ब्रह्माकुमारीज में नारी शक्ति का तैंतीस या पचास नहीं, बल्कि शत प्रतिशत आरक्षण है- नरेश कौशल

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    मीडिया महासम्मेलन का उद्घाटन सत्र: वैश्विक शांति की आवश्यकता-मीडिया की भूमिका पर चर्चा

    प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय आबूराज (माउंट आबू) में इन दिनों मीडिया महाकुम्भ का दृश्य नज़र आ रहा है। संस्था के मीडिया प्रभाग द्वारा आयोजित महासम्मेलन में देशभर के दिग्गज पत्रकार, चिंतक, विचारक, मीडिया शिक्षक मिलकर चिंतन-मंथन कर रहे हैं। शुक्रवार को उद्घाटन सत्र में वैश्विक शांति की आवश्यकता में मीडिया की भूमिका विषय पर देश भर से पधारे विद्वान वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

    ब्रह्माकुमारीज में आकर मन शांत और बुद्धि स्थिर हो गई-सुभाष बराला राज्यसभा सांसद

    मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि मैं माउंट आबू को दुनिया की सबसे दिव्य भूमि कहना चाहता हूँ। यहां ब्रह्माकुमारीज में आने के बाद मन शांत, बुद्धि स्थिर और प्रसन्नता का अनुभव हुआ। यह दुनिया में अपनेआप में एक अनोखी संस्था है। विश्व मे नारी सशक्तिकरण का इससे अच्छा उदाहरण हो ही नहीं सकता। इसने नए मानदंड स्थापित किये हैं। 140 देशों में यह संस्था परमात्मा के सन्देश को पहुंचाने का कार्य कर रही है। यह संस्था आत्मा की शुद्धि का रहस्य भी हमको समझा रही है। जिसने इसे समझा वो तर गया। मनुष्य की असली ताकत का अहसास करवाती है, वह ताकत शरीर नहीं आत्मा है। वो आत्मा जो अजर है अमर है, जिसके बारे में गीता में भी कहा गया है। उस आत्मा से परिचित करवाना और परमात्मा से कैसे आत्मसात हो, यह समझाने का कार्य भी ब्रह्माकुमारीज कर रही है। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए मीडिया की जिम्मेदारी बड़ी हो जाती है। आप केवल खबर नहीं देते, बल्कि दृष्टि भी देते हैं। आज दुनिया मे कोई भौगोलिक विस्तार में लगा है, कोई आर्थिक साम्राज्यवाद में लगा हुआ है। विश्व में युद्ध का वातावरण है। भारत को भी सामरिक दृष्टि से घेरने का भी षड्यंत्र चल रहा है। एक खबर उम्मीद भी जगा सकती है, एक खबर डरा भी सकती है। मीडिया चाहे तो देश की दशा बदल सकती है। भारत वर्ष दुनिया को बदलने की ताकत रखता है। माउंट आबू से शांति का, सत्य का संदेश मिलता है और मीडिया इसे घर-घर में पहुंचा सकती है। मीडिया सवाल पूछेगा तो सवाल गूंजेगा, लेकिन मीडिया अगर समाधान भी सुझाएगा तो सवाल सुलझेगा। हम इस दिव्य भूमि से सकरात्मकता ले जाएं कि हम पॉजिटिव न्यूज़ दिखाएंगे। क्या हम यहीं से इसकी शुरुआत नहीं कर सकते क्या? यदि सत्यापित खबरें जाएगी तो मीडिया पर उंगली उठना बंद होगी। टीआरपी का चक्कर छोड़ देंगे तो आपका और समाज दोनों का फायदा होगा। मीडिया मजबूत समाज की नींव रखने की भूमिका का निर्वहन करें।

    केवल सूचना देने का नहीं, बल्कि मीडिया का काम सामाजिक सरोकार भी है-डॉ मानसिंह परमार

    कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति मुख्य वक्ता प्रो डॉ मानसिंह परमार ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि जब आप अपने कर्मस्थल पर लौटें तो एक नया संकल्प लेकर लौटें कि हम विश्व शांति में क्या योगदान दे सकते हैं। आज पूरे विश्व मे परमाणु बम की होड़ लगी हुई है। मानवता का पक्ष रखने वाला कोई नहीं है। आज समाचार पत्रों में प्रथम पृष्ठ की हेडलाइन केवल हिंसा और युद्ध की होती है। एक मुरली श्री कृष्ण ने बजाई थी, आज इस संगमयुग में बाबा की मुरली के माध्यम से विश्व मे शांति की लहरें फैला रहे हैं। परमात्मा शिव ब्रह्मा मुख से ज्ञान का संचार कर रहे हैं। बाबा ने मुरली के माध्यम से जो संवाद, सम्प्रेषण किया, वह लोगों में दिव्य गुण भर रहे हैं। यदि आज हमारे पत्रकार दिव्य गुण अपना लें तो आदर्श आचार संहिता की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। शुभ भावना में सारी नैतिकता, सारे ज्ञान का सार समाया हुआ है। बाबा ने जो पवित्रता, ईमानदारी और सत्यता का पाठ पढ़ाया, इसकी जरूरत सभी क्षेत्रों में है, चाहे पत्रकारिता हो या राजनीति का क्षेत्र। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पूरे समय ब्रेकिंग और लाइव में लगा रहता है। इसलिये वहां शांति की बात करना जरूरी है। शांति स्थापना में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। ये भी सच है कि मीडिया का कार्य सत्य सबके सामने रखना है, लेकिन सत्य दिखाते वक़्त उसे संवेदनशील भी होना पड़ेगा। पत्रकारिता केवल सूचना देने का काम नहीं है, बल्कि मीडिया का काम सामाजिक सरोकार भी है। सोशल मीडिया शांति की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    विश्व मे शांति तो चाहिए ही, लेकिन व्यक्तिगत रूप से भी सभी शांतचित्त बने-बीके मोहिनी दीदी

    ब्रह्माकुमारीज संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मोहिनी दीदी ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि हमारा सोचने का और हमारा बोलने का, दोनों का वातावरण में प्रभाव होता है। मीडिया का बहुत बड़ा रोल है। जिसके पास कलम है, वाणी में बल है, उन्हें वर्तमान समय शांति का संदेश देना बहुत जरूरी है। सभी यह लक्ष्य रखें कि हम सबमे शांति की भावना हो, शान्ति का संदेश हो। मनुष्य जीवन, समाज, देश परिवार में शांति हो। प्रगति भी तभी होती है, जब मन मे शांति हो। बहुत बड़ा गुण है शांति। शांति से रचनात्मकता को बल मिलता है। विश्व मे शांति तो चाहिए ही, लेकिन व्यक्तिगत रूप से भी सभी शांतचित्त बने। आप ऐसा इंस्ट्रूमेंट बने जिससे विश्व मे शांति व्यापक हो जाये।

    दूसरों के प्रति शुभभावना और शुभकामना का भाव हो-बीके सरला दीदी

    मीडिया प्रभाग की उपाध्यक्ष बीके सरला दीदी ने कहा कि हमने इस कॉन्फ्रेंस में विभिन्न सत्रों में मीडिया के रोल पर चर्चा करने का प्रयास किया है। आप जब यहां से जाओ तो बहुत ही प्रोफेशनल रीति से लाभ ले सकें। भगवान का ऑब्जेक्टिव है कि उनके हम सब बच्चे सुखी, शांत व आनंद में रहें। मीडिया के ऑब्जेक्टिव ऐसे रखें कि उसमें भगवान से जो समाधान मिलते हैं, इस समस्याग्रस्त दुनिया को दें। तो हम मीडिया का ऐसा लक्ष्य रखकर चलते हैं। ब्रेकिंग न्यूज़ से शॉकिंग न्यूज़ देना ही पड़ता है। ऐसे में ब्रह्माकुमारीज संस्था आपको यही सिखाती है कि दूसरों के प्रति शुभभावना और शुभकामना का भाव हो। हम भी डिटैच होकर अपने कार्य को करें।

