महिला स्वास्थ्य और पोषण

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    स्वस्थ नारी, स्वस्थ समाज की आधारशिला महिला समाज की आधारशिला होती है। वह परिवार, कार्यक्षेत्र और समाज-तीनों स्तरों पर अपनी भूमिका निभाती है। परंतु अक्सर यह देखा गया है कि अपने अनेक दायित्वों के बीच महिला अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं दे पाती। बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, मानसिक तनाव और शारीरिक निष्क्रियता के कारण आज महिलाओं में अनेक स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हैं। ऐसे समय में महिला स्वास्थ्य और पोषण पर गंभीरता से ध्यान देना अत्यंत आवश्यक हो गया है। स्वस्थ महिला ही स्वस्थ परिवार और सशक्त समाज की 0103 नींव रखती है। महिला जीवन के विभिन्न चरण और स्वास्थ्य की आवश्यकताएँ महिला का शरीर जीवन के प्रत्येक चरण में शारीरिक एवं हार्मोनल परिवर्तनों से गुजरता है। इन परिवर्तनों के अनुरूप पोषण एवं देखभाल की आवश्यकता भी बदलती रहती है।

    1. किशोरावस्था किशोरावस्था में शारीरिक विकास तीव्र गति से होता है। इसी समय मासिक धर्म की शुरुआत भी होती है। आयरन की कमी से एनीमिया की संभावना कैल्शियम एवं विटामिन डी की कमी से हडिड्यों का कमजोर होना जंक फूड और अनियमित भोजन से हार्मोनल असंतुलन इस चस्थ नारी. अवस्था में संतुलित आहार न मिलने पर आगे चलकर कमजोरी, थकान और प्रजनन संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
    2. युवावस्था एवं गर्भावस्था इस चरण में महिला घर और कार्य दोनों की जिम्मेदारियाँ निभाती है। प्रोटीन की कमी से शारीरिक दुर्बलता आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी की आवश्यकत्ता मानसिक तनाव और नींद की कमी गर्भावस्था के दौरान उचित पोषण न केवल माँ के स्वास्थ्य के लिए, बल्कि होने वाले शिशु के संपूर्ण विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक होता है।
    3. मध्यम आयु और रजोनिवृत्ति रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलावों के कारण कई समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं: वजन बढ़ना हडिड्‌यों का कमजोर होना (ऑस्टियोपोरोसिस) हृदय रोगों का खतरा चिड़चिड़ापन और चिंता इस अवस्था में संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और मानसिक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान आवश्यक है। महिलाओं में बढ़ती सामान्य स्वास्थ्य समस्याएँ वर्तमान समय में महिलाओं में निम्नलिखित समस्याएँ सामान्य होती जा रही हैं: आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया थायरॉयड और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) मधुमेह और उच्च रक्तचाप मोटापा कैल्शियम एवं विटामिन डी की कमी इन समस्याओं के मुख्य कारण असंतुलित आहार, अनियमित दिनचर्या और अत्यधिक तनाव हैं। संतुलित आहारः महिला स्वास्थ्य की कुंजी संतुलित आहार का अर्थ केवल कम भोजन करना नहीं, बल्कि सभी आवश्यक पोषक तत्त्वों का उचित मात्रा में सेवन करना है। महिलाओं के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रोटीनः शरीर की मरम्मत और शक्ति के लिए आयरनः रक्त की कमी से बचाव हेतु कैल्शियन एवं विटामिन डी: हडिड्‌यों और दाँतों के लिए फोलिक एसिड एवं विटामिन बीः तंत्रिका तंत्र और हार्मोन संतुलन के लिए रेशा (फाइबर): पाचन तंत्र और वजन नियंत्रण के लिए दालें, हरी सब्जियाँ, फल, दूध-दही, मेवे और बीज भारतीय आहार में पोषण के उत्तन स्रोत हैं। जीवनशैली की भूमिका स्वस्थ जीवन के लिए केवल अच्छा भोजन ही पर्याप्त नहीं है। जीवनशैली भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नियमित और पर्याप्त नींद प्रतिदिन हल्का व्यायाम या योग तनाव प्रबंधन पर्याप्त जल सेवन समय पर भोजन छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव दीर्घकाल में बड़े लाभप्रदान करते हैं। स्व देखभालः स्वार्थ नहीं, आवश्यकता अनेक महिलाएँ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने को स्वार्थ समझती हैं, जबकि वास्तव में यह एक आवश्यकता है। नियमित स्वास्थ्य जाँच, शरीर के संकेतों को समझना और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना महिला को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाता है।
      महिला स्वास्थ्य केवल एक व्यक्ति का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज से जुड़ा हुआ विषय है। उचित पोषण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अनेक बीमारियों से बचाव संभव है। स्वस्थ महिला ही स्वस्थ पीढ़ी को जन्म देती है। अतः समाज के प्रत्येक स्तर पर महिला स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना समय की माँग है।
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