26 जनवरी को जब तिरंगा उत्तराखंड की वादियों और मैदानों में एक साथ लहराएगा, तब यह केवल संविधान के सम्मान का दिन नहीं होगा, बल्कि धामी सरकार के नेतृत्व में आगे बढ़ रहे राज्य की विकास यात्रा का सजीव प्रदर्शन भी होगा। गणतंत्र दिवस 2026 को उत्तराखंड में राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक गौरव और विकास के संकल्प के साथ मनाने की व्यापक तैयारी की गई है। राजधानी देहरादून से लेकर सीमांत जिलों तक परेड, झांकियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल आयोजन और जनभागीदारी आधारित गतिविधियों के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि उत्तराखंड न केवल अपनी परंपराओं पर गर्व करता है, बल्कि भविष्य की ओर भी पूरे आत्मविश्वास के साथ अग्रसर है। परेड ग्राउंड देहरादून में होने वाले मुख्य समारोह में ध्वजारोहण, परेड और सम्मान समारोह के साथ राज्य की उपलब्धियों और योजनाओं की झलक दिखाई देगी, जबकि विकास आधारित झांकियों में आत्मनिर्भर उत्तराखंड, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के रोजगार, पर्यटन, कृषि और तकनीक आधारित शासन के प्रयासों को प्रस्तुत किया जाएगा। दिव्य हिमगिरि रिपोर्ट
26 जनवरी 2026 को उत्तराखंड में गणतंत्र दिवस केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राज्य की विकास यात्रा, सांस्कृतिक विरासत और भविष्य के संकल्प को भी प्रदर्शित करेगा। धामी सरकार इस बार गणतंत्र दिवस को विशेष रूप से विकास, जनभागीदारी और युवा ऊर्जा के संदेश के साथ मनाने जा रही है। राज्यभर में प्रशासनिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों की व्यापक तैयारी की गई है, ताकि हर वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित हो सके। राजधानी देहरादून में गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह परेड ग्राउंड में आयोजित होगा, जहां सुबह ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और सम्मान समारोह संपन्न होंगे। इस दौरान पुलिस, होमगार्ड, एनसीसी, स्काउट-गाइड और छात्र-छात्राओं की परेड के माध्यम से अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का प्रदर्शन किया जाएगा। परेड के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, वेशभूषा और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। गणतंत्र दिवस के अवसर पर राज्य की विकास यात्रा को दर्शाने वाली झांकियां और प्रदर्शनियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इनमें आत्मनिर्भर उत्तराखंड की अवधारणा, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, पर्यटन, कृषि, शिक्षा और तकनीक आधारित योजनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही उत्तराखंड की झांकी को राष्ट्रीय स्तर पर नई दिल्ली के लाल किले में आयोजित भारत पर्व में भी प्रदर्शित किया जा रहा है, जिससे राज्य की पहचान देशभर में पहुंचेगी। देहरादून समेत अन्य जिलों में सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से आम नागरिकों को गणतंत्र दिवस से जोड़ा जा रहा है। बच्चों और युवाओं के लिए देशभक्ति प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लोकगीत-नृत्य और सामाजिक आयोजनों का आयोजन किया गया है। इसके अलावा गणतंत्र दिवस रन जैसे खेल आयोजनों के माध्यम से फिट इंडिया और एकता का संदेश दिया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में युवा और नागरिक भाग लेंगे। शैक्षणिक संस्थानों में संविधान, लोकतंत्र और नागरिक कर्तव्यों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिससे नई पीढ़ी में राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़े। वहीं सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक स्थलों और प्रमुख मार्गों को तिरंगे और रोशनी से सजाया गया है, जिससे पूरे राज्य में उत्सव का माहौल बने। इस तरह गणतंत्र दिवस 2026 उत्तराखंड में केवल राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि विकास, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों के सामूहिक उत्सव के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें राज्य की उपलब्धियों के साथ भविष्य की दिशा भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगी।
