उत्तरकाशी जिले के रवांई (रवांल्टा) एवं टिहरी जिले के जौनपुरी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने तथा दोनों क्षेत्रों को संविधान की 5वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर क्षेत्र में पुनः स्वर मुखर होने लगे हैं। इसी क्रम में मोरी क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता किशन रावत ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर अविलंब ठोस कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में रवांई घाटी की ऐतिहासिक एवं संघर्षशील पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए तिलाड़ी कांड (30 मई 1930) का प्रमुखता से हवाला दिया गया। ऐतिहासिक रूप से रवांई क्षेत्र जल, जंगल और जमीन के अपने पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए अग्रणी रहा है, जहाँ तिलाड़ी के शहीदों ने अपने अधिकारों की रक्षा हेतु सर्वोच्च बलिदान दिया था। ज्ञापन में कहा गया कि जिस जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए तिलाड़ी का आंदोलन हुआ, उस ऐतिहासिक विरासत की रक्षा के लिए आज रवांई और जौनपुर को संवैधानिक संरक्षण मिलना अत्यंत आवश्यक है।
प्रमुख बिंदु एवं मांगें:
ऐतिहासिक उपेक्षा: वर्ष 1967 के दशक में पड़ोसी क्षेत्र जौनसार-बाबर के साथ ही रवांई और जौनपुर को भी एसटी का दर्जा दिए जाने की मांग उठी थी। हालांकि, प्रभावी प्रतिनिधित्व की कमी के कारण समान रीति-रिवाज, संस्कृति और रहन-सहन होने के बावजूद रवांई और जौनपुरी समुदाय को इस अधिकार से वंचित रख दिया गया।
सांस्कृतिक एवं सामाजिक समानता: जौनसार-बाबर की तरह रवांई और जौनपुर की लोक संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाज, त्योहार, महासू देवता व चालदा महाराज में अटूट आस्था तथा सामाजिक ताना-बाना पूरी तरह जनजातीय विशेषताओं से परिपूर्ण है।
विकास की मुख्यधारा से दूरी: समान सांस्कृतिक भौगोलिक परिस्थितियां होने के बाद भी संवैधानिक अधिकार न मिलने के कारण यह क्षेत्र आज भी शिक्षा, रोजगार और विकास की मुख्यधारा में पिछड़ा हुआ है।
संवैधानिक संरक्षण: केंद्र सरकार से मांग की गई है कि रवांई और जौनपुरी समुदाय की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को स्वीकारते हुए उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया जाए तथा 5वीं अनुसूची के तहत क्षेत्र के जल, जंगल, जमीन और पारंपरिक अधिकारों को विशेष संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार रवांई के ऐतिहासिक जनांदोलनों और तिलाड़ी के शहीदों की भावना का सम्मान करते हुए इस छह दशक पुरानी लंबित मांग पर शीघ्र न्यायपूर्ण निर्णय लेगी।





