सीबीएसई 10वीं रिजल्ट में देहरादून का प्रदर्शन बेहतर लेकिन रैंकिंग फिसली

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बुधवार 15 अप्रैल को 10वीं का रिजल्ट इस बार तय समय से पहले जारी कर दिया, जिसमें देशभर में 93.70% छात्र सफल रहे। नतीजों में एक बार फिर लड़कियों ने बाजी मारी, उनका पास प्रतिशत 94.99% रहा, जबकि लड़कों का 92.69% और ट्रांसजेंडर छात्रों का 87.50% दर्ज किया गया। क्षेत्रवार प्रदर्शन में त्रिवेंद्रम और विजयवाड़ा सबसे आगे रहे, जहां 99.79% छात्र पास हुए। वहीं देहरादून रीजन का परिणाम 91.59% रहा, जो पिछले साल से बेहतर है, लेकिन रैंकिंग में यह 16वें स्थान पर खिसक गया। स्थानीय स्तर पर छात्रों का प्रदर्शन शानदार रहा, रुड़की, चकराता और रुद्रपुर में कई छात्रों ने 98% से अधिक अंक हासिल किए, जिसमें छात्राओं का दबदबा देखने को मिला। इस साल 24.71 लाख से ज्यादा छात्र परीक्षा में शामिल हुए। 55 हजार से अधिक छात्रों ने 95% से ऊपर अंक हासिल किए, जबकि 2.21 लाख से ज्यादा छात्रों ने 90% से अधिक स्कोर किया। सीबीएसई ने इस बार 10वीं की परीक्षा दो चरणों में आयोजित करने की नई व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत दूसरा चरण मई में होगा। दिव्य हिमगिरि रिपोर्ट

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बुधवार, 15 अप्रैल को इस साल 10वीं के नतीजे उम्मीद से पहले जारी कर दिए हैं, और आंकड़े एक बार फिर छात्रों की मजबूत तैयारी की कहानी बता रहे हैं। देशभर में शानदार सफलता दर के बीच लड़कियों ने बाजी मारी है, जबकि अलग-अलग क्षेत्रों का प्रदर्शन भी चर्चा में है। देहरादून रीजन ने पास प्रतिशत में सुधार तो किया, लेकिन रैंकिंग में गिरावट ने नई बहस छेड़ दी है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सीबीएसई 10वीं रिजल्ट 2026 जारी कर दिया है। सीबीएसई 10वीं रिजल्ट में 93.70 प्रतिशत विद्यार्थी सफल रहे हैं। त्रिवेंद्रम व विजयवाड़ा रीजन का रिजल्ट सबसे अच्छा रहा है। दोनों का पास प्रतिशत 99.79 फीसदी रहा। लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया है। उनका पास प्रतिशत 94.99% रहा। लड़कों का पास प्रतिशत 92.69% दर्ज किया गया। ट्रांसजेंडर छात्रों का पास प्रतिशत 87.50% रहा। जल्दी परिणाम जारी करने का एक मुख्य कारण यह भी है कि इस साल से 10वीं के लिए दो बार परीक्षाओं का आयोजन किया जाना है, जिसका दूसरा चरण मई में प्रस्तावित है। वहीं इस बार देहरादून रीजन का ओवरऑल रिजल्ट 91.59% रहा है, जो पिछले साल (90.97%) के मुकाबले थोड़ा बेहतर है। हालांकि, देश के कुल 22 संभागों (रीजन्स) में देहरादून इस बार खिसककर 16वें स्थान पर आ गया है, जबकि पिछले साल 17 संभागों में यह 13वें स्थान पर था। परीक्षा परिणामों में एक बार फिर बेटियों ने अपना दबदबा कायम रखा है। रुड़की और चकराता से लेकर रुद्रपुर तक, टॉपर्स की लिस्ट में छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया है। रुड़की के माउंट लिटेरा स्कूल की निशिता ने 99.2% अंक हासिल कर स्कूल का नाम रोशन किया है। इसी स्कूल की आयशा ने 98.8% अंकों के साथ दूसरा स्थान पाया। वहीं, सीनियर सेकेंडरी स्कूल की चार छात्राओं ने 98.2% अंक हासिल कर अपनी मेधा का परिचय दिया। उधर, चकराता के जौनसार पब्लिक स्कूल की छात्रा स्वर्णिका राणा ने भी 99.2% का जादुई आंकड़ा छूकर स्कूल टॉप किया। बुधवार को जैसे ही रिजल्ट घोषित हुआ, रुद्रपुर शहर के स्कूलों में ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ जश्न शुरू हो गया। शहर के कई छात्रों ने 98% से अधिक अंक लाकर उत्कृष्टता का प्रमाण दिया है। जेपीएस पब्लिक स्कूल के अंश श्रीवास्तव ने 99% अंक लाकर परचम लहराया। माही सिंह और प्रत्यूष नंदा 98.8% अंकों के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे। दिल्ली पब्लिक स्कूल की हर्षा अरिप्रसाथ ने पांच विषयों में 100 में से 100 अंक प्राप्त कर विद्यालय में प्रथम स्थान पाया। वंश कौशिक 98.8% के साथ दूसरे और अनमोल बर्तवाल 98.6% के साथ तीसरे स्थान पर रहे। जवाहर नवोदय विद्यालय के काव्य चौहान ने 97.8% अंक हासिल कर स्कूल टॉप किया। शुभम शर्मा (95.6%) और अभिषेक (93.3%) ने भी अच्छे अंक प्राप्त किए।

