ज्ञान, जुनून और जनसेवा का संगम प्रोफेसर (डॉ.) तिलोत्तमा सिंह

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अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि और शिक्षा के बारे में बताएं?
मेरा जन्म और पालन पोषण उत्तराखंड में हुआ और मेरी प्रारंभिक शिक्षा देहरादून से पूरी हुई। शुरुआत से ही मेरी रुचि अर्थशास्त्र के क्षेत्र में रही. जिसके चलते मैंने उच्च शिक्षा के लिए चंडीगढ़ का रुख किया। वहां मैंने विधी के साथ साथ अर्थशास्त्र में ऑनर्स किया। अपने ज्ञान और कौशल को और विकसित करने के उद्देश्य से मैंने मास कम्युनिकेशन में व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी किया, जिसमें पंजाब विश्वविद्यालय में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इसके बाद मैंने एमबीए में गोल्ड डिस्टिंक्शन हासिल की। शिक्षा का यह सफर यहीं नहीं रुका- मैंने उत्तरांचल विश्वविद्यालय में प्रबंधन एवं वाणिज्य विभाग की विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए भी अपने कौशल को लगातार निखारा और आईआईएम से एचआर एनालिटिक्स में डिस्टिंक्शन प्राप्त किया। वर्तमान में, मैं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हूं। एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन संस्था के साथ सीरीज एडिटर के रूप में जुड़ी हूं और भारत तथा विदेशों में महिला विकास से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स में योगदान दे रही हूं। एक वैश्विक SDG एडवोकेट के रूप में मेरे नाम 20 से अधिक पुस्तकें भी प्रकाशित हैं।

आपके प्रोफेशन के बारे में बताएं या आप इस क्षेत्र में कैसे आए और किससे प्रेरित हुए?
मेरे जीवन में सबसे बड़ी प्रेरणा मेरे पिता रहे हैं। उनसे ही मैंने सीख लिया कि अपने करियर को समझदारी से चुनना और उसमें निरंतर आगे बढ़ना कितना महत्वपूर्ण होता है। सौभाग्य से मुझे अपने करियर के अलग-अलग विकल्पों को समझने और चुनने की आजादी मिली और इसी के साथ मैंने अपने पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान लीला कैम्पिस्की में अपने करियर की शुरुआत की, जहां मैं ट्रेनिंग एवं डेवलपमेंट से जुड़ी रही। शुरुआत से ही मानव संसाधन को विकसित करना और उनकी क्षमताओं को निखारना मेरी रुचि का केंद्र रहा। इसी रुचि ने मुझे शिक्षा के क्षेत्र की ओर प्रेरित किया, जहां मैंने सीधे छात्रों के साथ काम करना शुरू किया। इस सफर की शुरुआत ‘टिच फॉर इंडिया’ के साथ हुई, जिसके बाद मैंने सरकारी स्कूलों की छात्राओं के साथ काम किया, चाहे वह होसनाबाद की छात्राएं हो, या वर्चुअल माध्यम से बांग्लादेश और नाइजीरिया की छात्राएं। पिछले 14 वर्षों से मैं शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय हूं और आईएमएस, एगिटी विश्वविद्यालय और वर्तमान में उत्तराँचल विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ कार्य कर चुकी हैं। मेरे लिए सबसे बड़ी संतुष्टि छात्रों के साथ जुड़कर उन्हें आगे बढ़ते देखना है। जब वं एक जिम्मेदार नागरिक बनकर समाज में सार्थक योगदान देते हैं, तो वही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। इसी सोच के साथ हम छात्र समितियों के माध्यम से सामाजिकः परियोजनाओं पर भी कार्य कर रहे हैं और इस पहल को वैश्विक स्तर तक ले जाने का लक्ष्य रखते हैं। मुझे विश्वास है कि ईश्वर की कृपा और हमारी सामूहिक कोशिशों से हम समाज में एक सकारात्मक और मजबूत बदलाव जरूर ला पाएंगे।

