelong Learning for All in Society) – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। राज्य ने निर्धारित मानकों के अनुरूप वयस्क साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त कर शिक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ा है। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित साक्षरता के मानकों को पूर्ण किए जाने के पश्चात दिनांक 08 जुलाई 2026 को माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड द्वारा राज्य को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जाने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान की गई।
उत्तराखण्ड से पूर्व देश के पाँच राज्य— मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश तथा सिक्किम पूर्ण साक्षरता का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं। अब उत्तराखण्ड भी इस गौरवशाली सूची में शामिल होकर राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान स्थापित कर चुका है।
इस अवसर पर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा कहा गया कि, “प्रदेश का पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया जाना राज्य के लिए मील का पत्थर है। इस उपलब्धि के लिए सरकार द्वारा किए गए सतत प्रयासों के साथ ही प्रदेशवासियों की सक्रिय भागीदारी भी अहम रही है। इस प्रकार के सामूहिक प्रयासों से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी सफलता मिलेगी। साथ ही डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, सतत शिक्षा तथा जीवनोपयोगी कौशलों का प्रत्येक नागरिक तक पहुँचना सरकार की प्राथमिकता रहेगी। इस उपलब्धि पर मैं सभी प्रदेशवासियों को अपनी और सरकार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।”
राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित होने पर प्रदेश के माननीय शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत द्वारा कहा गया कि, “देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बनना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व का विषय है। हमारी सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सफलता विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।”
इसी क्रम में सचिव विद्यालयी शिक्षा विभाग श्री रविनाथ रमन द्वारा कहा गया कि, “पूर्ण साक्षरता सामाजिक एवं आर्थिक विकास की आधारशिला है। उल्लास कार्यक्रम के माध्यम से समाज के प्रत्येक नागरिक तक शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित की गई है, जिसके प्रयासों से राज्य पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य को प्राप्त कर पाया है।”
महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा श्रीमती आकांक्षा कोंडे द्वारा कहा गया कि, “यह उपलब्धि राज्य के सभी जनपदों, विकासखण्डों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों तथा समुदाय के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। हमारा प्रयास रहेगा कि शिक्षा के गुणात्मक एवं आजीवन अधिगम के अवसरों का और अधिक विस्तार किया जाए।”
निदेशक, प्रारम्भिक शिक्षा, उत्तराखण्ड श्री मुकुल कुमार सती द्वारा कहा गया कि, “राज्य द्वारा भारत सरकार के निर्धारित मानकों को पूर्ण करते हुए पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त किया है। भविष्य में भी डिजिटल शिक्षा और जीवनोपयोगी कौशलों पर कार्य जारी रहेगा।”
यह उपलब्धि उत्तराखण्ड सरकार, विद्यालयी शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा, जिला प्रशासन, स्वयंसेवी शिक्षकों, शिक्षा प्रेरकों, स्थानीय निकायों तथा जनसामान्य के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। राज्य के सभी जनपदों में व्यापक जनभागीदारी, नियमित अनुश्रवण तथा प्रभावी कार्ययोजना के माध्यम से उल्लास कार्यक्रम को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें आजीवन शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, जीवनोपयोगी कौशल तथा सतत अधिगम से जोड़ना भी है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और विकसित भारत के निर्माण में उत्तराखण्ड की सक्रिय भागीदारी को भी दर्शाती है।
इस अवसर पर समस्त शिक्षा निदेशालयों, एससीईआरटी, समग्र शिक्षा एवं नवभारत साक्षरता कार्यक्रम प्रकोष्ठ द्वारा राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित किए जाने पर हर्ष व्यक्त किया गया।