पहली परीक्षा फरवरी-मार्च में आयोजित की गई और दूसरी मई में निर्धारित है

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बुधवार को घोषणा की कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में 93.70 प्रतिशत से अधिक छात्र उत्तीर्ण हुए, जिनमें से 55,000 से अधिक छात्रों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। कुल 2.20 लाख से अधिक छात्रों ने 91 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए। परीक्षा में एक बार फिर लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया है। इस बार 94.99 प्रतिशत छात्राएं परीक्षा में उत्तीर्ण हुई हैं। लड़कों का उत्तीर्ण प्रतिशत 92.69 रहा और उभयलिंगी अभ्यर्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 87.50 रहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की सिफारिशों के अनुरूप, सीबीएसई ने कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा दो चरणों में आयोजित करना शुरू किया है। पहली परीक्षा फरवरी-मार्च में आयोजित की गई और दूसरी मई में निर्धारित है। छात्रों के लिए पहली परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य था। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा, “परंपरागत रूप से, कक्षा 10वीं के परिणाम मई के मध्य में घोषित किए जाते हैं। हालांकि, इस वर्ष सीबीएसई ने रिकॉर्ड समय में लगभग 1.6 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया और परिणाम सामान्य से एक महीने पहले घोषित किया जा रहा है।” उन्होंने कहा, “परिणाम घोषित होने के बाद, छात्रों को अपने-अपने विद्यालयों के माध्यम से दूसरी परीक्षा के लिए अपना नामांकन दर्ज कराने के लिए कहा जाएगा।” सीबीएसई के अनुसार, 55,368 छात्रों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं, जबकि 2,21,574 छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। 1.47 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को ‘कम्पार्टमेंट’ श्रेणी में रखा गया है। क्षेत्रवार, त्रिवेंद्रम और विजयवाड़ा क्षेत्रों ने 99.79 प्रतिशत के साथ सर्वाधिक उत्तीर्ण प्रतिशत दर्ज किया, जबकि गुवाहाटी क्षेत्र का उत्तीर्ण प्रतिशत सबसे कम 85.32 प्रतिशत रहा। दिल्ली का उत्तीर्ण प्रतिशत 97.38 प्रतिशत दर्ज किया गया। संस्थानवार, केंद्रीय विद्यालयों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जहां उत्तीर्ण प्रतिशत 99.57 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद नवोदय विद्यालय 99.42 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहे। निजी स्कूलों का उत्तीर्ण प्रतिशत 93.77 प्रतिशत रहा, जबकि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों का उत्तीर्ण प्रतिशत सबसे कम 91.01 प्रतिशत दर्ज किया गया। सीबीएसई के अनुसार, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) का उत्तीर्ण प्रतिशत 96.24 रहा, जिनमें से कम से कम 91 छात्रों ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए, जबकि इस श्रेणी के 452 छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए। बोर्ड के पहले के निर्णय के अनुसार छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए सीबीएसई ने कोई मेरिट सूची घोषित नहीं की है। साथ ही, बोर्ड ने अपने छात्रों को प्रथम, द्वितीय या तृतीय श्रेणी भी प्रदान नहीं की। उन्होंने कहा, “हालांकि, हम उन शीर्ष 0.1 प्रतिशत छात्रों को मेरिट प्रमाण पत्र जारी करेंगे, जिन्होंने विषयों में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए हैं। मेरिट प्रमाण पत्र दूसरे बोर्ड परीक्षा के बाद संबंधित छात्र के डिजी-लॉकर में उपलब्ध कराया जाएगा।” बोर्ड ने पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनजर जहां परीक्षाएं रद्द कर दी गई थीं, वहां परीक्षा देने वाले छात्रों के परिणाम भी घोषित किए। इन छात्रों के लिए सीबीएसई ने वैकल्पिक अंक निर्धारण नीति की घोषणा की थी। भारद्वाज ने कहा, “पश्चिम एशियाई देशों में मौजूदा स्थिति को देखते हुए सीबीएसई ने इस क्षेत्र के छात्रों के परिणाम अन्य छात्रों के साथ ही जारी करने का निर्णय लिया है, ताकि सीबीएसई की नीति के अनुरूप निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित की जा सके।

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