गणतंत्र दिवस की तैयारियों को लेकर जारी किए दिशा-निर्देश
देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में गणतंत्र दिवस को पूरे जोश, उत्साह और राष्ट्रीय गर्व के साथ मनाने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। तिरंगे की शान, राष्ट्रगान की गूंज और देशभक्ति के रंग में रंगी राजधानी 26 जनवरी को लोकतंत्र के महापर्व का साक्षी बनेगी। गणतंत्र दिवस को गरिमापूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। इसी क्रम में गणतंत्र दिवस की तैयारियों को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी सविन बंसल ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रह जाए और सभी व्यवस्थाएं समय से पहले पूरी कर ली जाएं। जिलाधिकारी ने बताया कि 26 जनवरी को सुबह 9:30 बजे जनपद के सभी शासकीय कार्यालयों में ध्वजारोहण किया जाएगा। राजधानी का मुख्य समारोह परेड ग्राउंड में आयोजित होगा, जहां राज्यपाल द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा। इस अवसर पर परेड, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सम्मान समारोह भी आयोजित किए जाएंगे। मुख्य कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर लोक निर्माण विभाग को मंच निर्माण, बैरिकेडिंग और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। विद्युत विभाग को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा पेयजल विभाग को कार्यक्रम स्थल पर स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था करने को कहा गया है। नगर निगम को परेड ग्राउंड और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई एवं स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिलाधिकारी ने मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण को शहर के प्रमुख स्थलों और शासकीय भवनों पर सौंदर्यीकरण और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। संस्कृति विभाग को शहीद स्थल पर विशेष सफाई और प्रकाश व्यवस्था कराने के साथ-साथ देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रमों की तैयारी करने को कहा गया है। इसके अलावा सूचना, वन, ग्राम्य विकास, पर्यटन, शिक्षा, ऊर्जा, उरेडा, बाल विकास, कृषि, स्वास्थ्य सहित विभिन्न विभागों को झांकी प्रदर्शन से जुड़ी तैयारियों में सक्रिय भागीदारी निभाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उत्तराखंड की विकास यात्रा और सांस्कृतिक पहचान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके। डीएम ने मुख्य कार्यक्रम स्थल पर प्रोटोकॉल के अनुरूप अतिथियों के बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी उपजिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और उनके आश्रितों का सम्मान सुनिश्चित करने को कहा गया है, जिससे राष्ट्र के लिए त्याग और बलिदान देने वाले महान व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जा सके। गणतंत्र दिवस के उत्सव को और भव्य बनाने के लिए 25 और 26 जनवरी को शहर के सभी प्रमुख चौक-चौराहों और शासकीय भवनों पर विशेष प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। 25 जनवरी को शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक तथा 26 जनवरी को सुबह 6 बजे से 11 बजे तक प्रमुख चौक-चौराहों पर देशभक्ति गीतों का प्रसारण किया जाएगा, जिससे पूरे शहर में राष्ट्रप्रेम का वातावरण बने। इसके साथ ही 26 जनवरी को नगर निगम के टाउनहॉल में संस्कृति विभाग द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभक्ति, लोकतंत्र और उत्तराखंड की संस्कृति पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत की जाएंगी। इस प्रकार देवभूमि देहरादून में गणतंत्र दिवस का पर्व उत्साह, उमंग और राष्ट्रभक्ति के संदेश के साथ मनाया जाएगा, जहां अनुशासन, संस्कृति और विकास की झलक एक साथ देखने को मिलेगी।
