श्रमिक हितों को मजबूती देने वाला “बड़ा सुधार”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में लागू की गई नई श्रम संहिताओं ने श्रम कानूनों के लंबे इतिहास में सबसे व्यापक और संरचनात्मक बदलाव किए हैं। इन संहिताओं का उद्देश्य न सिर्फ श्रमिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करना है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर कार्य वातावरण देना भी है। पहली बार न्यूनतम वेतन की गारंटी को स्पष्ट रूप से लागू करते हुए गिग और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को कानूनी पहचान और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। वहीं महिला श्रमिकों को समान अवसर, सुरक्षित कार्यस्थल और रात में काम करने पर विशेष प्रावधान जैसी सुविधाएं देकर उनके लिए रोजगार के नए दरवाजे खोले गए हैं। इन व्यापक सुधारों के माध्यम से सरकार श्रमिकों के जीवन स्तर को उठाने, उनके अधिकारों को मजबूत करने और देश की श्रम व्यवस्था को अधिक संगठित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम बढ़ा रही है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश के सभी श्रमिकों को नई श्रम संहिताओं के देश भर में लागू किए जाने पर कहा, श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, समाजिक सुरक्षा, महिला श्रमिकों को समान अवसर की गारंटी और असंगठित श्रमिकों को कानूनी पहचान देने वाली ये संहिताएं श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाएंगी। वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया और इसे विकसित भारत की दिशा में निर्णायक कदम बताया। दिव्य हिमगिरि रिपोर्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में लागू की गई नई श्रम संहिताएं भारत के श्रम कानूनों के इतिहास का सबसे बड़ा और व्यापक सुधार मानी जा रही हैं। दशकों से अलग-अलग विभागों में बिखरे 29 श्रम कानूनों को सरल और सुव्यवस्थित करते हुए केंद्र सरकार ने इन्हें चार प्रमुख श्रम संहिताओं में समाहित किया। इन संहिताओं को 2019 और 2020 में संसद से पारित किया गया, जबकि इनके नियम 2021 से 2023 तक अंतिम रूप पाते रहे। सरकार का उद्देश्य श्रमिकों को मजबूत कानूनी सुरक्षा, उनके अधिकारों का संरक्षण और कार्यस्थलों को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी व आधुनिक बनाना है। नई संहिताओं के लागू होने से देश के 50 करोड़ से अधिक श्रमिकों के जीवन में प्रत्यक्ष सुधार की उम्मीद है। पहली बार असंगठित क्षेत्र, घरेलू कामगार, निर्माण श्रमिक, कृषि मजदूरों के साथ-साथ तेजी से बढ़ते गिग सेक्टर, जैसे डिलीवरी पार्टनर, ऐप आधारित टैक्सी चालक और फ्रीलांसर को स्पष्ट कानूनी पहचान और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार मिलने जा रहा है। न्यूनतम वेतन की स्पष्ट गारंटी, पेंशन, बीमा, मातृत्व लाभ, दुर्घटना सुरक्षा जैसी सुविधाएं अब अधिक व्यापक और सरल हो रही हैं। दूसरी ओर, महिलाओं की कार्यभागीदारी बढ़ाने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। अब महिलाएँ अपनी इच्छा के अनुसार रात की पाली में काम कर सकती हैं और उनके लिए सुरक्षा, परिवहन व कार्यस्थल व्यवस्था की संपूर्ण जिम्मेदारी नियोक्ता पर होगी। कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों को और कड़ा किया गया है, जिससे महिला श्रमिकों को सुरक्षित वातावरण मिले। उद्योग जगत के लिए भी यह सुधार बदलावकारी माने जा रहे हैं। रजिस्ट्रेशन, लाइसेंसिंग और निरीक्षण व्यवस्था को डिजिटल व पारदर्शी बनाने से न केवल भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी में कमी आएगी, बल्कि निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। आसान प्रक्रियाएं रोजगार सृजन को गति देंगी। वेतन निर्धारण में ‘एक राष्ट्र एक व्यवस्था’ की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए न्यूनतम वेतन के मानकों में एकरूपता लाई गई है, जिससे राज्यों में बार-बार होने वाली जटिलताओं को कम किया जा सके। श्रम संहिताओं की यह पूरी प्रक्रिया, जो 2019 से 2023 तक विभिन्न चरणों में आगे बढ़ी, भारत के श्रम तंत्र को आधुनिक बनाने और श्रमिक हितों को केंद्र में रखकर आर्थिक विकास को गति देने का प्रयास है। सरकार का मानना है कि ये सुधार श्रमिकों को सशक्त बनाने, उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने और भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होंगे। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश के सभी श्रमिकों को नई श्रम संहिताओं के देश भर में लागू किए जाने की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं । अमित शाह ने कहा कि श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, समाजिक सुरक्षा, महिला श्रमिकों को समान अवसर की गारंटी और असंगठित श्रमिकों को कानूनी पहचान देने वाली ये संहिताएं श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाएंगी। साथ ही, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को भी गति देकर दुनिया के श्रम कानूनों के लिए रोल मॉडल बनेंगी। वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया और इसे विकसित भारत की दिशा में निर्णायक कदम बताया। सीएम धामी ने कहा कि निश्चित रूप से आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद मोदी के सशक्त एवं कुशल नेतृत्व में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा लागू की गई चार नई श्रम संहिताएं न केवल श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करेंगी, बल्कि कार्यस्थलों पर पारदर्शिता, सुरक्षा और सम्मान की नई संस्कृति स्थापित करेंगी। न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, समान अवसर और स्वास्थ्य संरक्षण की यह व्यापक गारंटी श्रमवीरों को राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रखने का स्पष्ट प्रमाण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में निर्णायक कदम है।

