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Monday, June 1, 2026
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NFHS-6 में उत्तराखण्ड के मातृ, नवजात, बाल स्वास्थ्य एवं पोषण संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार

देहरादून: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के नवीनतम निष्कर्षों में उत्तराखण्ड ने मातृ स्वास्थ्य, नवजात एवं बाल स्वास्थ्य, पोषण तथा गैर-संचारी रोगों (NCDs) से संबंधित कई प्रमुख संकेतकों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। यह उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन, सुदृढ़ स्वास्थ्य तंत्र तथा अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के सतत प्रयासों का परिणाम है।

सर्वेक्षण के अनुसार मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया गया है। प्रथम तिमाही में गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण की दर 68.8 प्रतिशत से बढ़कर 80.6 प्रतिशत हो गई है। प्रसव पूर्व जांच (ANC) कवरेज 91.8 प्रतिशत से बढ़कर 98.3 प्रतिशत, संस्थागत प्रसव 83.2 प्रतिशत से बढ़कर 88.9 प्रतिशत तथा प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कराए गए प्रसव 83.7 प्रतिशत से बढ़कर 90.3 प्रतिशत हो गए हैं। प्रसव के दो दिनों के भीतर माताओं को प्रसवोत्तर देखभाल की उपलब्धता 78 प्रतिशत से बढ़कर 86.5 प्रतिशत हो गई है।

बाल स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में भी राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। जन्म के दो दिनों के भीतर नवजात शिशुओं को प्रसवोत्तर देखभाल प्राप्त होने की दर 78.9 प्रतिशत से बढ़कर 86.7 प्रतिशत हो गई है। बच्चों में विटामिन-ए अनुपूरण 53.7 प्रतिशत से बढ़कर 59.9 प्रतिशत तथा 6 से 23 माह आयु वर्ग के बच्चों में पर्याप्त आहार प्राप्त करने की दर 12.2 प्रतिशत से बढ़कर 19.2 प्रतिशत हो गई है।

टीकाकरण के क्षेत्र में भी उत्तराखण्ड ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। पूर्ण टीकाकरण प्राप्त करने वाले बच्चों का प्रतिशत 81.1 प्रतिशत से बढ़कर 86 प्रतिशत हो गया है। खसरा की दूसरी खुराक प्राप्त करने वाले बच्चों का प्रतिशत 71.3 प्रतिशत से बढ़कर 83.2 प्रतिशत तथा रोटावायरस वैक्सीन की तीनों खुराक प्राप्त करने वाले बच्चों का प्रतिशत 32.3 प्रतिशत से बढ़कर 92.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

कुपोषण से संबंधित संकेतकों में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिला है। बच्चों में स्टंटिंग 27 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत, वेस्टिंग 13.2 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत, गंभीर वेस्टिंग 4.7 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत तथा कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 21 प्रतिशत से घटकर 19.6 प्रतिशत हो गया है। बच्चों में अधिक वजन (ओवरवेट) की दर भी 4.1 प्रतिशत से घटकर 0.7 प्रतिशत रह गई है।

गैर-संचारी रोगों के क्षेत्र में भी राज्य ने सकारात्मक उपलब्धियां दर्ज की हैं। उच्च रक्तचाप से प्रभावित महिलाओं का प्रतिशत 22.9 से घटकर 14.5 तथा पुरुषों में 31.8 से घटकर 18.3 प्रतिशत हो गया है। यह नियमित स्क्रीनिंग, उपचार एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि NFHS-6 के सकारात्मक परिणाम राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों, सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाओं तथा स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पित प्रयासों का प्रतिफल हैं। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि यह उपलब्धि मातृ, नवजात, बाल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक तक सम्मानजनक, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा, खुशियों की सवारी (KKS) एवं विभागीय एम्बुलेंस सेवाओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

साथ ही राज्य द्वारा सभी गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग, निगरानी एवं नियमित फॉलो-अप हेतु राज्य मातृ स्वास्थ्य (Maternal Health) वार रूम की स्थापना की गई है, जिससे समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं तथा मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को 70 से कम लाने के सतत विकास लक्ष्य (SDG) 2030 की दिशा में प्रयासों को और अधिक सशक्त किया जा रहा है।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव श्री विनय शंकर पाण्डेय ने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण राज्य होने के बावजूद यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग, राज्य एनएचएम, जिला एवं ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य टीमों, चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, एएनएम, सीएचओ, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहित सभी अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

उत्तराखण्ड सरकार मातृ, नवजात, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षित मातृत्व, टीकाकरण तथा गैर-संचारी रोग नियंत्रण सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

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