उद्यमिता और नेतृत्व में महिला शक्ति का निर्णायक उदय

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महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व और उद्यमिता को केंद्र में रखते हुए देहरादून में एक गरिमामय एवं प्रेरणादायी दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ, जिसमें महिलाओं की भूमिका को सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय विकास की मजबूत आधारशिला के रूप में रेखांकित किया गया। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित इस सम्मेलन में देश और राज्य स्तर के नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, महिला उद्यमियों, विशेषज्ञों और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने सहभागिता की। सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें उद्यमिता, डिजिटल जागरूकता, नवाचार, सतत आजीविका और नेतृत्व के अवसरों से जोड़ना रहा, ताकि महिलाएं न केवल अपने लिए बल्कि समाज और राष्ट्र के समग्र विकास में निर्णायक भूमिका निभा सकें। उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार ने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि महिलाओं की भागीदारी के बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और गणेश जोशी ने अपने संबोधनों में महिला उद्यमिता, स्वरोजगार और नेतृत्व क्षमता को राज्य और देश के विकास का आधार बताते हुए ऐसे मंचों को महिलाओं के लिए मार्गदर्शक और प्रेरक बताया। सम्मेलन में सरकारी योजनाओं, डिजिटल जागरूकता, साइबर सुरक्षा, जैविक खेती, बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नए अवसरों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। दिव्य हिमगिरि रिपोर्ट

महिला नेतृत्व, उद्यमिता और सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 7 जनवरी को एक भव्य एवं प्रेरणादायी दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। उत्तराखंड उद्योग परिसंघ महिला संगठन के उत्तराखंड प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में महिलाओं की भूमिका को सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय विकास की मजबूत आधारशिला के रूप में रेखांकित किया गया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार किसी अपरिहार्य कारणवश कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने वीडियो संदेश के माध्यम से महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका पर जोर दिया। दो दिवसीय इस सम्मेलन की विषयवस्तु महिलाओं को सशक्त बनाने की शक्ति पर आधारित रखी गई, जिसका उद्देश्य महिलाओं को डिजिटल सशक्तिकरण, उद्यम विकास, सरकारी सहभागिता और सतत आजीविका के अवसरों से जोड़ना है। सम्मेलन के पहले दिन की शुरुआत भव्य उद्घाटन सत्र से हुई, जिसमें कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने विशेष अतिथि के रूप में सहभागिता की। उन्होंने अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण, नव उद्यमों की संस्कृति और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं उद्यमिता से जुड़ती हैं, तो समाज और अर्थव्यवस्था दोनों को नई दिशा मिलती है। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने अपने वक्तव्य में कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं सदैव समाज और विकास की अग्रणी रही हैं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को राज्य के समग्र विकास की आधारशिला बताते हुए कहा कि ऐसे मंच महिलाओं की प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस अवसर पर उत्तराखंड उद्योग परिसंघ महिला संगठन की उत्तराखंड प्रकोष्ठ अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि महिला उद्यमिता राज्य और देश के आर्थिक विकास की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने की यह पहल केवल एक विषय नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर, सक्षम और नेतृत्वकर्ता बनाने की दिशा में एक सशक्त आंदोलन है। उन्होंने यह भी कहा कि जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं, तो परिवार, समाज और राष्ट्र स्वतः सशक्त होता है। सम्मेलन के दौरान साइबर जागरूकता विषय पर आयोजित सत्र में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंकुश मिश्रा ने साइबर अपराधों से बचाव, डिजिटल सुरक्षा और सतर्कता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय सजग और सुरक्षित रहें। इसके साथ ही व्यवसाय और विपणन क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर केंद्रित सत्र में विशेषज्ञ जूही खन्ना और करिश्मा डिंगरा ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से व्यवसाय को सशक्त बनाने के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए उत्तराखंड सरकार द्वारा महिलाओं के लिए संचालित विभिन्न उद्यम प्रोत्साहन योजनाओं की जानकारी दी गई। इस अवसर पर विषय विशेषज्ञों के साथ पैनल चर्चा का आयोजन भी किया गया। सम्मेलन में उत्तराखंड में जैविक खेती, बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों की व्यापक संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि ये क्षेत्र महिला उद्यमियों के लिए आजीविका सृजन और आर्थिक समृद्धि के बड़े अवसर प्रदान कर सकते हैं। पैनल चर्चा में महिला सहभागिता और सतत विकास पर विशेष बल दिया गया। इस अवसर पर डॉ. सुरेखा डंगवाल, श्रीमती मधु भट्ट, श्रीमती कुसुम कंडवाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने महिलाओं को विशिष्ट पहचान दिलाने और विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को और अधिक सशक्त करने पर जोर दिया।

