Saturday, October 10, 2026
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संस्कृत को मिलेगा FTII के पाठ्यक्रम में स्थान? उत्तराखंड सरकार की पुणे में बड़ी पहल

उत्तराखंड सरकार में संस्कृत शिक्षा सचिव, दीपक कुमार ने पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (FTII) – जिसे ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा प्राप्त है – और भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (BORI) का किया दौरा.

बैठक में FTII, पुणे के वाइस-चांसलर प्रो. धीरज सिंह के साथ संस्थान के प्रो. प्रतीक जैन, प्रो. संतोष ओझा और प्रो. मिलिंद दामले भी मौजूद थे।

हालांकि FTII एक्टिंग और फिल्ममेकिंग के क्षेत्र में एक बेहतरीन संस्थान है, लेकिन अभी इसके पाठ्यक्रम में संस्कृत को एक विषय के तौर पर शामिल नहीं किया गया है।

बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि नाट्यशास्त्र जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों पर आधारित अनुवादित अध्ययन सामग्री को एक या दो लेक्चर सेशन के ज़रिए पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।

वाइस-चांसलर ने संस्कृत पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए डेक्कन कॉलेज और उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई।

उत्तराखंड यूनिवर्सिटी/संस्थानम के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) करने और भविष्य में संस्कृत से जुड़े काम करने की भी योजना है।

उसके उपरांत भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (BORI), पुणे – जो अपने आप में एक ऐतिहासिक संस्थान है – के रजिस्ट्रार डॉ. श्रीनंद बापट ने संस्थान का परिचय दिया और इसके 28,000 पांडुलिपियों (मैन्युस्क्रिप्ट्स) के समृद्ध संग्रह के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि 22,000 पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।
मंत्र चिकित्सा और प्रज्ञाचक्षु (दृष्टि-बाधित लोगों के लिए शिक्षा और सहायता) जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

बैठक में ‘तीर्थावली’ और भारत रत्न महामहोपाध्याय डॉ. पी. वी. काणे द्वारा लिखित ‘धर्मशास्त्र का इतिहास’ (History of Dharmashastra) पर भी चर्चा की गई।

इन्फोसिस फाउंडेशन द्वारा फंड किए गए रिसर्च प्रोजेक्ट्स का भी ब्यौरा दिया गया।

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