दिन गुरुवार, तारीख 11 सितंबर 2025 शाम के करीब 5 बजे का समय। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अधिकारियों के साथ उत्तराखंड के प्रभावित क्षेत्रों में बादल फटने, बारिश और भूस्खलन से हुई बाढ़ की स्थिति और नुकसान समीक्षा और हाईलेवल मीटिंग की। प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड के आपदा प्रभावित इलाकों के लिए 1200 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का एलान किया। मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री का अभार जताया। प्रधानमंत्री जब मुख्यमंत्री के साथ यह हाईलेवल की मीटिंग कर रहे थे तब उन्होंने सोचा नहीं था कि चार दिन बाद एक और आपदा का कहर टूटने वाला है । 15-16 सितंबर की राजधानी देहरादून में आपदा का कहर बरपा। देहरादून में बादल फटने के बाद जबरदस्त तबाही हुई। कई पुल ध्वस्त हो गए और सड़कें बह गई। इसके साथ 30 से अधिक लोगों की मौत भी हो गई। मालदेवता, सहस्त्रधारा,आईटी पार्क, प्रेम नगर आदि इलाकों में ऐसी खौफनाक तस्वीर आई कि लोगों को डरा गई। मंगलवार को देहरादून पूरे दिन डरा और सहमा हुआ था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मंत्री विधायकों एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस प्रशासन को समझ में नहीं आया है कहां से राहत बचाव का शुरू करें। राजधानी में बहने वाली रिस्पना और टोंस नदियों का रौद्र रूप सहारवासियों को डरा गया । देहरादून में राहत बचाव कर पूरा भी नहीं हो पाया था कि बुधवार देर रात चमोली में भी बादल फट गया जिसके बाद भारी तबाही हुई । इस साल 2025 में आपदा ने देवभूमि को करारी चोट पहुंचाई है । इसको भरने में समय लग जाएगा। शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार

उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, इस वर्ष 2025 में प्राकृतिक आपदाओं के कारण गहरे संकट में है। गुरुवार, 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हाईलेवल की मीटिंग की और 1200 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की। लेकिन यह राहत भी अस्थायी साबित हुई, क्योंकि 15-16 सितंबर को देहरादून में बादल फटने और भूस्खलन ने फिर से कहर बरपाया। सहस्त्रधारा, मालदेवता, आईटी पार्क और प्रेम नगर जैसे इलाकों में बादल फटने से सड़कों पर जलभराव, पुलों का बहना और घरों का मलबे में तब्दील होना आम हो गया। रिस्पना और टोंस नदियों का रौद्र रूप लोगों के लिए भय का कारण बना। अब तक 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग लापता हैं। स्थानीय प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है। बुधवार की रात चमोली जिले के नंदानगर घाट में बादल फटने से भारी तबाही हुई। कुंतरी और धूर्मा गांवों में 32 घर मलबे में दब गए, 14 लोग लापता हैं और 20 लोग घायल हुए हैं। प्रशासन ने राहत शिविरों की व्यवस्था की है, लेकिन प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता की सख्त जरूरत है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसी भी प्रभावित परिवार को असुविधा न हो और राहत सामग्री, सुरक्षित ठहराव, भोजन, पानी एवं स्वास्थ्य सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य और केंद्रीय निधियों का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जाएगा ताकि प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक बुनियादी ढांचे की शीघ्र बहाली की जा सके। उत्तराखंड की यह आपदा केवल प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानवीय भी है। अतिक्रमण, अव्यवस्थित निर्माण और जलवायु परिवर्तन ने इस संकट को और गहरा किया है। अब समय है कि हम इस देवभूमि की कराह को सुनें और इसे पुनर्निर्माण की दिशा में एकजुट होकर कदम बढ़ाएं।
देहरादून शहर और आसपास के क्षेत्रों में बादल फटने से भारी तबाही

देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में 15-16 सितंबर की रात को हुई बादल फटने की घटना ने व्यापक तबाही मचाई। इस आपदा ने न केवल देहरादून शहर बल्कि उसके उपनगरों और आसपास के गांवों को भी प्रभावित किया। नदी-नालों का उफान, भूस्खलन और जलभराव ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। मालदेवता यह क्षेत्र देहरादून का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ और कई सड़कें बह गईं। इससे 12 से अधिक गांवों का संपर्क कट गया, जिनमें फुलैत, सर्केट, छमरौली, सिला और क्यारा शामिल हैं। इन गांवों में बिजली, पानी और परिवहन सेवाएं ठप हो गईं। सहस्त्रधारा और टपकेश्वर मंदिर क्षेत्र में जलभराव और भूस्खलन हुआ। टपकेश्वर महादेव मंदिर, जो धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, भी क्षतिग्रस्त हो गया। इस क्षेत्र में कई घर और दुकानें बह गईं। आईटी पार्क और टपवन क्षेत्र में भी जलभराव और भूस्खलन से गंभीर नुकसान हुआ। कई घर और दुकानें मलबे में दब गईं, और सड़कें बह गईं। यहां के निवासी सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किए गए हैं। कर्लिगाड और कासल में भी कर्लिगाड नदी का जलस्तर बढ़ने से पुल बह गए, जिससे देहरादून-हरिद्वार राजमार्ग पर यातायात ठप हो गया। कासल क्षेत्र में भी भूस्खलन से कई सड़कें बंद हो गईं। दालनवाला और संतला देवी क्षेत्रों में भी भूस्खलन और जलभराव से कई घर क्षतिग्रस्त हुए। स्थानीय प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देहरादून और उसके आसपास के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की स्थिति और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की आवश्यकता है। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में जुटी हुई है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में जीवन को सामान्य बनाने में समय लगेगा।

देहरादून में बादल फटने के बाद भीषण आपदा में सीएम धामी ने राहत कार्यों की संभाली कमान

देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में बादल फटने और भूस्खलन के कारण आई भीषण आपदा के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहत कार्यों की कमान संभाली। उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और प्रभावित लोगों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री धामी ने मालदेवता, सहस्त्रधारा, आईटी पार्क, प्रेम नगर, रिस्पना और टोंस नदियों के किनारे बसे क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इन क्षेत्रों में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण सड़कों का बहना, पुलों का ढहना और घरों का मलबे में तब्दील होना जैसी घटनाएं हुई थीं। मुख्यमंत्री धामी ने इन क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों की निगरानी की और प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री धामी ने देहरादून शहर के अन्य प्रभावित क्षेत्रों का भी दौरा किया। उन्होंने दालनवाला, संतला देवी, कर्लिगाड और कासल जैसे क्षेत्रों का निरीक्षण किया, जहां भूस्खलन और जलभराव के कारण कई घर क्षतिग्रस्त हुए थे। मुख्यमंत्री धामी ने इन क्षेत्रों में भी राहत कार्यों की समीक्षा की और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। शनिवार को मुख्यमंत्री धामी चमोली जिले के नंदानगर पहुंचे, जहां फिर से भारी बारिश और बादल फटने की वजह से तबाही हुई थी। उन्होंने वहां प्रभावित लोगों से मुलाकात की और राहत तथा पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री धामी की सक्रियता और तत्परता ने आपदा के समय में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया और प्रभावित लोगों को राहत प्रदान की। उनके नेतृत्व में राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन में उत्कृष्टता का परिचय दिया है।

संकट की घड़ी में डीएम बंसल और एसएसपी अजय सिंह अद्भुत नेतृत्व और समर्पण का दिया परिचय

कुदरत के कहर ने देहरादून में भारी तबाही मचाई। संकट की घड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्परता और मानवीय संवेदनाओं के साथ राहत कार्यों की अगुवाई की। उनके साथ मंत्री गणेश जोशी, तमाम विधायक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की निगरानी कर रहे थे। मुख्यमंत्री धामी और उनके मंत्रियों और विधायकों की सक्रियता के बीच देहरादून के जिला अधिकारी सविन बंसल और एसएसपी अजय सिंह ने भी अद्भुत नेतृत्व और समर्पण का परिचय दिया। डीएम बंसल और एसएसपी अजय सिंह ने आपदा प्रभावित इलाकों का दौरा किया, राहत कार्यों का निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने प्रशासनिक टीमों, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को निर्देशित किया और राहत कार्यों में तेजी सुनिश्चित की। मुख्यमंत्री धामी, मंत्री गणेश जोशी और विधायकों के साथ मिलकर डीएम और एसएसपी की यह तत्परता और समर्पण आपदा प्रबंधन में एक आदर्श उदाहरण बन गई। प्रभावित लोगों को उनके नेतृत्व में समय पर भोजन, पानी, मेडिकल सुविधा और सुरक्षित ठहराव उपलब्ध कराया गया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की यह सक्रियता दिखाती है कि संकट के समय में जब राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक नेतृत्व एकजुट होते हैं, तो प्रभावित लोगों के लिए राहत और उम्मीद की किरण तुरंत उपलब्ध हो सकती है। इस संयुक्त प्रयास ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और संवेदनशील नेतृत्व का संगम होने पर ही असली सफलता मिलती है। मुख्यमंत्री धामी, मंत्री गणेश जोशी, विधायक गण और डीएम-एसएसपी की सक्रियता ने प्रभावित लोगों में भरोसा और राहत की भावना पैदा की, और पूरे देहरादून में आपदा से निपटने का मजबूत संदेश दिया।






