वर्षों से समान काम के बदले कम वेतन और असुरक्षित भविष्य की पीड़ा झेल रहे उपनल कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए ऐतिहासिक फैसले ने हजारों उपनल कर्मियों की उम्मीदों को नई उड़ान दी है। धामी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में वर्ष 2015 से पहले से लगातार सेवाएं दे रहे उपनल कर्मचारियों को अब समान कार्य के बदले समान वेतन का लाभ मिलेगा। इस निर्णय से न केवल लंबे समय से चले आ रहे असंतोष का समाधान होगा, बल्कि उपनल कर्मियों के मन में यह भरोसा भी मजबूत होगा कि सरकार उनकी मेहनत और योगदान को गंभीरता से समझती है।
कैबिनेट का यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं है, जिन्होंने वर्षों तक विभागों में अपनी सेवाएं दीं, लेकिन वेतन और सुविधाओं के मामले में पीछे रह गए। पहले जहां यह लाभ 12 वर्ष की सेवा पूरी करने वालों को देने का निर्णय था, वहीं धामी सरकार ने उपनल कर्मियों के हित में इसे घटाकर 10 वर्ष कर दिया। धामी सरकार के इस फैसले से करीब सात से आठ हजार उपनल कर्मचारियों को जल्द लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ है। दिव्य हिमगिरि रिपोर्ट।
उत्तराखंड में वर्षों से उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे हजारों कर्मचारियों के लिए आखिरकार राहत की बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उपनल कर्मियों के हित में एक अहम और दूरगामी फैसला लिया गया है। इस निर्णय के तहत वर्ष 2015 से पहले से लगातार सेवाएं दे रहे उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के बदले समान वेतन दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले से लंबे समय से वेतन असमानता और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहे कर्मचारियों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही है। अब तक उपनल कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग यही रही है कि उन्हें उनके कार्य के अनुरूप सम्मानजनक वेतन मिले। कई कर्मचारी एक ही विभाग में वर्षों से नियमित कर्मचारियों के समान जिम्मेदारियां निभा रहे थे, लेकिन वेतन और सुविधाओं में बड़ा अंतर बना हुआ था। इस असमानता को दूर करने के लिए धामी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट ने पहले वर्ष 2025 में 12 वर्ष की सेवा पूरी करने वालों को यह लाभ देने का निर्णय लिया था, लेकिन कर्मचारियों की भावनाओं और जमीनी हालात को देखते हुए इसे घटाकर 10 वर्ष कर दिया गया है। इससे अधिक संख्या में उपनल कर्मियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगौली ने बताया कि समान कार्य समान वेतन का लाभ चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा। पहले चरण में प्रदेश के विभिन्न विभागों में वे सभी उपनल कर्मी शामिल होंगे, जो वर्ष 2015 या उससे पहले से लगातार सेवाएं दे रहे हैं और जिनकी 10 वर्ष की सेवा 2025 में पूरी हो रही है। सभी संबंधित विभाग इन कर्मियों के साथ अलग-अलग अनुबंध करेंगे और इसकी प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि इस फैसले का लाभ समय पर कर्मचारियों तक पहुंचे और किसी तरह की अनावश्यक देरी न हो। धामी सरकार के इस फैसले से करीब सात से आठ हजार उपनल कर्मियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। ये वे कर्मचारी हैं, जिन्होंने लंबे समय तक सीमित संसाधनों और कम वेतन में भी सरकारी तंत्र को सुचारु रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाई है। विभागों में लिपिकीय कार्य, तकनीकी सहायता, कार्यालय संचालन और फील्ड स्तर के कई कार्य उपनल कर्मियों के भरोसे ही चलते रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा उनकी सेवाओं को मान्यता देना और उन्हें आर्थिक राहत देना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कैबिनेट बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि भविष्य में उपनल के माध्यम से केवल पूर्व सैनिकों और उनके स्वजनों को ही रोजगार दिया जाएगा। अन्य श्रेणी के कर्मचारियों के लिए अलग एजेंसी के चयन की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और विभिन्न वर्गों के लिए स्पष्ट नीति तय होगी। साथ ही इससे उपनल की मूल भावना को भी मजबूती मिलेगी, जो पूर्व सैनिकों के पुनर्वास से जुड़ी रही है। उपनल कर्मचारियों के संगठनों ने धामी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय वर्षों से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उन्हें सामाजिक सम्मान और कार्यस्थल पर स्थिरता भी मिलेगी। कई कर्मचारियों ने इसे सरकार की संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच का परिणाम बताया है। उपनल कर्मियों को समान कार्य समान वेतन देने का यह फैसला धामी सरकार की कर्मचारी हितैषी नीति को दर्शाता है। यह निर्णय न केवल हजारों परिवारों के जीवन में आर्थिक राहत लाएगा, बल्कि राज्य के प्रशासनिक तंत्र में भरोसा और संतुलन भी मजबूत करेगा। आने वाले समय में जब यह फैसला पूरी तरह लागू होगा, तब उपनल कर्मचारियों के लिए यह एक नए अध्याय की शुरुआत साबित हो सकता है।
उपनल कर्मियों ने मुख्यमंत्री धामी का जताया आभार
धामी कैबिनेट में गुरुवार को उपनल कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। जिसके बाद उपनल कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। उपनलकर्मियों ने समान काम के लिए समान वेतन के संबंध में कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले के लिए मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। उपनल कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री धामी से कहा कि यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही उनकी मांगों को पूरा करने के साथ-साथ उनके सम्मान और आर्थिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस फैसले से प्रदेश के हजारों उपनल कर्मचारियों में उत्साह एवं विश्वास का वातावरण बना है। सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार उपनलकर्मियों के हितों की रक्षा, उनके सम्मान और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। उपनल कर्मचारी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनके योगदान को सरकार पूरी गंभीरता से मान्यता देती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े सभी मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।उपनल कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि वे सरकार की नीतियों और निर्णयों के अनुरूप पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे।उपनल कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर ‘समान कार्य समान वेतन’ संबंधी कैबिनेट के ऐतिहासिक निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उपनल कर्मचारी महासंघ, उत्तराखंड के अध्यक्ष विनोद गोदियाल, प्रदेश महामंत्री विनय प्रसाद, अजय डबराल, मीना रौथाण, रमेश डोभाल, योगेश बडोनी, शैलेंद्र पंवार, अनिल जुयाल, प्रदीप कश्यप एवं संजय पाल मौजूद थे।