महिलाओं के संकल्प और सामूहिक शक्ति से समाज और राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय होती है

महिलाओं की सोच, संकल्प और सामूहिक शक्ति जब एक मंच पर एकत्र होती है, तो केवल विचार नहीं जन्म लेते, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय होती है। इसी भावनात्मक और प्रेरणादायी वातावरण में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित दो दिवसीय महिला नेतृत्व एवं उद्यमिता सम्मेलन का द्वितीय सत्र 8 जनवरी को अत्यंत उत्साह, सार्थक संवाद और प्रेरक विचार-विमर्श के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाएं केवल परिवर्तन की सहभागी नहीं, बल्कि परिवर्तन की सूत्रधार हैं। इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल की धर्मपत्नी एवं प्रथम महिला द्वारा भेजे गए वीडियो संदेश का प्रसारण किया गया, जिसमें उन्होंने महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व विकास और सतत प्रगति के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए सम्मेलन की सफलता हेतु शुभकामनाएं दीं।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि श्रीमती गीता धामी ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि जब महिलाएं आत्मविश्वास, संकल्प और निरंतर परिश्रम के साथ आगे बढ़ती हैं, तो वे न केवल स्वयं को सशक्त बनाती हैं, बल्कि पूरे समाज को नई दिशा देती हैं। उन्होंने उत्तराखंड की महिलाओं से आह्वान किया कि वे राज्य और देश का नाम रोशन करते हुए अपनी अलग पहचान स्थापित करें। इसके पश्चात “संकल्प से सिद्धि तक” विषय पर आयोजित सत्र में सुश्री नेहा जोशी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि स्पष्ट लक्ष्य, निरंतर प्रयास और आत्मबल के सहारे महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता की नई इबारत लिख सकती हैं। जलवायु परिवर्तन विषयक तकनीकी सत्र में आयोजित कार्यशाला में यह बताया गया कि दैनिक जीवन में अपनाए गए छोटे-छोटे निर्णय और व्यवसाय में सतत उपाय किस प्रकार पर्यावरण के अनुकूल भविष्य के निर्माण में सहायक हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने जीवनशैली और व्यापार में जिम्मेदार व्यवहार को आवश्यक बताया।


वित्तीय साक्षरता से जुड़े सत्र में महिलाओं को आर्थिक नियोजन, बचत, निवेश और आत्मनिर्भरता के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के कोषाध्यक्ष पुनीत मित्तल ने कहा कि सुदृढ़ वित्तीय समझ किसी भी व्यवसाय और संगठन की सफलता की आधारशिला होती है। कार्यक्रम में प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष रुचि भट्ट ने महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका निभाने और निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं राज्य मंत्री (श्रम विभाग) श्रीमती गीता रावत ने श्रम क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और अधिकारों पर अपने विचार साझा किए। इसके उपरांत महिला उद्यमिता में स्थिरता विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि यदि व्यापार के केंद्र में स्थिरता को रखा जाए, तो दीर्घकालीन सफलता के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन भी सुनिश्चित किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान श्रीमती लुबना ने संगठन से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस मंच ने उन्हें आत्मविश्वास दिया और आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की। उन्होंने महिलाओं से निरंतर सीखते रहने और आगे बढ़ते रहने का संदेश दिया। सम्मेलन की सफलता में आयोजन समिति और कार्यकारिणी सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कोमल बत्रा, नेहा शर्मा, त्रिप्ती बहल, मीनाक्षी सोती, स्मृति बट्टा एवं हरप्रीत कौर की सक्रिय सहभागिता और कुशल प्रबंधन की विशेष रूप से सराहना की गई। अंतिम सत्र में महिलाओं के नेतृत्व में सतत विकास विषय पर गहन चर्चा हुई, जिसमें विशेषज्ञों और विशिष्ट अतिथियों ने व्यापार में पर्यावरणीय और सामाजिक उत्तरदायित्व को आत्मसात करने पर बल दिया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जब महिलाएँ स्थिरता को केंद्र में रखकर कार्य करती हैं, तो समाज और प्रकृति दोनों के लिए सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।
कार्यक्रम का समापन समापन सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए और सम्मेलन की समग्र उपलब्धियों को साझा किया गया। कुल मिलाकर सम्मेलन का द्वितीय दिवस महिला नेतृत्व, वित्तीय सशक्तिकरण और जिम्मेदार उद्यमिता की दिशा में एक सशक्त और प्रेरणादायी पहल के रूप में यादगार बन गया।

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