आपकी उपलब्धियों के बारे में बताएं, आपने क्या काम किया है?
मेरे पेशेवर सफर में शिक्षा, नेतृत्व और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में निरंतर योगदान मेरी प्रमुख उपलब्धि रही है। वर्तमान में मैं उत्तरांचल प्रबंधन संस्थान में विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हूं, जो उत्तराँचल विश्वविद्यालय का हिस्सा है। इस भूमिका में मैं फैकल्टी कोऑर्डिनेशन, पाठ्यक्रम विकास और छात्र कल्याण जैसे महत्वपूण् कार्यों का नेतृत्व कर रही हूं। मेरे नेतृत्त में विभाग ने अपने शैक्षणिक पाठ्यक्रम को उद्योग 4.0 और 5.0 की आवश्यकत्ताओं के अनुरूप विकसित किया है, जिससे छात्रों को आधुनिक और व्यावहारिक शिक्षा मिल सके। इसके साथ ही, मैंने संस्थान के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार करने में योगदान दिया है, जिसमें परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स, NIRF रैंकिंग में सुधार और CESIM जैसे बिजनेस सिमुलेशन दृल्स का समावेश शामिल है। All India Management Association (AIMA) की सक्रिय सदस्य भी हू, जहां मैं इंडस्ट्री और अकादमिक क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर काम कर रही हूं। इसके अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस, नेटवर्किंग और इंडस्ट्री कनेक्ट के माध्यम से छात्रों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कुल मिलाकर, मेरा उद्देश्य शिक्षा को केवल सैद्धांतिक न रखकर उसे व्यावहारिक, नवाचार-आधारित और समाज के लिए उपयोगी बनाना रहा है।

आपके भविष्य की योजनाओं के बारे में बताएं?
मेरी भविष्य की योजनाएं मुख्य रूप से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रभावशाली और परिवर्तनकारी नेतृत्व स्थापित करने के साथ-साथ मानव केंद्रित प्रबंधन के वैश्विक विमर्श को आगे बढ़ाने पर केंद्रित हैं। शोध और अकादमिक क्षेत्र में मेरा लक्ष्य उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्य करना है. विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कार्यस्थल पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव और महिला उद्यनियों के सामने आने वालो सामाजिक चुनौतियों जैसे विषयों पर। मैं अपने शोध को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित करने के साथ-साथ “Healing Algorithm” जैसे विषय पर एक महत्वपूर्ण पुस्तक लिखने की योजना भी रखती हूं, जिससे तकनीक और गानव मूल्यों के संतुलन को बेहतर तरीके से समझाया जा सके। पेशेवर स्तर पर, मैं अपने एचआर एनालिटिक्स के अनुभव का उपयोग करते हुए संगठनों को डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के दौरान मार्गदर्शन देना चाहती हूं, ताकि वे डेय-आधारित कार्यप्रणाली के साथ-साथ मानव मूल्यों और कल्याण को भी संतुलित रख सकें। इसके साथ ही. मेरा एक महत्वपूर्ण लक्ष्य महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य करना है। मैं एक मजबूत मेटरशिप फ्रेमवर्क तैयार करना चाहती हूं, जो उभरती हुई महिला शोधकर्ताओं और पेशेवरों को मार्गदर्शन दे सके। भविष्य में मैं एक NGO के माध्यम से विशेष रूप से महिलाओं और बालिकाओं के विकास के लिए कार्य करना चाहती हूं, क्योंकि वे समाज और परिवार की आधारशिला हैं। मैं अपने गृह राज्य उत्तराखंड से इस पहल की शुरुआत करते हुए नीति निर्माण, शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में योगदान देना चाहती हूं. ताकि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जा सके। अंततः मेरा उद्देश्य यह है कि शिक्षा, तकनीक और सामाजिक विकास के माध्यम से एक ऐसा संतुलित और समावेशी समाज बनाया जाए, जहां आर्थिक प्रगति के साथ स्माजिक समानता भी सुनिश्चित हो सके।

आप हमारी पत्रिका के माध्यम से क्या संदेश देना चाहेंगे?
मैं इस पत्रिका के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं, शिक्षार्थियों, उभरते नेतृत्वकर्ताओं और समाज के उन सभी लोगों से जुड़ना चाहती हूं. जो सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है। मेरा संदेश विशेष रूप से महिलाओं और उन सभी व्यक्तियों के लिए है, जो महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं। आज के इस प्रतिस्पर्धी और तेजी से बदलते अल्फा वर्ल्ड में यह आवश्यक है कि हम सभी मिलकर, सहयोग और सहभागिता के माध्यम से एक समावेशी और सशक्त समाज का निर्माण करें। इस मंच के माध्यम से मुझे अपने विचार साझा करने का अवसर देने के लिए मैं दिव्य हिमगिरि के संपादक कुँवर राज अस्थाना और पूनम आर्य का विशेष रूप से आभार व्यक्त करती हूं, जो समाज को जोड़ने वाले और समुदाय आधारित सार्थक कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। अंत में, मैं यही कहना चाहूंगी कि यदि हम सभी मिलकर कार्य करें, तो हम निश्चित रूप से एक बेहतर, समान और सशक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं।

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