लाल किले पर प्रदर्शित होगी “आत्मनिर्भर उत्तराखंड” की झांकी
हिमालय की गोद में बसती देवभूमि उत्तराखंड एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और आत्मनिर्भरता का गौरव देश की राजधानी दिल्ली में प्रस्तुत करने जा रही है। राष्ट्र की एकता और विविधता का उत्सव माने जाने वाले भारत पर्व में इस बार उत्तराखंड की झांकी राज्य की विकास यात्रा के साथ-साथ उसकी आत्मनिर्भर पहचान को सजीव रूप में सामने लाएगी। तांबे की शिल्पकला, पारंपरिक वाद्य यंत्र और कारीगरों की मेहनत के जरिए झांकी उत्तराखंड की उस आत्मा को दर्शाएगी, जो सदियों से श्रम, कौशल और संस्कृति के सहारे आगे बढ़ती रही है। भारत पर्व के अवसर पर नई दिल्ली में आत्मनिर्भर उत्तराखंड की यह झांकी प्रदर्शित की जाएगी। सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक एवं झांकी के नोडल अधिकारी केएस चौहान ने बताया कि झांकी राज्य की सांस्कृतिक, आर्थिक और पारंपरिक आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि इस झांकी के माध्यम से उत्तराखंड के शिल्पी समुदाय, उनकी कारीगरी और आजीविका से जुड़ी परंपराओं को देश के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। नोडल अधिकारी के अनुसार भारत पर्व के आयोजन के दौरान 26 से 31 जनवरी तक दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में उत्तराखंड की विकास यात्रा के दर्शन किए जा सकेंगे। झांकी का ट्रेलर भाग पारंपरिक वाद्य यंत्र ढोल और रणसिंघा की आकर्षक तांबे की प्रतिकृतियों से सुसज्जित है, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शिल्पकारों की कलात्मक दक्षता का प्रतीक हैं। ट्रेलर के पहले हिस्से में तांबे के मंजीरे की एक विशाल मूर्ति दर्शायी गई है, जो तांबे की कला की बारीकियों और उसकी ऐतिहासिक महत्ता को उजागर करती है। झांकी का मध्य भाग खूबसूरती से निर्मित तांबे के बर्तनों जैसे गागर, सुरही और कुंडी को प्रदर्शित करता है। ये बर्तन उत्तराखंड के पारंपरिक घरेलू जीवन का अहम हिस्सा रहे हैं। इसी भाग के नीचे साइड पैनलों पर पारंपरिक वाद्य यंत्र भोंकोर के चित्र उकेरे गए हैं, जो झांकी की सांस्कृतिक कथा को और अधिक जीवंत बनाते हैं। झांकी के अंतिम हिस्से में तांबे के कारीगर की एक सजीव और प्रभावशाली मूर्ति लगाई गई है, जिसमें वह हाथ से तांबे के बर्तन बनाते हुए दिखाई देता है। कारीगर के चारों ओर सजे तांबे के बर्तन पीढ़ियों से चले आ रहे ज्ञान, कौशल और श्रम की गरिमा को दर्शाते हैं। यह दृश्य न केवल शिल्पकारों के परिश्रम को सम्मान देता है, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तराखंड की सोच को भी मजबूती से सामने रखता है। यह झांकी उत्तराखंड के शिल्पी समुदाय की कारीगरी, सांस्कृतिक योगदान, आर्थिक आत्मनिर्भरता, आजीविका, कौशल और परंपरा का समग्र चित्र प्रस्तुत करती है। तांबे की प्राचीन शिल्प कला के माध्यम से झांकी यह संदेश देती है कि परंपरा और आधुनिकता के संतुलन से ही सशक्त और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण संभव है। स्थानीय कारीगरों द्वारा पारंपरिक तकनीकों से बनाए गए तांबे के बर्तन और उपकरण न केवल उत्कृष्ट शिल्प कौशल का उदाहरण हैं, बल्कि राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में भी इनका विशेष स्थान रहा है। केएस चौहान ने बताया कि रक्षा मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय रंगशाला शिविर, नई दिल्ली में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान विभिन्न प्रदेशों और मंत्रालयों की झांकियों की झलक प्रेस के सामने प्रस्तुत की गई, जिसमें आत्मनिर्भर उत्तराखंड की झांकी ने अपनी अनूठी सांस्कृतिक पहचान से विशेष ध्यान आकर्षित किया।