    शांति की अनुभूति का आधार मेडिटेशन है-बीके शीलू दीदी

    एजुकेशन विंग की उपाध्यक्ष बीके शीलू दीदी ने राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया। उन्होंने कहा शांति की अनुभूति का आधार मेडिटेशन है। पहले आत्मा अपने आपको पहचाने की मैं कौन हूँ। ओमशान्ति का अर्थ ही है कि मैं वही हूँ जिसका स्वधर्म शांति है। हम शांति के धाम से सृष्टि रंगमंच पर अभिनय करने आई हूँ। मैं आत्मा शांति सागर परमपिता की संतान हूँ।

    शांति हमारा संस्कार है-बीके सुदेश दीदी

    ब्रह्माकुमारीज की संयुक्त प्रशासनिक मुखिया राजयोगिनी बीके सुदेश दीदी ने कहा कि विश्व शांति की बात इसलिए कर रहे ह4 क्योंकि सारा विश्व हमारा परिवार है। भारत शांति का दूत हैं। हम भारत माँ के लाल, हमारे अंदर वो शांति की शक्ति है। शांति हमारा संस्कार है। आत्मा को शांति चाहिए। जब तक हमने बीज को नहीं सींचा है, तब तक वो फल नहीं देगा। बीज को धरती चाहिए, जल चाहिए, सूर्य की शक्ति चाहिए। भारत भूमि की महिमा है यह फूलों का बगीचा था, यहां श्री लक्ष्मी नारायण का राज्य था। शांति आएगी जब हम उसे प्रेक्टिकल में लाएंगे। मैं सौ देशों में गयी हूँ। संसार में शरीर मे रहते हुए हमें शांति म वातावरण बनाना है। जब तक हमने परमात्मा से कनेक्शन नहीं जोड़ा, तब तक शांति कहाँ से मिले। उसके लिए मन मे सबके कल्याण की भावना जरूरी है। सकारात्मकता, दृढ़ता, पवित्रता, सत्यता, स्वधर्म की शक्ति चाहिए।

    आप अपने घर मे आये हैं-करुणा भाई

    ब्रह्माकुमारीज के महासचिव तथा मीडिया विंग के अध्यक्ष बीके करुणा भाई ने यह ईश्वरीय विश्वविद्यालय 90 वर्षो से यह संदेश दे रहे हैं, सारा विश्व एक परिवार है। आप यहां ऐसे समझें कि आप अपने घर मे हैं। यहां शांति का जितना अनुभव कर सकते हैं, इन तीन दिनों में आप करें।

    विशिष्ट अथितियों ने भी रखे विचार

    नई दिल्ली डीडी न्यूज़ के सलाहकार संपादक मनीष बाजपेई ने कहा कि समाज में जो बीमारी है, उसका डायग्नोस करना बहुत जरूरी है। कथनी और करनी में अंतर होगा तो बहुत दिक्कत होगी। जीवन मे भौतिकता और आध्यात्मिकता का संतुलन बहुत जरूरी है।

    चंडीगढ़ से आए दैनिक ट्रिब्यून के संपादक नरेश कौशल ने कहा कि विश्व आज सर्वाधिक अशांति के दौर से गुजर रहा है। ऐसे हालत में मीडिया की सकारात्मक भूमिका समय की जरूरत है। जब हम शांति की बात करते हैं तो सबसे पहले परिवार की शांति की बात आती है। ब्रह्माकुमारीज आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से विश्व की बेहतरी के लिए काम कर रहा है। आपकी इस संस्था में नारी शक्ति का पैतीस या पचास नहीं, बल्कि शत प्रतिशत आरक्षण है। ट्रिब्यून में भी बडे बडे पदों पर महिलाएं विराजित हैं।