नई श्रम संहिताओं से श्रमिकों के अधिकारों को मिलेगी मजबूती

भारत में लागू की जा रही नई श्रम संहिताओं ने न केवल श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत किया है, बल्कि उद्योग क्षेत्र, राज्य सरकारों और प्रशासनिक तंत्र के बीच एक नई कार्यसंस्कृति की दिशा भी तय कर दी है। लंबे समय से बदलाव की प्रतीक्षा कर रहे श्रम ढांचे को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के इस कदम ने देश के रोजगार बाजार में व्यापक परिवर्तन की संभावनाएं खोल दी हैं। उद्योग संगठनों का मानना है कि बीते वर्षों में परिचालन संबंधी बाधाएं, जटिल अनुमति-प्रक्रियाएं और अलग-अलग राज्यों के असमान श्रम नियम निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती थे। संशोधित संहिताएं अब इन सभी प्रक्रियाओं में एकरूपता लाकर उद्योगों को तेजी से विस्तार और रोजगार सृजन में मदद करेंगी। राज्य सरकारें भी इन सुधारों को रोजगार वृद्धि का अवसर मान रही हैं। संहिताएं राज्यों को स्थानीय उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार नियमों को लागू करने का लचीलापन देती हैं, लेकिन ढांचे की मुख्य रूपरेखा पूरे देश में एकसमान रहेगी। इससे उत्तराखंड, हरियाणा, गुजरात और कर्नाटक जैसे उद्योग-प्रधान राज्यों में ‘इंडस्ट्रियल जोन’ विकसित करने की गति तेज होगी। साथ ही, श्रमिकों को अब राज्य बदलने पर उनके वेतन, सामाजिक सुरक्षा और कार्यशर्तों में भिन्नता का सामना नहीं करना पड़ेगा। देश की अर्थव्यवस्था बढ़ते हुए सेवा क्षेत्र, ई-कॉमर्स, निर्माण और विनिर्माण पर आधारित है। लेकिन इन क्षेत्रों में कार्यरत करोड़ों श्रमिक आज तक किसी सुव्यवस्थित सामाजिक सुरक्षा ढांचे के बाहर थे। नई संहिताएं इस कमी को पूरा करती हैं और एक ऐसा मॉडल तैयार करती हैं जहां रोजगार स्थिर न होने पर भी सुरक्षा सुनिश्चित रहेगी। ये व्यवस्था खास तौर पर युवाओं के लिए महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि आज 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 40 प्रतिशत युवा असंगठित या गिग आधारित कामों पर निर्भर हैं। नई संहिताओं का एक बड़ा प्रभाव कार्यस्थलों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी मानकों के सुधार के रूप में सामने आएगा। कई उद्योग समूह अब अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सुरक्षा और कामकाजी माहौल पर अतिरिक्त निवेश करने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में मजबूत बनाएगा। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना भी सुधारों का एक प्रमुख पक्ष है। श्रम संहिताएं महिलाओं को सुरक्षित वातावरण में रात की पाली में काम करने का विकल्प देती हैं, जिससे बीपीओ, आतिथ्य, स्वास्थ्य सेवाओं और औद्योगिक इकाइयों में महिला रोजगार बढ़ने की संभावना है। यह परिवर्तन देश की कार्यशक्ति को अधिक संतुलित और विविध बनाएगा। सरकार का दावा है कि यह बदलाव केवल कानूनी सुधार नहीं, बल्कि ‘नया श्रम तंत्र’ है जिसमें श्रमिक और उद्योग दोनों की आवश्यकताओं को जोड़कर अर्थव्यवस्था को भविष्य के लिए तैयार किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में इन सुधारों का वास्तविक असर तब दिखेगा, जब राज्य अपने-अपने स्तर पर नियमों को प्रभावी रूप से लागू करेंगे और उद्योग इन अवसरों का लाभ उठाते हुए रोजगार सृजन को गति देंगे।

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