Wednesday, October 7, 2026
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रामनगर के पूछड़ी में वन भूमि पर प्रशासन का शिकंजा, ड्रोन से हुआ संयुक्त सर्वे, जल्द हटेगा अतिक्रमण

नैनीताल जिले के रामनगर में वर्षों से वन भूमि पर अवैध कब्जों को लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है.

रामनगर: नैनीताल जिले के रामनगर के ग्राम पूछड़ी क्षेत्र में वन भूमि पर वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जों को हटाने के लिए अब प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है. तराई पश्चिमी वन प्रभाग की इस भूमि पर लंबे समय से अवैध अतिक्रमण कर खेती की जा रही थी. पूर्व में भी वन विभाग द्वारा यहां अवैध कब्जों को चिन्हित किया गया था, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी. मामले को लेकर कुछ लोगों द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की गई है, जो फिलहाल विचाराधीन है.

बता दें कि कुछ वर्ष पूर्व तराई पश्चिमी वन प्रभाग ने रामनगर नगर पालिका को कूड़ा निस्तारण यानी ट्रेंचिंग ग्राउंड के लिए लगभग एक हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई थी. इसके बदले नगर पालिका द्वारा वन विभाग को लगभग एक करोड़ रुपये की धनराशि भी दी जा चुकी है. इसके बावजूद आज भी उस भूमि पर कई लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर खेती की जा रही है, जिससे सरकारी योजना भी प्रभावित हो रही है.

जिसके बाद अपर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार कत्याल, एसडीओ वन विभाग किरण शाह, राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन और नगर पालिका की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र का व्यापक सर्वे किया. सर्वे के दौरान ड्रोन कैमरे की मदद से अवैध कब्जाई गई भूमि को चिन्हित किया गया. जैसे ही प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची, अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया और कुछ लोगों की अधिकारियों से हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली.

पहले चरण में नगर पालिका को दिए गए ट्रेंचिंग ग्राउंड की भूमि से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई की जाएगी, इसको लेकर अधिकारियों के बीच लंबी रणनीतिक बैठक भी हुई है. इस मामले में अपर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार कत्याल ने बताया कि साल 2024 में वन भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप में कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसकी जांच अभी जारी है. सरकार के निर्देश पर पूरे प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया गया है. जांच में यह सामने आया है कि कुछ लोगों ने कूट रचित दस्तावेजों के जरिए भोले-भाले लोगों को गुमराह कर जमीन बेहद सस्ते दामों में बेच दी.

अब प्रशासन की इस कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं कि वास्तव में अवैध कब्जे कब और कैसे हटाए जाएंगे. गौर हो कि वन विभाग की 1 हजार हेक्टेयर भूमि पर लगभग 500 से ज्यादा परिवारों का कब्जा है.

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