उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर ‘स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति’ के बैनर तले चल रहा क्रमिक अनशन आज 100वें दिन में प्रवेश कर गया। इस निर्णायक अवसर पर आंदोलनकारियों ने सरकार की “बहरापन” पर प्रहार करते हुए हवन-पूजन और नाटकीय प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का विवरण:
1. हवन-पूजन: सुबह आंदोलनकारियों ने देश व प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व की सद्बुद्धि जागृत करने और गैरसैंण को अविलंब स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग के साथ यज्ञ में आहुति दी।
2. प्रदर्शन: इसके बाद “भैंस के आगे बीन बजाई” – आंदोलनकारियों का कहना है कि सत्ता पहाड़ की जनता के आंसू और 100 दिन के अनशन के प्रति असंवेदनशील हो चुकी है।
3. राजनीतिक नाटक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मंत्री सतपाल महाराज व विधायकों के मुखौटे लगाकर आंदोलनकारियों ने सत्ता के दोहरे रवैये पर करारा तंज कसा। उनका आरोप है कि नेता मंचों से “जय पहाड़” का नारा लगाते हैं, पर स्वयं दिल्ली देहरादून के वातानुकूलित दफ्तरों में रहते हैं।
आंदोलनकारियों का बयान:
“डी ए वी छात्रसंघ के पूर्व महासचिव सचिन ने कहा की राज्य गठन के इतने वर्षों बाद भी गैरसैंण को अधिकार न मिलना इन्हीं नेताओं की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। समिति के संरक्षक विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा की जब तक गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं मिलता, यह आंदोलन रुकेगा नहीं। सरकार के दमनकारी रवैये का जवाब ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा।”
उपस्थित प्रमुख लोग:
अनशनकारी सचिन थपलियाल, गोपाल दत्त कुमेड़ी, पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी, ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल, पार्थ रतूड़ी, मनमोहन शर्मा, शैलेंद्र शेखर करगेती, कुलदीप अग्रवाल, रामेश्वर शर्मा, दौलत राम शाह, सत्य प्रकाश कोठियाल संतोष राणा भास्कर रावत सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति व वरिष्ठ आंदोलनकारी उपस्थित थे