    भुवनेश्वर से पधारी तान्या पटनायक, संपादक द संबाद एंड कनक टीवी ने कहा कि मैं भगवान जगन्नाथ की धरती से आई हूँ। उनकी शिक्षाएं हमे कई समस्याओं का समाधान सुझाती है। जब जगन्नाथ भगवान की रथयात्रा निकलती है, तब उनमें सभी के हाथ लगते हैं। यह हमें सिखाता है कि हम सब एक परिवार है। मीडिया को भगवान जगन्नाथ से बहुत कुछ सीखना चाहिए। एकांकी परिवारो के युग मे मीडिया की जिम्मेदारी बढ़ गयी है।

    बुलढाणा से आए दैनिक देशोन्नति के सम्पादक डॉ राजेश राजौरे की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। मधुरवाणी ग्रुप ने स्वागत गीत से समाँ बांध दिया। डायमंड डांस ग्रुप की कुमारी नीता ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत कर देश भर से आए अथितियों को भाव विभोर कर दिया। मीडिया विंग की छत्तीसगढ़ राज्य समन्वयक बीके मंजू दीदी ने उद्घाटन सत्र के सफल संचालन किया।

    मीडिया समाज का दर्पण है, जो दिशा भी देता है और जागरुकता भी लाता है: डॉ. कुँवर राज अस्थाना
    डॉ कुँवर राज अस्थाना, संपादक दिव्य हिमगिरि, ने अपने विचार व्यक्त करते हुए देशभर से आए मीडिया प्रतिनिधियों का स्वागत किया और देवभूमि उत्तराखंड को नमन किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड शिव और विष्णु की पावन भूमि है, जहां आध्यात्मिक चेतना आज भी जीवंत है। उन्होंने सभी को आगामी चारधाम यात्रा के लिए आमंत्रित करते हुए देवभूमि आने का आग्रह किया। उन्होंने “नवीन सामाजिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि मीडिया स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही समाज को दिशा देने और मूल्यों की स्थापना करने में एक उत्प्रेरक (Catalyst) की भूमिका निभाता आया है। आज भी मीडिया जटिल सामाजिक मुद्दों जैसे पर्यावरण, जनस्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और मानवाधिकार को प्रमुखता से उठाकर समाज को जागरूक बनाने का कार्य कर रहा है। डॉ. अस्थाना ने कहा कि सोशल मीडिया के विस्तार ने एक स्वतंत्र मंच प्रदान किया है, जो सत्ता के प्रभाव से काफी हद तक मुक्त होकर भ्रष्टाचार उजागर करने और जवाबदेही तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। साथ ही, सफल व्यक्तियों की कहानियों, प्रेरक प्रसंगों और जीवन मूल्यों के माध्यम से मीडिया नई पीढ़ी के व्यक्तित्व निर्माण में भी योगदान देता है। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया समाज का दर्पण है. यह अच्छाई और बुराई दोनों को सामने लाता है। पाठकों और दर्शकों पर यह निर्भर करता है कि वे क्या देखना और पढ़ना चाहते हैं। प्रिंट मीडिया में संपादक की संस्था आज भी जवाबदेही सुनिश्चित करती है, जबकि सोशल मीडिया में जवाबदेही का अभाव एक चुनौती है, जिसे समय के साथ नियमन की आवश्यकता है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से दिव्य हिमगिरि का प्रकाशन कर रहे हैं, जो सकारात्मक और तथ्यात्मक सामग्री के साथ उत्तराखंड की एक प्रमुख समाचार पत्रिका है। इसके साथ ही उन्होंने “विज्ञान संप्रेषण” पत्रिका का भी प्रकाशन शुरू किया, जो पिछले 5 वर्षों से बिना किसी विज्ञापन के केवल अपने पाठकों के सहयोग से निरंतर प्रकाशित हो रही है। उन्होंने कहा कि ज्ञान-विज्ञान के प्रसार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी प्रयास को देखते हुए उत्तराखंड सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा केंद्रीय हिंदी संस्थान ने भी इस पहल की सराहना की है। अंत में उन्होंने कहा कि मीडिया को सकारात्मक, तथ्यात्मक और समाजोपयोगी सामग्री के माध्यम से जनजागरण का कार्य करते हुए एक सशक्त और जागरूक समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

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