छह दिवसीय समारोह का समापन, 15 गोल्ड और 82 सिल्वर मेडल प्रदान; 121 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि
देहरादून, 27 अक्टूबर। देहरादून स्थित यूपीईएस (UPES) के 24वें दीक्षांत समारोह का सोमवार को समापन हो गया। 22 से 27 अक्टूबर तक आयोजित छह दिवसीय समारोह में वर्ष 2026 के ग्रेजुएटिंग बैच के कुल 5,129 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इस दौरान शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 126 पुरस्कार भी दिए गए। इनमें 15 गोल्ड मेडल, 82 सिल्वर मेडल, एक ब्रॉन्ज मेडल और 28 लेटर्स ऑफ एप्रिसिएशन शामिल हैं।
विश्वविद्यालय के अनुसार, यह अब तक का उसका सबसे बड़ा दीक्षांत समारोह रहा। डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में नियमित पाठ्यक्रमों के 4,140 और यूपीईएस ऑनलाइन के 989 छात्र शामिल हैं। इनमें 3,024 अंडरग्रेजुएट और 2,105 पोस्टग्रेजुएट विद्यार्थी रहे। समारोह के उद्घाटन दिवस पर 121 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की गई।
विश्वविद्यालय स्तर पर स्कूल ऑफ लॉ के वीरेंद्र प्रताप सिंह राठौड़ को गोल्ड मेडल, स्कूल ऑफ डिजाइन की सौम्या गुप्ता को सिल्वर मेडल और स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के परितोष जुयाल को ब्रॉन्ज मेडल से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के सात स्कूलों के विद्यार्थियों को कुल 117 शैक्षणिक सम्मान प्रदान किए गए, जबकि यूपीईएस ऑनलाइन के छह विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल से नवाजा गया।
समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल सहित उद्योग एवं शिक्षा जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
इस अवसर पर यूपीईएस के कुलपति डॉ. सुनील राय ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपने अब तक के सबसे बड़े ग्रेजुएटिंग बैच की सफलता का जश्न मना रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से बदलती तकनीक के दौर में विद्यार्थियों को केवल ज्ञान और कौशल ही नहीं, बल्कि जिज्ञासा, परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता और ईमानदारी जैसे गुणों से लैस करना भी जरूरी है।
छह दिवसीय दीक्षांत समारोह का समापन स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंजीनियरिंग और स्कूल ऑफ लिबरल स्टडीज एंड ह्यूमैनिटीज के कार्यक्रमों के साथ हुआ। विश्वविद्यालय ने इस आयोजन के माध्यम से तकनीकी बदलावों के अनुरूप कुशल और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार पेशेवरों को विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।


