देवभूमि में कश्मीरी फेरीवालों से मारपीट से सवालों के घेरे में समाज

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देवभूमि उत्तराखंड में कश्मीरी फेरी वालों के साथ हुई मारपीट की घटना ने एक बार फिर समाज के सामने गंभीर और असहज करने वाले सवाल खड़े कर दिए हैं। रोज़ी-रोटी की तलाश में देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में आए युवकों से नाम, धर्म और क्षेत्रीय पहचान पूछकर की गई हिंसा न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाती है, बल्कि उस सामाजिक ताने-बाने को भी झकझोरती है, जिस पर उत्तराखंड की शांति और सहअस्तित्व की परंपरा टिकी रही है। यह घटना बताती है कि किस तरह अफवाह, नफरत और भय का माहौल आम नागरिकों के व्यवहार को प्रभावित कर रहा है। जब बाजार, जो आपसी मेल-मिलाप का प्रतीक होता है, वहां इंसान की पहचान उसके नाम और धर्म से तय होने लगे, तो यह पूरे समाज के लिए चेतावनी है। कश्मीरी फेरी वालों के साथ हुई मारपीट सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सामाजिक सोच के उस संकट की तस्वीर है, जिस पर समय रहते मंथन और ठोस कार्रवाई जरूरी हो गई है। दिव्य हिमगिरि रिपोर्ट

देवभूमि उत्तराखंड, जिसे सदियों से शांति, सहिष्णुता और अतिथि सत्कार की परंपरा के लिए जाना जाता है, वहां कश्मीरी फेरी वालों के साथ सामने आ रही मारपीट की घटनाएं समाज की संस्कृत छवि पर सवाल खड़े कर रही हैं। ताजा मामला देहरादून जिले के विकासनगर क्षेत्र से सामने आया है, जहां दो कश्मीरी मुस्लिम युवकों के साथ कथित तौर पर धार्मिक पहचान के आधार पर मारपीट की गई। इस घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया। जानकारी के मुताबिक, दोनों युवक फेरी लगाकर शॉल बेचने का काम करते हैं और रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने के लिए विकासनगर बाजार के डाक पत्थर रोड स्थित एक दुकान पर गए थे। आरोप है कि सामान खरीदते समय दुकानदार ने उनसे पहले नाम और धर्म के बारे में पूछा। युवक ने अपना नाम दानिश बताया और मुस्लिम होने की बात कही। इसके बाद जब उनसे उनके मूल स्थान के बारे में सवाल किया गया और उन्होंने कश्मीर से आने की जानकारी दी, तो दुकानदार ने कथित तौर पर आपत्तिजनक धार्मिक और जातिगत टिप्पणियां शुरू कर दीं। पीड़ित युवकों का आरोप है कि बात यहीं नहीं रुकी। दुकानदार ने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और फिर अपने साथियों के साथ मिलकर दोनों युवकों पर हमला कर दिया। इस मारपीट में दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की खबर फैलते ही इलाके का माहौल गरमा गया। समुदाय विशेष के लोग मौके पर एकत्र हुए और घायल कश्मीरी युवकों को गोद में उठाकर नारेबाजी करते हुए पुलिस चौकी पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस द्वारा निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद लोगों ने संयम बरतते हुए शांति बनाए रखी और कानून पर भरोसा जताया। हमले में घायल युवक दानिश ने बताया कि वह दुकान पर नमकीन खरीदने गया था। खरीदारी के बाद उससे नाम, धर्म और कश्मीर से होने को लेकर सवाल किए गए और फिर अचानक मारपीट शुरू हो गई। पीड़ितों के रिश्तेदार अब्दुल राशिद मीर ने बताया कि वे लोग हर साल रोजगार के सिलसिले में उत्तराखंड आते हैं और मार्च तक यहां रहते हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वयं 2008 से यहां काम के लिए आते रहे हैं, जबकि ये युवक हाल ही में पहुंचे थे। उनका आरोप है कि धर्म के नाम पर युवकों को निशाना बनाया गया, जिसमें एक का सिर फट गया और दूसरे की बाजू में फ्रैक्चर हो गया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, वे यहां से नहीं जाएंगे। पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मुस्लिम सेवा संगठन से जुड़े कार्यकर्ता मोहम्मद इमरान ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में लगातार धर्म के आधार पर मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है और कश्मीर से आए युवकों पर जानलेवा हमला इसी का उदाहरण है। मामले पर जानकारी देते हुए विकासनगर कोतवाली के वरिष्ठ उपनिरीक्षक शीशुपाल राणा ने बताया कि दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसमें एक पक्ष की तहरीर प्राप्त हुई है और उसी के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने आरोपी संजय यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि कश्मीरी फेरी वालों और दुकानदार के बीच कहासुनी के बाद मारपीट हुई थी। घायलों को गंभीर चोटें आई हैं और डॉक्टर की रिपोर्ट आने के बाद मामले में अन्य धाराएं भी जोड़ी जाएंगी। देवभूमि की पहचान हमेशा से अच्छे व्यवहार, आपसी सम्मान और मानवता की रही है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि समाज को आत्ममंथन करने का अवसर भी देती हैं कि नफरत और पूर्वाग्रह के लिए यहां कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

उमर अब्दुल्ला ने जताई नाराजगी, सीएम धामी से फोन पर की कड़ी कार्रवाई की मांग

देश के अलग-अलग हिस्सों में कश्मीरी शॉल विक्रेताओं पर हो रहे हमलों को लेकर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कड़ा रुख अपनाया। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सामने आए ताजा मामलों पर गहरी नाराजगी जताते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कश्मीरियों को निशाना बनाना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है और ऐसी घटनाओं पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। उमर अब्दुल्ला ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्होंने उत्तराखंड में एक युवा कश्मीरी शॉल विक्रेता पर हुए हमले का जिक्र करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि रोजी-रोटी के लिए देश के विभिन्न राज्यों में जाने वाले कश्मीरी युवकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक पोस्ट में बताया गया कि उमर अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री धामी से इस घटना को लेकर विस्तार से चर्चा की और एफआईआर दर्ज करने सहित कठोर कदम उठाने का आग्रह किया। पोस्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है और कहा है कि दोषियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि उत्तराखंड में रह रहे जम्मू-कश्मीर के निवासियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर अपनी चिंता और भी स्पष्ट शब्दों में जाहिर की। उन्होंने लिखा कि जब देश के अन्य हिस्सों में कश्मीरी लोग भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हों, तो यह कहना मुश्किल हो जाता है कि जम्मू-कश्मीर वास्तव में भारत का अभिन्न अंग है। उन्होंने दो टूक कहा कि जहां भी कश्मीरियों के साथ अन्याय होगा, वहां उनकी सरकार हस्तक्षेप करेगी और उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी। उमर अब्दुल्ला का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में कश्मीरी शॉल विक्रेताओं के साथ मारपीट और बदसलूकी की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं ने न केवल कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि देश की सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे पर भी चिंता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री का सख्त रुख यह संकेत देता है कि इस मुद्दे को अब केवल स्थानीय घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जाएगा।

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