शिक्षा, ऊर्जा और संवेदनशीलता से बनती है डॉ. गीतांजलि राघव की कहानी

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अपनी पारिवारिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में बताएं?
मैं एक मध्यमवर्गीय, शिक्षित और संस्कारवान परिवार से आती हूँ। मेरे पिता सरकारी सेवा में कार्यरत हैं और मेरी माता जी घर पर बच्चों को शिक्षण कार्य कराती हैं। बचपन से ही मैंने अपने घर में शिक्षा का महत्व बहुत करीब से देखा है। मेरी माता जी को बच्चों को पढ़ाते हुए देखकर मेरे भीतर शिक्षा के प्रति समर्पण और दूसरों को मार्गदर्शन देने की भावना विकसित हुई, वहीं मेरे पिता से मैंने अनुशासन, जिम्मेदारी और ईमानदारी जैसे मूल्यों को सीखा। इन्हीं मूल्यों के साथ मैंने अपनी शिक्षा पूरी की यांत्रिक अभियंत्रण में पीएच.डी. (सौर तापीय प्रौद्योगिकी), ऊष्मा अभियंत्रण में परास्नातक (स्वर्ण पदक), तथा स्नातक में विश्वविद्यालय में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। मेरा अध्ययन और अनुसंधान मुख्यतः ऊर्जा, सतत विकास और नवाचार के क्षेत्र पर केंद्रित रहा है. जिसने मेरे कार्यक्षेत्र की मजबूत नींव रखी। इसके अतिरिक्त, मैं ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा प्रमाणित ऊर्जा प्रबंधक तथा कार्बन प्रमाणीकरण में प्रमुख सत्यापनकर्ता भी हूँ।
अपने कार्यक्षेत्र के बारे में बताएं। आप इस क्षेत्र में कैसे आईं और किससे प्रेरित हुई?
वर्तमान में मैं यूपीईएस, देहरादून में सहायक प्राध्यापक (चयन श्रेणी) तथा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (मान्यता एवं रैंकिंग) में वरिष्ठ प्रबंधक के रूप में कार्यरत हूँ। मैं पिछले एक दशक से अधिक समय से ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में कार्य कर रही हूँ. जिसमें अक्षय ऊर्जा तथा ऊर्जा लेखा परीक्षण परियोजनाओं पर मेरा विशेष ध्यान रहा है। इस क्षेत्र में आने की प्रेरण ॥ मुझे मेरे अनुभवों से मिली। जब मैंने यह समझा कि ऊर्जा, शिक्षा और नवाचार के माध्यम से समाज में वास्तविक और स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है. तब मैंने इसे अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। विशेष रूप से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कार्य करते हुए मैंने जमीनी स्तर की चुनौतियों को निकट से समझा। इन अनुभवों ने मुझे अपने कार्य को केवल तकनीकी दायरे तक सीमित न रखकर, उसे सामाजिक प्रभाव और नवाचार से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।
अपनी प्रमुख उपलब्धियों के बारे में बताएं।
मेरे कार्यकाल में अनुसंधान, शिक्षण, ऊर्जा परियोजनाओं तथा संस्थागत विकास के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ रही हैं। मैं ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा प्रमाणित ऊर्जा प्रबंधक तथा कार्बन प्रमाणीकरण में प्रमुख सत्यापनकर्ता के रूप में वर्षों से ऊर्जा क्षेत्र में सक्रिय हूँ। विशेष रूप से, मैंने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में अनेक ऊर्जा निरीक्षण और लेखा परीक्षण परियोजनाओं पर कार्य किया है। इन परियोजनाओं ने मुझे जमीनी स्तर की वास्तविक चुनौतियों विशेषकर ग्रामीण महिलाओं की परिस्थितियों को समझने का अवसर दिया। मेरी सबसे विशेष उपलब्धि मेरा सामाजिक संगठन “एक बजह” है. जिसके माध्यम से हम जरूरतमंद और प्रतिभाशाली बालिकाओं की शिक्षा में सहयोग करते हैं। हाल ही में, हमने आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्राओं को सहयोग प्रदान किया। उनकी आँखों में अपने सपनों को साकार करने की चमक देखना मेरे लिए किसी भी सम्मान से अधिक मूल्यवान है। इसके अतिरिक्त, मैंने “नायरा फ्रेश फार्म” नामक एक उद्यम की स्थापना की है, जो खेत से सीधे घर तक उत्पाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर आधारित है। इस पहल की विशेषता यह है कि इसमें पूरी तरह महिला कार्यबल कार्यरत है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। मेरे लिए ये सभी प्रयास केवल उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में उठाए गए सार्थक कदम हैं।
आपके भविष्य की योजनाएँ क्या हैं?
भविष्य में मेरा लक्ष्य सतत विकास, ऊर्जा दक्षता और सामाजिक प्रभाव को एक साथ लेकर आगे बढ़ना है। मैं ऐसी परियोजनाओं पर कार्य करना चाहती हूँ जो कार्बन तटस्थता, अक्षय ऊर्जा के प्रसार और सतत समुदायों के निर्माण को बढ़ावा दें। साथ ही, मैं अपने सामाजिक संगठन “एक वजह” और उद्यम “नायरा फ्रेश फार्म” का विस्तार करना चाहती हूँ, ताकि अधिक से अधिक बालिकाओं की शिक्षा में सहयोग किया जा सके और ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकें। मेरा उद्देश्य शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से समाज में दीर्घकालिक और सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
आप हमारी पत्रिका के माध्यम से क्या संदेश देना चाहेंगी?
मैं युवाओं से यही कहना चाहूँगी कि वे अपने सपनों के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझें। सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए वह तभी सार्थक होती है जब उससे दूसरों के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन आए। यदि हम अपने ज्ञान, कौशल और संसाधनों का उपयोग समाज के हित में करें, विशेषकर शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के लिए, तो हम एक अधिक समावेशी, सशक्त और बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

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