भारतीय विचार के मजबूत स्तंभ ‘11 महानायक’

0
4

डॉ. लोकेन्द्र सिंह (समीक्षक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक हैं।

भारत में महापुरुषों की एक लंबी शृंखला है। भारत के सुदीर्घ इतिहास के प्रत्येक कालखंड में हमें ऐसे नायक दिखाई देते हैं, जिन्होंने भारतीय समाज का मार्ग प्रशस्त किया। ऐसे में कुछ नायकों को चुनना और उनके व्यक्तित्व पर लिखना, अत्यंत कठिन कार्य है। अपने लेखन के दौरान प्रो. संजय द्विवेदी समय-समय पर भारत के नायकों के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर लिखते रहे हैं। उनमें से ही 11 नायकों का चयन करके उन्होंने एक पुस्तक तैयार की है, जिसका नाम है- ‘11 महानायक’। ‘संस्मय प्रकाशन’ से प्रकाशित पुस्तक ‘11 महानायक’ भारतीय इतिहास और नवजागरण के उन देदीप्यमान नक्षत्रों की गाथा है, जिन्होंने अपने त्याग, संघर्ष और वैचारिक स्पष्टता से एक सशक्त भारत की नींव रखी। यह पुस्तक ‘गागर में सागर’ भरने का एक सफल प्रयास है, जो पाठकों को भारत के महान सपूतों के जीवन-दर्शन से सीधे जोड़ती है।

लेखक प्रो. संजय द्विवेदी ने अपनी इस कृति में छत्रपति शिवाजी महाराज के माध्यम से युवाओं को स्वराज्य और सांस्कृतिक गौरव की भावना से जोड़ने का प्रयास किया है। लेखक बताते हैं कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने सैन्य प्रणाली में कई प्रयोग किए। महाराज ने लोकमंगल के साथ शासन किया। वहीं, आध्यात्मिक पुनर्जागरण के पुरोधा स्वामी विवेकानंद तो युवाओं के नायक हैं, उनके व्यक्तित्व के कई पहलुओं की ओर इस पुस्तक में संकेत किया गया है। स्वामी विवेकानंद ने सोते हुए राष्ट्र को जगाया और उसका परचम दुनिया में फहराया। स्वराज्य, राष्ट्रीय एकता-अखंडता एवं सामाजिक समरसता का भाव जगाने वाले राजनीतिक क्षेत्र के महापुरुषों- पं. मदन मोहन मालवीय, महात्मा गांधी, स्वातंत्र्यवीर सावरकर, डॉ. भीमराव अंबेडकर, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों से भी यह पुस्तक हमें अवगत कराती है। भारत की राजनीति में भारतीयता के विचार को स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण योगदान श्यामाप्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी ने दिया है। स्वातंत्र्यवीर सावरकर के बारे में रोमांच जगाने वाले तथ्यों को शामिल किया गया है। जो लोग पूछते हैं कि वीर सावरकर को ‘वीर’ किसने कहा, उन्हें पता होना चाहिए कि सरदार भगत सिंह ने इस महान क्रांतिकारी के लिए ‘मतवाला’ में लेख लिखा था, जिसमें उन्होंने सावरकर को न केवल वीर कहा है अपितु पूजनीय भी कहा है। इस लेख में सरदार भगत सिंह ने स्वातंत्र्यवीर सावरकर पर छींटाकशी करने वाले संकीर्ण मानसिकता के लोगों को लताड़ा भी है।

लेखक प्रो. द्विवेदी ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन प्रसंगों को बहुत कुशलता से उकेरा है। नेताजी के जीवन से युवाओं को सीखना चाहिए कि अपने लक्ष्य के लिए किस प्रकार निरंतर प्रयास करने होते हैं। अपने संकल्पों को सिद्धि तक ले जाने की नेताजी की क्षमता अद्वितीय थी। इसके साथ ही पुस्तक में सामाजिक न्याय और एकात्मता के शिल्पी बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की पत्रकारिता को रेखांकित किया गया है। बाबा साहेब पत्रकारिता के माध्यम से मूक समाज की आवाज को ताकत देकर हम सबके नायक बने। इसके साथ ही, यह पुस्तक महान साहित्यकार, क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता सेनानी पंडित माखनलाल चतुर्वेदी जी की पत्रकारिता की धारा से भी परिचित कराती है। स्वतंत्रता के पहले और उसके बाद भी, भारतीय पत्रकारिता को मूल्यों के साथ जोड़ने के माखनलाल जी के प्रयास उल्लेखनीय हैं। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ही पहले संपादक थे, जिन्होंने पत्रकारों को गढ़ने के लिए विद्यापीठ का विचार दिया। उनके उसी विचार को साकार करते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने ‘माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय’ की स्थापना की। माखनलाल जी ने 1927 में राजस्थान के भरतपुर में आयोजित संपादक सम्मेलन में कहा था कि हिन्दी समाचार पत्रों के कार्यालयों में योग्य व्यक्ति आएँ, इसके लिए एक विद्यापीठ की आवश्यकता है।

उल्लेखनीय है कि प्रो. संजय द्विवेदी एक जाने-माने संचारविद् हैं। वे भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली यानी आईआईएमसी के महानिदेशक रह चुके हैं। साथ ही वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में प्राध्यापक और जनसंचार विभाग के अध्यक्ष हैं। उनकी यह पृष्ठभूमि इस पुस्तक की भाषा-शैली एवं विषय-वस्तु में स्पष्ट झलकती है। पुस्तक की भाषा प्रवाहपूर्ण और सहज है। ऐतिहासिक तथ्यों को बिना किसी बोझिलता के, सहजता के साथ प्रस्तुत किया गया है। वैचारिक विविधताओं एवं विविध कार्यक्षेत्रों के बावजूद, इन सभी महानायकों के भीतर जो एक ‘राष्ट्र-प्रथम’ का भाव था, उसे यह पुस्तक बहुत ही खूबसूरती से रेखांकित करती है।

आज के समय में, जब युवा पीढ़ी अपने इतिहास और आदर्शों से दूर होती जा रही है, यह पुस्तक एक सेतु का काम करती है। यह पाठकों को यह समझने में मदद करती है कि आधुनिक भारत का निर्माण कई महानायकों के सामूहिक तप का प्रतिफल है। यह पुस्तक युवा पीढ़ी के मन में अपने नायकों को जानने की जिज्ञासा पैदा करती है कि वे और अधिक पढ़ें, और दूसरे नायकों के बारे में पढ़ें। कुल मिलाकर, ‘11 महानायक’ एक ऐसी पुस्तक है जिसे सब पढ़ सकते हैं। कम समय में भारतीय जनमानस को गढ़ने वाले प्रमुख नायकों के बारे में प्रामाणिक और प्रेरणादायी जानकारी यह पुस्तक देती है।

पुस्तक विवरण
पुस्तक : 11 महानायक
लेखक : प्रो. संजय द्विवेदी
प्रकाशक : संस्मय प्रकाशन, दिल्ली
मूल्य : 80 रुपये
पृष्ठ : 72

Previous articleकेदारनाथ हेली शटल सेवा हेतु ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न, पारदर्शिता और सुव्यवस्था से यात्रियों को मिली सुविधा
Next articleआप पर अपनों ने ही चलाई “झाड़ू”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here